नानसलाई, गुजरात: गुजरात राज्य के महिसागर जिले की संतरामपुर तहसील के एक दूरस्थ गांव नानसलाई में मानवीय संवेदनाओं और निस्वार्थ सेवा की एक अद्भुत मिसाल देखने को मिली है। यहाँ एक विधवा महिला, सविता बहन शंकर भाई, जो पिछले कई वर्षों से अत्यंत दयनीय परिस्थितियों में अपने तीन बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं, उनके लिए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज एक मसीहा बनकर सामने आए हैं। संत रामपाल जी महाराज ने अपनी लोक कल्याणकारी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के अंतर्गत इस परिवार की सुध ली और उन्हें न केवल तात्कालिक राहत पहुँचाई, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य को संवारने का संकल्प भी लिया है।
अत्यंत विषम परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहा था परिवार
नानसलाई गांव के बाहरी इलाके में स्थित सविता बहन का घर वास्तव में लकड़ियों और तिरपाल से बनी एक कच्ची झोपड़ी मात्र है। उनके पति का निधन लगभग तीन-चार वर्ष पूर्व टीबी (क्षय रोग) जैसी गंभीर बीमारी के कारण हो गया था। तब से सविता बहन अकेले ही अपने परिवार की जिम्मेदारी उठा रही हैं।
उनके पास रहने के लिए कोई पक्का मकान नहीं है और झोपड़ी की हालत ऐसी है कि लकड़ियों के बीच से सांप या अन्य जहरीले जीव कभी भी अंदर आ सकते हैं। घर में बिजली का कोई कनेक्शन नहीं है, जिससे भीषण गर्मी में बिना पंखे के रहना उनकी नियति बन गई थी। पीने के पानी के लिए भी उनके पास सीमित साधन हैं और खाना बनाने के लिए केवल एक मिट्टी का चूल्हा है।
सविता बहन संघर्ष और आर्थिक अभाव की पराकाष्ठा
सविता बहन की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे प्रतिदिन मजदूरी करके मात्र ₹50 से ₹100 कमा पाती हैं, वह भी तब जब काम उपलब्ध हो। जिस दिन काम नहीं मिलता, उस दिन परिवार को भूखे पेट सोने तक की नौबत आ जाती है। उनके तीन छोटे बच्चे हैं, जिनमें से बड़ी बेटी जब स्कूल जाती है, तो वह अपनी छोटी बहन को भी साथ ले जाती है ताकि उनकी माँ मजदूरी पर जा सके।
रिश्तेदारों या समाज के अन्य लोगों से उन्हें कोई विशेष सहयोग नहीं मिल रहा था, जिससे वे पूरी तरह से एकाकी जीवन जीने को विवश थीं। उनके घर तक पहुँचने का रास्ता भी अत्यंत दुर्गम है, जहाँ एक नाला पार करके और फिसलन भरे रास्तों से होकर जाना पड़ता है।
संत रामपाल जी महाराज ने पहुँचाई सहायता
जब इस परिवार की दयनीय स्थिति की जानकारी संत रामपाल जी महाराज तक पहुँची, तो उन्होंने अविलंब अपनी टीम और मुनि धर्मार्थ ट्रस्ट के सेवादारों को सहायता भेजने के निर्देश दिए। संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से सविता बहन के परिवार के लिए संपूर्ण खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं प्रदान की गईं।
शिक्षा और उज्जवल भविष्य के लिए अटूट प्रतिबद्धता
संत रामपाल जी महाराज का मानना है कि गरीबी के चक्र को केवल शिक्षा के माध्यम से ही तोड़ा जा सकता है। इसी उद्देश्य से, उन्होंने सविता बहन की बेटियों की शिक्षा का संपूर्ण खर्च उठाने का निर्णय लिया है। सेवादारों ने बताया कि बच्चों के स्कूल की फीस, यूनिफॉर्म और किताबों की व्यवस्था संत रामपाल जी महाराज द्वारा की जाएगी।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए संत रामपाल जी महाराज ने यह सुनिश्चित किया है कि संसाधनों के अभाव में इन बच्चों की शिक्षा बाधित न हो। स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि संत रामपाल जी महाराज भगवान के रूप में इस परिवार की मदद के लिए आए हैं।
आजीवन सहायता और निरंतर निगरानी की व्यवस्था
इस सेवा कार्य की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह सहायता एक बार की घटना नहीं है। संत रामपाल जी महाराज ने निर्देश दिए हैं कि जब तक सविता बहन का परिवार आत्मनिर्भर नहीं हो जाता, तब तक उन्हें हर महीने राशन और आवश्यक सामग्री निशुल्क प्रदान की जाएगी।
इसके लिए उन्हें एक संपर्क कार्ड दिया गया है, जिस पर स्थानीय सेवादारों के नंबर अंकित हैं। राशन समाप्त होने से दो दिन पूर्व सूचना देने पर सेवादार स्वयं उनके घर तक सामग्री पहुँचाएंगे। इसके अतिरिक्त, संत रामपाल जी महाराज जी के सेवादारों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि सविता बहन के पास रहने के लिए सुरक्षित मकान की आवश्यकता है, तो संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में उनके लिए पक्के मकान का निर्माण भी करवाया जा सकता है।
संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत पहुँचाई राहत सामग्री की सूची:
इस परिवार की व्यथा जब संत रामपाल जी महाराज के संज्ञान में आई, तो उन्होंने अविलंब सहायता भेजने के निर्देश दिए। संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से परिवार के लिए संपूर्ण घरेलू राशन और रसोई की व्यवस्था सुनिश्चित की।
| क्रम | सामग्री | मात्रा |
| 1 | आटा | 15 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | चीनी | 2 किलो |
| 4 | सरसों तेल | 1 लीटर |
| 5 | चने की दाल | 1 किलो |
| 6 | मूंग दाल | 1 किलो |
| 7 | हल्दी | 150 ग्राम |
| 8 | जीरा | 150 ग्राम |
| 9 | लाल मिर्च | 100 ग्राम |
| 10 | नहाने का साबुन | 4 पीस |
| 11 | कपड़े धोने का साबुन | 1 पैकेट |
| 12 | टाटा नमक | 1 पैकेट |
| 13 | सूखा दूध | 1 किलो |
| 14 | आलू | 5 किलो |
| 15 | प्याज | 5 किलो |
| 16 | अचार | 1 पैकेट |
| 17 | कपड़े धोने का सर्फ | 1 पैकेट |
| 18 | टाटा अग्नि चाय पत्ती | 1 पैकेट |
नशा मुक्ति और सदाचार की अनिवार्य शर्त
संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही इस अन्नपूर्णा मुहिम का एक गहरा सामाजिक और नैतिक पहलू भी है। इस योजना का लाभ प्राप्त करने वाले परिवारों के लिए यह अनिवार्य है कि वे किसी भी प्रकार के नशे (जैसे शराब, तंबाकू, मांस) का सेवन नहीं करेंगे। संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य केवल पेट भरना ही नहीं, बल्कि समाज को व्यसनों से मुक्त कर एक स्वस्थ और सात्विक वातावरण तैयार करना है। यदि कोई लाभार्थी सहायता प्राप्त करने के बाद नशा करते हुए पाया जाता है, तो उसकी सहायता तुरंत प्रभाव से बंद कर दी जाती है। सविता बहन और उनके परिवार ने इन नियमों का पालन करने का पूर्ण संकल्प लिया है।
कलयुग में सतयुग की ओर बढ़ते कदम
संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों का कहना है कि महाराज जी का लक्ष्य पूरी दुनिया में “रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान, सबको देगा कबीर भगवान” के नारे को चरितार्थ करना है। नानसलाई गांव में सविता बहन को मिली यह सहायता इसी व्यापक मिशन का एक हिस्सा है। जहाँ आधुनिक युग में लोग स्वार्थ केंद्रित होते जा रहे हैं, वहाँ संत रामपाल जी महाराज बिना किसी भेदभाव के समाज के सबसे पिछड़े और उपेक्षित वर्ग की बांह पकड़ रहे हैं। उनकी यह पहल न केवल एक परिवार की भूख मिटा रही है, बल्कि पूरे समाज को दया, प्रेम और निस्वार्थ सेवा का संदेश भी दे रही है।
