संत रामपाल जी महाराज के द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम समाज के उन वर्गों तक राहत पहुंचा रही है, जो लंबे समय से भूख, गरीबी और असहायता से जूझ रहे हैं। हरियाणा के रोहतक जिले के रिठाल गांव में सामने आई एक मार्मिक कहानी। जहां एक असहाय महिला और उसके छह बच्चों को भोजन, राशन और शिक्षा सामग्री के रूप में जीवनदायी सहायता मिली।
रिठाल गांव की पृष्ठभूमि और परिवार की स्थिति
रिठाल गांव रोहतक जिले का एक सामान्य ग्रामीण क्षेत्र है, लेकिन यहां रहने वाली सकीना का जीवन असाधारण संघर्षों से भरा रहा है। घरेलू हिंसा और पारिवारिक टूटन के बाद सकीना अपने छह बच्चों के साथ अकेली रह गई। बच्चों में चार बेटियां और दो बेटे हैं। पति से अलग होने के बाद जीवनयापन की पूरी जिम्मेदारी उसी पर आ गई। स्थायी आय का कोई साधन न होने के कारण भोजन और बच्चों की पढ़ाई सबसे बड़ी चुनौती बन गई थी।
आश्रय और पारिवारिक सहयोग
सकीना वर्तमान में अपने भाई के मकान में रह रही है। भाई सेना से सेवानिवृत्त हैं और उन्होंने बहन को छत और कुछ घरेलू सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। हालांकि यह सहायता सीमित थी। गैस सिलेंडर, फ्रिज और अन्य सामान भाई का था, लेकिन परिवार के दैनिक खर्च और बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करना सकीना के लिए अत्यंत कठिन था।

अन्नपूर्णा मुहिम का आगमन
गांव के सरपंच के माध्यम से मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट को इस परिवार की स्थिति की जानकारी मिली। यह ट्रस्ट संत रामपाल जी महाराज के आदेशों से अन्नपूर्णा मुहिम का संचालन करता है। ट्रस्ट के सेवादार रिठाल गांव पहुंचे और परिवार से प्रत्यक्ष संवाद कर उनकी आवश्यकताओं का आंकलन किया। यह परिवार के लिए पहली बार था जब किसी ने उनकी पीड़ा को समझा।
रिठाल गांव के परिवार को संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम के तहत दी गई सामग्री की सूची:
| क्रम | सामग्री | बड़ा परिवार (4+ सदस्य) |
| 1 | आटा | 15 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | चीनी | 2 किलो |
| 4 | सरसों तेल | 1 लीटर |
| 5 | काले चने | 1 किलो |
| 6 | हरी मूंग दाल | 1 किलो |
| 7 | हल्दी | 150 ग्राम |
| 8 | जीरा | 150 ग्राम |
| 9 | लाल मिर्च | 100 ग्राम |
| 10 | नहाने का साबुन | 4 पीस |
| 11 | कपड़े धोने का साबुन | 1 किलो |
| 12 | टाटा नमक | 1 पैकेट |
| 13 | सूखा दूध | 1 पैकेट |
| 14 | आलू | 5 किलो |
| 15 | प्याज | 5 किलो |
| 16 | अचार | 1 पैकेट |
| 17 | कपड़े धोने का सर्फ | 1 पैकेट |
| 18 | टाटा अग्नि चाय पत्ती | 1 पैकेट |
अन्य सहायता
- स्कूल की किताबें (दी जा चुकी हैं)
- स्कूल ड्रेस (दिलाने की जिम्मेदारी ली गई है)
- जूते (दिलाने की जिम्मेदारी ली गई है)
- पेंसिल (दिलाने की जिम्मेदारी ली गई है)
- गैस सिलेंडर (खत्म होने पर फिर से भरवा कर देने की सुविधा)
यह सामग्री परिवार की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त थी।
शिक्षा पर विशेष ध्यान
संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम केवल पेट भरने तक सीमित नहीं है। बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है। सकीना की चारों बेटियां स्कूल जाती हैं, जबकि दोनों बेटे छोटे हैं। ट्रस्ट ने आश्वासन दिया कि बच्चों की कॉपियां, किताबें, पेंसिल, स्कूल ड्रेस और जूते निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की फीस और अध्ययन सामग्री की व्यवस्था भी की जाएगी।
गैस और अन्य सुविधाओं की निरंतर सहायता
परिवार को यह भी बताया गया कि गैस सिलेंडर समाप्त होने से पहले सूचना देने पर नया सिलेंडर उपलब्ध करा दिया जाएगा। इस प्रकार भोजन पकाने से लेकर दैनिक जीवन की अन्य आवश्यकताओं तक, हर स्तर पर सहायता सुनिश्चित की गई है। यह सहायता संत रामपाल जी महाराज के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार दी जा रही है।
गांव के मुखिया की प्रतिक्रिया
रिठाल गांव के मुखिया ने इस पहल की खुले दिल से सराहना की। उनके अनुसार गांव में कई परिवारों को अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत सहायता मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि इससे पहले किसी भी संस्था या व्यक्ति ने इस स्तर पर निरंतर और व्यवस्थित मदद नहीं की थी। गांव में गरीब परिवारों के जीवन में वास्तविक बदलाव देखने को मिल रहा है।
नशामुक्त और नैतिक जीवन की शर्त
अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत सहायता पाने के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त रखी गई है। लाभार्थी परिवारों को पूर्ण रूप से नशामुक्त जीवन जीना होगा और मांस अथवा किसी भी प्रकार की अभक्ष वस्तुओं का सेवन नहीं करना होगा। यदि कोई लाभार्थी इन शर्तों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसकी सहायता तत्काल प्रभाव से बंद कर दी जाती है। यह नियम सामाजिक सुधार की दिशा में एक ठोस कदम है।
संत रामपाल जी महाराज का मार्गदर्शन
हालांकि समाज में यह धारणा फैलाई जाती है कि संत रामपाल जी महाराज जेल में हैं, लेकिन उनके अनुयायियों का कहना है कि उनके आदेश और मार्गदर्शन से यह सेवा कार्य निरंतर चल रहा है। जैसे एक प्रधानमंत्री अपने कार्यालय से पूरे देश के कार्यों का संचालन करता है, वैसे ही संत रामपाल जी महाराज के निर्देशों से उनके शिष्य सेवा कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।
मानवीय गरिमा की पुनर्स्थापना
सकीना और उसके बच्चों के चेहरे पर आई मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि अन्नपूर्णा मुहिम केवल राहत नहीं, बल्कि आत्मसम्मान भी लौटाती है। जब किसी परिवार को यह विश्वास हो जाता है कि उसकी बुनियादी जरूरतें पूरी होंगी और बच्चों का भविष्य सुरक्षित है, तो जीवन के प्रति दृष्टिकोण बदल जाता है।
भूखे पेटों से उज्ज्वल भविष्य तक
अन्नपूर्णा मुहिम संत रामपाल जी महाराज की उस सोच का प्रत्यक्ष रूप है, जिसमें हर गरीब को रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान का अधिकार मिलना चाहिए। रिठाल गांव की यह कहानी बताती है कि यह अभियान एक साधारण सेवा नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की सशक्त क्रांति है, जो भूखे पेटों को भरते हुए आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवार रही है।

