उत्तर प्रदेश के शामली जिले के छोटे से गांव नौंगली में रहने वाली तारा नामक विधवा मां अपने तीन बच्चों के साथ कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रही थी। पति के निधन के बाद उनके सामने जीवनयापन की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई थी।
तारा जी गन्ने के खेतों में मजदूरी करके अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं, लेकिन कमजोर स्वास्थ्य और सीमित आय के कारण कई बार दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाता था। ऐसे कठिन समय में जब जीवन के सभी रास्ते बंद नजर आने लगे, तब संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम इस परिवार के लिए सहारा बनकर सामने आई।
परिवार की दयनीय स्थिति
तारा जी का परिवार कई प्रकार की समस्याओं से जूझ रहा था:
- मुखिया का अभाव: पति के निधन के बाद परिवार में कोई स्थायी कमाने वाला नहीं रहा।
- कठिन श्रम के बावजूद सीमित आय: तारा जी खेतों में मजदूरी करती थीं, लेकिन स्वास्थ्य समस्याओं के कारण लगातार काम करना संभव नहीं था।
- बच्चों का भविष्य संकट में: तीनों बच्चे शिक्षा और पोषण दोनों की कमी से जूझ रहे थे।
- सहयोग का अभाव: रिश्तेदारों और समाज से कोई विशेष सहायता नहीं मिल पा रही थी।
परिवार पूरी तरह असहाय स्थिति में जीवन यापन कर रहा था।
संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार मिली सहायता
जब इस परिवार की स्थिति की जानकारी संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया।
उनके मार्गदर्शन में मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के सेवादार नौंगली गांव पहुंचे और परिवार की स्थिति का निरीक्षण किया। इसके बाद संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार इस परिवार को अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत नियमित सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया।
प्रदान की गई राहत सामग्री
संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार परिवार को एक माह के लिए आवश्यक राशन एवं अन्य सामग्री निःशुल्क उपलब्ध करवाई गई:
| क्रम संख्या | सामग्री | मात्रा / विवरण |
| 1 | आटा | 25 किलो |
| 2 | बासमती चावल | 5 किलो |
| 3 | आलू | 5 किलो |
| 4 | प्याज | 5 किलो |
| 5 | चीनी | 4 किलो |
| 6 | दालें | हरी मूंग, पीली मूंग, काला चना |
| 7 | तेल | 2 लीटर (सोयाबीन तेल) |
| 8 | मसाले | हल्दी, जीरा, लाल मिर्च |
| 9 | नमक | 1 किलो |
| 10 | साबुन | नहाने और कपड़े धोने हेतु |
| 11 | अचार | 0.5 किलो |
| 12 | सूखा दूध | 500 ग्राम |
| 13 | चाय पत्ती | आवश्यकतानुसार |
| 14 | गैस सिलेंडर | आवश्यकतानुसार |
| 15 | शिक्षा सामग्री | बच्चों की कॉपी और किताबें |
निरंतर सहायता की व्यवस्था
अन्नपूर्णा मुहिम की विशेषता यह है कि यह सहायता केवल एक बार तक सीमित नहीं रहती। परिवार को एक संपर्क नंबर प्रदान किया गया है। जब भी राशन समाप्त होने वाला होगा, तो दो दिन पहले सूचना देने पर नई सामग्री उपलब्ध करवा दी जाएगी। यह सहायता संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार तब तक जारी रहेगी जब तक परिवार आत्मनिर्भर नहीं हो जाता।
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भावुक प्रतिक्रियाएं
तारा जी ने भावुक होकर कहा:
“संत रामपाल जी महाराज ने हमें अपने परिवार की तरह अपनाया है। उनके कारण अब हमारे चेहरे पर मुस्कान है और हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो गया है।”
बच्चों ने कहा कि अब वे बिना चिंता के अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे पाएंगे। सेवादार ने बताया कि यह सहायता निरंतर जारी रहेगी और परिवार को हर संभव सहयोग दिया जाएगा।
नशामुक्त और सात्विक जीवन की शर्त
अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत सहायता उन्हीं परिवारों को दी जाती है जो:
- नशा नहीं करते
- मांसाहार का सेवन नहीं करते
- सात्विक जीवन शैली अपनाते हैं
यदि कोई इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो सहायता बंद की जा सकती है। इसका उद्देश्य समाज में सकारात्मक और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।
सेवा का व्यापक उद्देश्य
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम केवल भोजन तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत जरूरतमंद परिवारों को:
- राशन
- शिक्षा सामग्री
- चिकित्सा सहायता
- और अन्य मूलभूत सुविधाएं
निःशुल्क प्रदान की जाती हैं।
एक नई उम्मीद की कहानी
नौंगली गांव की यह घटना इस बात का प्रमाण है कि जब समाज में हर ओर से उम्मीद टूटने लगती है, तब सच्ची सेवा और सही मार्गदर्शन जीवन में नई रोशनी ला सकते हैं। संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम न केवल जरूरतमंदों को सहारा दे रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान कर रही है। यह कहानी उन हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं—कि सही समय पर मिला सहयोग जीवन को नई दिशा दे सकता है।

