जब एक माँ की आँखों में अपने बच्चों के भविष्य का डर समा जाए और घर की दीवारें भी भूख के आगे बेबस और शर्मिंदा होने लगें, तो वहां निराशा नहीं बल्कि एक कड़े संघर्ष की गाथा लिखी जाती है। कुछ ऐसी ही हृदयविदारक कहानी राजस्थान के पाली जिले की सोजत सिटी तहसील के ग्राम सिसरवादा की है। यहाँ तारा चौधरी और उनके दो मासूम बच्चे ऐसी विकट परिस्थितियों से गुजर रहे थे, जहाँ जीवन की हर उम्मीद टूटती हुई नज़र आ रही थी।
किस्मत ने इस परिवार को इतना तोड़ दिया था कि अब उनके सपने भी दम तोड़ने लगे थे। लेकिन कहते हैं ना कि जब अंधेरा सबसे गहरा होता है, तभी रोशनी की एक किरण दिखाई देती है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज इस परिवार के लिए वही रोशनी और नई उम्मीद बनकर आए।
परिवार की दर्दनाक और दयनीय स्थिति
तारा जी के परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा, जिसने पूरे घर की नींव हिला कर रख दी:
- मुखिया का साया उठना: लगभग 2 साल पहले तारा जी के पति का कैंसर जैसी भयानक और जानलेवा बीमारी से निधन हो गया। पति की मौत के बाद घर में कमाने वाला कोई पुरुष नहीं बचा।
- गंभीर बीमारी से जूझती माँ: पति के जाने के बाद परिवार को पालने की पूरी जिम्मेदारी तारा जी पर आ गई, लेकिन दुर्भाग्यवश वह स्वयं टीबी (TB) और भयंकर खांसी जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो गईं। बीमारी के कारण वह मजदूरी या कोई शारीरिक मेहनत वाला काम करने में पूरी तरह असमर्थ हैं।
- बच्चों का भविष्य दांव पर: तारा जी के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं (जिनमें से एक बच्चा छठी कक्षा में पढ़ता है)। घर में राशन तक का दाना नहीं था, ऐसे में बच्चों की पढ़ाई जारी रखना और उनके दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना एक असंभव चुनौती बन गया था।
- मदद का पूर्ण अभाव: बुजुर्ग माता-पिता भी शारीरिक और आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं थे कि वे इस बेबस बेटी और उसके बच्चों का पूरा बोझ उठा सकें। आस-पड़ोस या समाज से भी उन्हें कोई विशेष सहायता नहीं मिल रही थी। यह परिवार पूरी तरह से बुरी स्थिति में पहुँच गया था।
संत रामपाल जी महाराज बने फरिश्ते
जब इस असहाय परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं था, तब संत रामपाल जी महाराज मसीहा बनकर पहुँचे। “रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान, हर गरीब को देगा कबीर भगवान” – इसी महान संकल्प के साथ मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट (सतलोक आश्रम) के सेवादारों ने संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार सिसरवादा गांव में घर-घर जाकर सर्वे किया। गाँव के सरपंच और मुखिया से जानकारी प्राप्त करने के बाद, टीम ने तारा जी के घर का निरीक्षण किया।

उनकी अत्यंत दयनीय स्थिति की रिपोर्ट बनाकर संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रस्तुत की गई, जिसके तुरंत बाद इस बेसहारा परिवार को संत रामपाल जी महाराज द्वारा गोद ले लिया गया।
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राहत सामग्री का विस्तृत विवरण
अन्नपूर्णा मुहिम के तहत संत रामपाल जी महाराज द्वारा तारा जी के परिवार को रसोई के सामान से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक की पूरी सामग्री भेंट की गई:
| क्रम संख्या | सामग्री का नाम | मात्रा / विवरण |
| 1 | आटा | 15 किलोग्राम |
| 2 | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 3 | आलू और प्याज | 2.5 किलो आलू, 2.5 किलो प्याज |
| 4 | सूखा दूध (अमूल) | बच्चों के पीने के लिए पौष्टिक दूध |
| 5 | दालें | हरी मूंग दाल, पीली मूंग दाल, चने की दाल |
| 6 | चना | काला चना |
| 7 | सोयाबीन तेल | 1 लीटर |
| 8 | मसाले | लाल मिर्च, जीरा, हल्दी (आवश्यकतानुसार) |
| 9 | अन्य खाद्य सामग्री | चाय पत्ती, टाटा नमक, 1 किलो अचार |
| 10 | स्वच्छता किट | 2 नहाने के साबुन, 1 किलो कपड़े धोने का साबुन, सर्फ |
| 11 | विशेष शिक्षा सामग्री | बच्चों की पढ़ाई के लिए नई कॉपी और किताबें |
आजीवन सहायता का वचन और कार्ड सुविधा
सेवादार ने स्पष्ट किया कि यह कोई एक दिन का दिखावा या केवल सोशल मीडिया के लिए की गई मदद नहीं है। संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट आदेश है कि जब तक इस परिवार के बच्चे बड़े होकर खुद कमाने योग्य और आत्मनिर्भर नहीं हो जाते, तब तक इस परिवार के भरण-पोषण की पूरी ज़िम्मेदारी संत रामपाल जी महाराज उठाएंगे।
तारा जी को आश्रम की तरफ से एक विशेष कार्ड दिया गया है। जब भी घर का राशन खत्म होने वाला हो, उन्हें बस दो दिन पहले उस कार्ड पर लिखे नंबरों पर फोन करना होगा और राशन ससम्मान उनके दरवाजे पर पहुँचा दिया जाएगा।
भावुक कर देने वाली प्रतिक्रियाएं
तारा चौधरी (भावुक होते हुए):
“मेरे पति के जाने के बाद हम पूरी तरह बेसहारा हो गए थे। मैं हाथ जोड़कर बहुत-बहुत धन्यवाद कहना चाहती हूँ संत रामपाल जी महाराज का, जिन्होंने मुझे बेटी और मेरे बच्चों को अपने बच्चों के रूप में देखा। आज मेरे चेहरे पर जो मुस्कान है, वह केवल गुरु जी की वजह से है। उन्होंने मेरे बच्चों की भूख मिटाई और उनका भविष्य बचा लिया।”
छठी कक्षा में पढ़ने वाला बेटा:
“मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। अब मैं आराम से अपनी पढ़ाई कर सकूंगा। संत रामपाल जी महाराज जी ने हमारे लिए किताबें और राशन भेजा है, मैं उनका दिल से धन्यवाद करता हूँ।”
विशेष सूचना एवं अनिवार्य नियम
संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के अंतर्गत यह आजीवन सहायता केवल उन्हीं परिवारों को दी जाती है जो पूर्ण रूप से नशा मुक्त और शाकाहारी जीवन व्यतीत करते हैं। मांस, मदिरा, गुटखा या किसी भी प्रकार के नशे का सेवन करने पर यह सहायता तुरंत प्रभाव से बंद कर दी जाती है। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य समाज को नशामुक्त, दहेजमुक्त और अपराधमुक्त बनाकर कलयुग में सतयुग लाना है।

