भटगांव (सोनीपत): शराबी पिता की बेटियों का सहारा बने ‘संत रामपाल जी महाराज’

​सोनीपत (भटगांव डूगरान): पिता की शराब ने छीना बचपन, मज़दूरी करने वाली बेटियों का सहारा बने संत रामपाल जी महाराज’

​जब घर का रक्षक ही भक्षक बन जाए और पिता का साया बच्चों के लिए सहारा बनने के बजाय एक बोझ बन जाए, तो मासूम ज़िंदगियां कैसे दम तोड़ती हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण हरियाणा के सोनीपत जिले के भटगांव डूगरान में देखने को मिला। यहाँ एक छोटे से जर्जर घर में रहने वाली दो मासूम बहनें अपने ही पिता की शराब की लत का शिकार हो रही थीं। जिस उम्र में बच्चियों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, उस उम्र में वे दिहाड़ी मज़दूरी करके अपने लिए दो वक्त की रोटी का इंतज़ाम कर रही थीं।

लेकिन कहते हैं कि जब हर तरफ अंधेरा छा जाता है, तो ईश्वर किसी न किसी रूप में रोशनी ज़रूर भेजते हैं। इन बच्चियों के लिए वह रोशनी जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के रूप में आई।

​घर और परिवार की दर्दनाक स्थिति

​भटगांव के इस घर की स्थिति देखकर किसी का भी कलेजा कांप सकता है:

  • शराबी पिता: इन बच्चियों के पिता जीवित तो हैं और शारीरिक रूप से काम करने में सक्षम भी हैं, लेकिन वे जो कुछ भी कमाते हैं, उसे शराब में उड़ा देते हैं। वे अपनी बेटियों को खाने-पीने का कोई खर्चा नहीं देते, जिसके कारण बच्चियां अनाथों जैसी ज़िंदगी जीने को मजबूर थीं।
  • मज़दूरी करती मासूम बहनें: तमन्ना और उसकी छोटी बहन को पेट की आग बुझाने के लिए बाहर जाकर दिहाड़ी मज़दूरी करनी पड़ती थी, तब जाकर घर में चूल्हा जल पाता था। पढ़ाई का सपना तो भूख की हकीकत में कहीं खो गया था।
  • खस्ताहाल घर: घर की दीवारें टूट चुकी हैं, प्लास्टर उखड़ चुका है और छत इतनी कमज़ोर है कि बारिश के दिनों में हर तरफ से पानी टपकता है। दरवाज़े टूटे हुए हैं और बिजली की फिटिंग भी लटक रही है।

​संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों का आगमन

​पड़ोसियों और सर्वे टीम के माध्यम से जब मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट (सतलोक आश्रम) के सेवादारों को इन बच्चियों की दयनीय स्थिति का पता चला, तो वे बिना समय गंवाए संत रामपाल जी महाराज जी के आदेशों पर, राशन और ज़रूरत का सामान लेकर इस टूटे हुए घर तक पहुँचे। “रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान, हर गरीब को देगा कबीर भगवान” – संत रामपाल जी महाराज के इसी संकल्प के तहत इस परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत अब संत रामपाल जी महाराज ने ने उठा ली है।

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​अन्नपूर्णा मुहिम के तहत दी गई राहत सामग्री

भटगांव (सोनीपत): शराबी पिता की बेटियों का सहारा बने ‘संत रामपाल जी महाराज’

​संत रामपाल जी महाराज जी ने बच्चियों को रसोई का पूरा सामान उपलब्ध कराया, ताकि उन्हें अब खाने के लिए मज़दूरी न करनी पड़े। दी गई सामग्री की सूची इस प्रकार है:

क्रम संख्यासामग्री का नाममात्रा / विवरण
1आटा25 किलोग्राम
2चावल5 किलोग्राम
3चीनी2 किलोग्राम
4आलू5 किलोग्राम
5प्याज5 किलोग्राम
6सूखा दूध1 किलोग्राम
7दालें1 किलो मूंग दाल, 1 किलो चना दाल
8सरसों तेल1 लीटर
9मसालेजीरा, हल्दी, लाल मिर्च
10अन्य खाद्य सामग्रीचाय पत्ती, नमक, आधा किलो आचार
11स्वच्छता किटनहाने का साबुन, कपड़े धोने का साबुन, सर्फ का पैकेट

आजीवन सहायता और विज़िटिंग कार्ड की सुविधा

​सेवादारों ने स्पष्ट किया कि यह मदद केवल एक बार के लिए नहीं है। जब तक ये बच्चियां अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो जातीं और खुद कमाने योग्य नहीं बन जातीं, तब तक संत रामपाल जी महाराज की तरफ से उन्हें हर महीने राशन दिया जाएगा।

बच्चियों को आश्रम की ओर से एक विशेष ‘विज़िटिंग कार्ड’ भी दिया गया है। जब भी घर का राशन खत्म होने वाला हो, गैस सिलेंडर भरवाना हो, दवाइयों की ज़रूरत हो या पहनने के लिए कपड़े/चप्पल चाहिए हों, उन्हें बस दो दिन पहले उस कार्ड पर लिखे नंबर पर कॉल करना होगा। टीम खुद आकर सामान घर पर छोड़ जाएगी।

​पड़ोसियों और परिजनों की भावुक प्रतिक्रिया

​इस सहायता को देखकर वहां खड़ी बच्चियों की ताई/भाभी भी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा,

इनके पापा ने कभी इनको एक रुपया नहीं दिया। ये दोनों बच्चियां बहुत दुखी थीं और मज़दूरी करके अपना पेट पाल रही थीं। हमने आज तक ऐसी कोई संस्था नहीं देखी जो बिना किसी स्वार्थ के घर आकर ऐसा राशन दे कर जाए। संत रामपाल जी महाराज ने इन अनाथ सी बच्चियों को बहुत बड़ा सहारा दिया है।”

​मुहिम के विशेष नियम

​अन्नपूर्णा मुहिम का लाभ निरंतर लेने के लिए एक सख्त नियम है— लाभार्थी परिवार को पूरी तरह से नशा मुक्त और शाकाहारी जीवन जीना होता है। चूंकि इन बच्चियों के पिता शराब पीते हैं, इसलिए यह सहायता सीधे तौर पर बच्चियों के लालन-पालन के लिए दी गई है, ताकि पिता की गलतियों की सज़ा इन मासूमों को न मिले। यह मुहिम समाज को नशा मुक्त और दहेज मुक्त बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।

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