बारडोली

सूरत, गुजरात: 4 साल से पैरालिसिस के दर्द और अकेलेपन से जूझ रहे कंचन भाई का सहारा बने संत रामपाल जी महाराज

बारडोली (सूरत): जीवन में जब बीमारी शरीर को लाचार कर दे और गरीबी घर की चारदीवारी में कैद कर ले, तब उम्मीद की किरण का दिखना नामुमकिन सा लगता है। सूरत के बारडोली विस्तार में एक किराए के मकान में अकेले रहने वाले कंचन भाई पांचाल का जीवन कुछ ऐसे ही अंधेरे में गुजर रहा था। लेकिन कहते हैं कि जब सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं, तो परमात्मा कोई न कोई रास्ता जरूर निकालता है। कंचन भाई के जीवन में वह रास्ता और सहारा बनकर आए संत रामपाल जी महाराज, जिन्होंने उनकी सूनी रसोई को राशन से और उनके जीवन को उम्मीद से भर दिया।

बीमारी का दर्द: बारडोली के कंचन भाई की संघर्षपूर्ण दास्तां

कंचन भाई पांचाल पिछले 4 वर्षों से पैरालिसिस (लकवा) की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। कोरोना काल के बाद से उनकी स्थिति और भी दयनीय हो गई। बीमारी के कारण उनका कामकाज पूरी तरह बंद हो गया और शरीर ने साथ देना छोड़ दिया। विडंबना यह है कि इस लड़ाई में कंचन भाई अपने घर में अकेले हैं; उनकी देखभाल करने वाला कोई परिवार का सदस्य उनके साथ नहीं है।

उनके घर की स्थिति हृदय विदारक थी। घर का दरवाजा टूटा हुआ था और रसोई में रखे डिब्बे पूरी तरह खाली थे। न खाने को अन्न था, न पकाने के लिए मसाले। एक लाचार इंसान, जो खुद उठकर पानी भी नहीं ला सकता, वह खाली पेट किस तरह दिन और रातें गुजार रहा था, इसकी कल्पना मात्र ही सिहरन पैदा कर देती है। पड़ोसियों की थोड़ी बहुत मदद के सहारे उनकी सांसें चल रही थीं, लेकिन एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए उनके पास कुछ नहीं बचा था।

संत रामपाल जी महाराज ने थामी जीवन की डोर

जब कंचन भाई की इस दयनीय स्थिति की जानकारी संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत अपनी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत कंचन भाई को संभालने का निर्णय लिया। संत रामपाल जी महाराज का संकल्प है— “रोटी, कपड़ा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान, हर गरीब को देगा कबीर भगवान।”

संत रामपाल जी महाराज ने कंचन भाई की जरूरत को समझते हुए न केवल उनके लिए राशन की व्यवस्था की, बल्कि उनकी टपकती छत को देखते हुए उसे ढकने का भी प्रबंध किया।

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राहत सामग्री: हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल

संत रामपाल जी महाराज द्वारा कंचन भाई को दी गई सहायता सामग्री में केवल पेट भरने का सामान नहीं, बल्कि एक गृहस्थी को चलाने का पूरा प्रबंध था। उन्होंने कंचन भाई को निम्नलिखित सामग्री प्रदान की:

क्र.सं.सामग्रीमात्रा
1आशीर्वाद आटा15 किलो
2बासमती चावल5 किलो
3आलू5 किलो
4प्याज5 किलो
5शक्कर2 किलो
6दूध1 किलो
7चाय पत्ती250 ग्राम 
8अचार250 ग्राम
9नमक1 किलो 
10तेल1 लीटर 
11नहाने का साबुन4 पीस  
12धोने का साबुन (कपड़ा धोने का)1 किलो 
13हल्दी150 ग्राम 
14मिर्च 150 ग्राम 
15जीरा150 ग्राम

साथ ही, घर में पानी टपकने के कारण कंचन जी ने तिरपाल की माँग की थी, जो उन तक पहुचाई गई।

जब छलक पड़े कंचन भाई के आंसू

संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई यह सहायता देखकर कंचन भाई अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए। उनका गला भर आया और आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने भावुक होकर कहा-

“दुखी लोगों की मदद करना बहुत बड़ी बात है। संत रामपाल जी महाराज बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।”

सिर्फ आज नहीं, जीवन भर का साथ

इस सहायता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल एक बार की मदद नहीं है। संत रामपाल जी महाराज ने कंचन भाई को आश्वस्त किया है कि जब तक उनका जीवन है, उन्हें भूखा नहीं सोने दिया जाएगा। हर महीने, राशन खत्म होने से पहले संत रामपाल जी महाराज द्वारा उनके घर राशन पहुँचाया जाएगा।

मानवता की सच्ची सेवा

कंचन भाई पांचाल की कहानी यह साबित करती है कि संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम केवल एक योजना नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक वरदान है। यह मुहिम उन लोगों तक पहुंच रही है, जिनके पास न तन ढकने को कपड़ा है, न खाने को अन्न और न ही सिर पर पक्की छत। संत रामपाल जी महाराज बिना किसी भेदभाव के समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति के आंसू पोंछने का कार्य कर रहे हैं।

विशेष सूचना: नशामुक्त जीवन अनिवार्य

संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही यह ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ पूर्णतः निःशुल्क है। हालांकि, यह सहायता प्राप्त करने के लिए एक अनिवार्य शर्त है लाभार्थी का जीवन पूर्णतः नशामुक्त होना चाहिए। यह सहायता केवल उन्हें दी जाती है जो मांस, मदिरा या किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करते। यदि कोई लाभार्थी नशा करता पाया जाता है, तो सहायता तत्काल प्रभाव से बंद कर दी जाती है।

संपर्क सूत्र (गुजरात): 9725088322, 7203000125

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