सुल्तानपुरी में बेसहारा परिवार के मसीहा बने संत रामपाल जी

इंसानियत की मिसाल: सुल्तानपुरी में बेसहारा कविता और उनके चार बच्चों के मसीहा बने संत रामपाल जी महाराज

दिल्ली (सुल्तानपुरी): आज के इस दौर में जहाँ इंसान अपने स्वार्थ तक सीमित है, वहीं संत रामपाल जी महाराज अपनी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक खुशियाँ पहुँचा रहे हैं। दिल्ली के सुल्तानपुरी, सी-ब्लॉक से एक ऐसी ही मार्मिक कहानी सामने आई है, जहाँ घोर दरिद्रता के बीच जी रहे एक परिवार का हाथ थामकर संत जी ने साबित कर दिया कि मानवता आज भी जीवित है।

संघर्षों से घिरा परिवार और बेबसी की कहानी

सुल्तानपुरी की गलियों में एक ऐसा घर है जहाँ खुशियों ने वर्षों पहले दस्तक देना छोड़ दिया था। यह घर कविता जी का है, जो अपने चार बच्चों के साथ अत्यंत दयनीय स्थिति में जीवन व्यतीत कर रही हैं। परिवार का विवरण: 

सुल्तानपुरी में बेसहारा परिवार के मसीहा बने संत रामपाल जी
  • श्रीमती कविता (मुखिया): परिवार की एकमात्र कमाऊ सदस्य। वह घरेलू सहायिका के रूप में कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करती हैं।
  • तमन्ना (14 वर्ष): बड़ी पुत्री।
  • सिद्धि (13 वर्ष): द्वितीय पुत्री।
  • लक्ष्मी (12 वर्ष): तृतीय पुत्री।
  • मान (7 वर्ष): पुत्र।

इस घर में न तो कोई कमाने वाला पुरुष है और न ही सिर छुपाने के लिए पक्की छत की सही व्यवस्था। कविता जी ने भावुक होकर बताया कि कई बार स्थिति इतनी विकट हो जाती है कि बच्चों को एक समय का भोजन भी नसीब नहीं होता। घर में न सोने के लिए बिस्तर थे और न ही बच्चों के पास स्कूल जाने के लिए किताबें।

संत रामपाल जी महाराज ने सुनी ‘पुकार’

जब संत रामपाल जी महाराज को अपनी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के सर्वेक्षण के दौरान इस परिवार की बेहाली का पता चला, तो उन्होंने तुरंत सहायता भेजने के आदेश दिए। संत जी का स्पष्ट आदेश है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए। इसी के तहत मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से संत रामपाल जी ने कविता जी के घर राहत सामग्री का अंबार लगा दिया गया।

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परिवार को प्रदान की गई सामग्री की सूची:

क्र.सं.सामग्री का नाममात्रा
1आटा25 किलो
2चावल5 किलो
3चीनी4 किलो
4अचार1 किलो
5पीली मूंग दाल½ किलो
6हरी मूंग दाल½ किलो
7काले चने½ किलो
8चना दाल½ किलो
9कपड़े धोने का साबुन1 किलो
10आलू5 किलो
11प्याज5 किलो
12हल्दी150 ग्राम
13जीरा150 ग्राम
14लाल मिर्च100 ग्राम
15टाटा नमक1 किलो
16टाटा चाय250 ग्राम
17नहाने का साबुन4 पीस
18सूखा दूध (Milk Powder)1 किलो
19कपड़े धोने का सर्फ½ किलो
20सरसों तेल2 लीटर
21गैस सिलिन्डर1 नग
22सोने के लिए गद्देदो नग
23स्कूल किटस्कूल बैग, जूते, पुस्तकें।

ग्रामीणों और पड़ोसियों के विचार: “साक्षात भगवान का कार्य”

रिश्तेदारों का कहना है कि उन्होंने पहली बार किसी ऐसे संत को देखा है, जो बिना किसी चंदे या स्वार्थ के स्वयं घर-घर जाकर गरीबों की सहायता कर रहे हैं। कविता जी की भाभी सिमरन जी ने कहा,

सुल्तानपुरी में बेसहारा परिवार के मसीहा बने संत रामपाल जी

“हमने सुना था कि साधु-संत केवल चंदा लेते हैं, लेकिन संत रामपाल जी महाराज ऐसे पहले संत हैं जो निस्वार्थ भाव से दे रहे हैं। कविता के बच्चों के लिए वे साक्षात भगवान बनकर आए हैं। हम उनके अत्यंत शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने मेरी ननद और उनके बच्चों की इतनी मदद की।”

एक रिश्तेदार ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा:

“यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। हमने पहले कभी ऐसा नहीं सुना था कि कोई साधु-संत स्वयं घर आकर लोगों की मदद करेंगे। संत रामपाल जी महाराज जी अपने सेवादारों के माध्यम से हर घर तक पहुँच रहे हैं और प्रत्येक परिवार को यह आश्वस्त कर रहे हैं कि ‘आपकी जो भी परेशानी है हमें बताएँ, हम उसे दूर करेंगे।’

“सच में बहुत अच्छा लग रहा है। इनकी मदद करने के लिए न तो कोई रिश्तेदार इतना सक्षम है और न ही सरकार की तरफ से कोई सहायता मिली है। ये बिल्कुल अकेली हैं। वाकई, जिसका कोई नहीं होता, उसका ऊपर वाला (ईश्वर) होता है। मेरे लिए तो संत रामपाल जी ही भगवान हैं। हम भी इस मुहिम के बारे में अन्य लोगों को बताएंगे, ताकि सभी जरूरतमंद परिवारों को महाराज जी का साथ मिल सके।”

कविता जी ने नम आँखों से कहा,

“मैंने कभी नहीं सोचा था कि कोई महात्मा हमारे घर आकर राशन और बिस्तर देगा। मैं संत रामपाल जी महाराज का यह परोपकार कभी नहीं भूलूँगी।”

आजीवन सहायता का संकल्प

संत रामपाल जी महाराज की यह सेवा केवल एक बार के लिए नहीं है। संत जी ने परिवार को एक ‘संपर्क कार्ड’ प्रदान करवाया है। उन्होंने वचन दिया है कि जब तक बच्चे आत्मनिर्भर नहीं हो जाते, तब तक उनके राशन, कपड़े, गैस और शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी संत रामपाल जी महाराज स्वयं उठाएंगे। राशन खत्म होने से दो दिन पहले फोन करने पर सामग्री पुनः घर पहुँचा दी जाएगी।

परमेश्वर की अपरम्पार सामर्थ्य: जन-सेवा और ‘केशव बंजारा’ की दिव्य पुनरावृत्ति

जिस प्रकार 600 साल पहले काशी में कुछ परिस्थितियों के बीच कबीर साहेब ने ‘केशव बंजारा’ का रूप धारण कर तीन दिनों तक 18 लाख लोगों को न केवल भोजन कराया, बल्कि प्रत्येक को बहुमूल्य ‘दोहर’ (कीमती कंबल) और ‘मोहर’ (स्वर्ण मुद्रा) दान कर अपनी ईश्वरीय शक्ति सिद्ध की थी, ठीक उसी तर्ज पर आज संत महाराज जी की करुणा बरस रही है।

भले ही वे भौतिक रूप से हमसे दूर प्रतीत होते हों, किंतु वे सूक्ष्म रूप में हर गरीब और असहाय की पुकार सुन रहे हैं और अपने सेवादारों के माध्यम से राशन, वस्त्र और बच्चों की शिक्षा (कॉपी, किताब, बैग, जूते) जैसी हर आवश्यक सामग्री उन तक पहुँचा रहे हैं; यह सिद्ध करता है कि जिसका कोई नहीं होता, उसका साथ देने स्वयं परमात्मा संतों के रूप में धरा पर उतरता है।

कलयुग में सतयुग का अहसास

संत रामपाल जी महाराज का नारा है:

 “रोटी, कपड़ा, शिक्षा और मकान।

 हर जरूरतमंद को देगा कबीर भगवान।।”

वे न केवल पेट की भूख मिटा रहे हैं, बल्कि बच्चों को शिक्षित कर उनके भविष्य को भी संवार रहे हैं। उनकी यह ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ आज उन लाखों लोगों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है जिन्हें समाज और सरकार ने भुला दिया था।

विशेष सूचना:

संत रामपाल जी महाराज की ओर से यह सहायता पूर्णतः निशुल्क है। इस सेवा का लाभ लेने के लिए लाभार्थी का नशा मुक्त और शाकाहारी होना अनिवार्य है। यदि कोई सहायता प्राप्त करने के बाद नशा या मांस का सेवन करता है, तो सहायता तुरंत बंद कर दी जाएगी।

यदि आपके आसपास कोई ऐसा परिवार है जिसे सहायता की आवश्यकता है, तो ‘मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट’ के दिल्ली हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें: 9992600811, 9268475242, 9992600813, 9821700236

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