करीमगंज, असम: मानव जीवन में कठिनाइयाँ कभी बताकर नहीं आतीं, लेकिन जब विपत्ति का पहाड़ टूटता है, तो उम्मीद की एकमात्र किरण केवल परमात्मा की दया ही होती है। असम के करीमगंज जिले के बनमाली गाँव में एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहाँ एक 84 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी बेटी घोर आर्थिक संकट और भुखमरी के साये में जी रहे थे। समाज और प्रशासन से निराश होने के बाद, इस परिवार ने महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक गुरु संत रामपाल जी महाराज की शरण ली।
संत रामपाल जी महाराज ने न केवल उनकी पुकार सुनी, बल्कि उनके घर को खुशियों और सुरक्षा से भर दिया। यह घटना साबित करती है कि संत रामपाल जी महाराज आज के युग में गरीबों और असहायों के लिए साक्षात् मसीहा बनकर उभरे हैं।
करीमगंज के 84 वर्षीय पिता और बेटी की दर्दनाक दास्तां
बनमाली गाँव की निवासी मनीदीपा और उनके 84 वर्षीय पिता एक अत्यंत जर्जर स्थिति में जीवन यापन कर रहे थे। परिवार में केवल दो ही सदस्य हैं। मनीदीपा के पिता पहले एक कपड़े की दुकान में काम करते थे, जहाँ उन्हें मात्र 3000 रुपये मासिक वेतन मिलता था। लेकिन वृद्धावस्था और 84 वर्ष की आयु होने के कारण वे अब काम करने में असमर्थ हो गए। दुकान से काम छूट जाने के बाद घर में आय का कोई स्रोत नहीं बचा। मनीदीपा भी बेरोजगार थीं और घर चलाना असंभव हो गया था।
स्थिति इतनी दयनीय थी कि उनके पास दो वक्त की रोटी का प्रबंध करने के भी साधन नहीं थे। मनीदीपा ने बताया कि इससे पहले उन्हें किसी से कोई विशेष सहायता नहीं मिली थी, मात्र 10-20 रुपये की मदद के अलावा किसी ने उनका हाथ नहीं थामा था।
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संत रामपाल जी महाराज तक कैसे पहुँची पुकार
निराशा के इस अंधकार में मनीदीपा को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रकाश की किरण दिखाई दी। उन्होंने एक वीडियो देखा जिसमें बताया गया था कि संत रामपाल जी महाराज “अन्नपूर्णा मुहिम” के तहत गरीबों को रोटी, कपड़ा और मकान मुहैया कराते हैं। वीडियो में दिए गए संपर्क सूत्र पर मनीदीपा ने फोन किया और अपनी व्यथा सुनाई। उनका विश्वास और उम्मीद खाली नहीं गई।
संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत उनकी सुध ली और अपने अनुयायियों को सहायता सामग्री के साथ उनके द्वार पर भेजा। मनीदीपा कहती हैं, “मैंने सुना था कि भगवान होते हैं, लेकिन विश्वास नहीं था। आज संत रामपाल जी महाराज की दया देखकर मुझे विश्वास हो गया है कि सच में भगवान धरती पर मौजूद हैं।”
संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई सहायता सामग्री
संत रामपाल जी महाराज के आदेश से सेवादारों ने तत्काल प्रभाव से परिवार को राशन की एक बड़ी खेप उपलब्ध कराई। यह सहायता केवल नाममात्र की नहीं थी, बल्कि इसमें एक परिवार की सभी दैनिक आवश्यकताओं का बारीकी से ध्यान रखा गया था। प्रदान की गई सामग्री की सूची निम्नलिखित है:

| क्र. सं. | सामग्री का नाम | मात्रा/विवरण |
| 1 | बासमती चावल | 15 किलो |
| 2 | आलू | 5 किलो |
| 3 | प्याज | 5 किलो |
| 4 | आटा | 5 किलो |
| 5 | दाल (दो प्रकार की) | 1 किलो |
| 6 | चीनी | 2 किलो |
| 7 | दूध | 1 किलो |
| 8 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 9 | नमक | आधा किलो |
| 10 | चाय पत्ती | आवश्यकतानुसार |
| 11 | मसाले (हल्दी, मिर्च, आदि) | आवश्यकतानुसार |
| 12 | आचार | 1 पैक |
| 13 | डिटर्जेंट (Tide Surf) | आधा किलो |
| 14 | नहाने का साबुन | 1 किलो |
| 15 | कपड़े धोने का साबुन | 1 किलो |
गैस सिलेंडर और चूल्हे की तत्काल व्यवस्था: एक अद्वितीय पहल
राशन प्राप्त करने के बाद मनीदीपा ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष एक और प्रार्थना रखी। उन्होंने बताया कि वे केरोसिन स्टोव पर खाना पकाती हैं। केरोसिन की कीमत 110 रुपये प्रति लीटर है और वह भी अक्सर उपलब्ध नहीं होता। कई बार ईंधन न होने के कारण राशन होने के बावजूद उन्हें भूखे पेट सोना पड़ता था।
संत रामपाल जी महाराज तक जैसे ही यह बात पहुँची, उन्होंने तुरंत आदेश दिया कि बेटी को भूखा नहीं सोने दिया जाएगा। अगले ही दिन, संत रामपाल जी महाराज की कृपा से परिवार को एक भरा हुआ नया गैस सिलेंडर और एक नया गैस चूल्हा उपलब्ध करा दिया गया। इस त्वरित सहायता को पाकर मनीदीपा की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उन्होंने कहा, “मैं बहुत तनाव में थी, दो दिन से राशन नहीं मिल रहा था और खाना बनाना मुश्किल था। संत रामपाल जी भगवान ने तुरंत मेरी समस्या का समाधान कर दिया।”
आजीवन सहायता का संकल्प और दर्शन
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी जाने वाली यह सहायता केवल एक बार की घटना नहीं है। सेवादारों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज का संकल्प है कि जब तक इस परिवार के पास आय का कोई अन्य साधन नहीं हो जाता, तब तक उन्हें आजीवन यह सहायता मिलती रहेगी। परिवार को एक कार्ड दिया गया है, जिस पर हेल्पलाइन नंबर दर्ज है। राशन खत्म होने से दो दिन पहले फोन करने पर संत रामपाल जी महाराज के सेवादार उनके घर आकर सामग्री पहुँचा देंगे।
इस महान कार्य के पीछे संत रामपाल जी महाराज का दर्शन अत्यंत गहरा और मानवीय है। एक बार अखबार में एक खबर पढ़कर, जिसमें एक गरीब परिवार ने भूख से तंग आकर सामूहिक आत्महत्या कर ली थी, संत रामपाल जी महाराज का हृदय द्रवित हो उठा था। तभी उन्होंने प्रण लिया कि “हम एक रोटी कम खा लेंगे, लेकिन किसी गरीब को भूखा नहीं सोने देंगे।” इसी उद्देश्य से आज गाँव-गाँव जाकर जरूरतमंदों को ढूँढा जा रहा है और उन्हें न केवल राशन, बल्कि शिक्षा, चिकित्सा और मकान जैसी सुविधाएँ भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की जा रही हैं।
नियम और मर्यादा
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी जाने वाली सहायता के साथ एक पवित्र उद्देश्य भी जुड़ा है– समाज को बुराई मुक्त बनाना। यह सहायता केवल उन परिवारों को दी जाती है जो नशा मुक्त हैं और मांस-मदिरा का सेवन नहीं करते। यह पहल न केवल पेट भर रही है, बल्कि समाज में सात्विकता और नैतिकता का भी संचार कर रही है। यदि कोई लाभार्थी इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो सहायता रोक दी जाती है, जो समाज सुधार की दिशा में एक ठोस कदम है।
संत रामपाल जी महाराज – मानवता के सच्चे रक्षक

करीमगंज के इस छोटे से गाँव में जो चमत्कार हुआ, वह आधुनिक युग में विरले ही देखने को मिलता है। जहाँ सरकारें और बड़ी संस्थाएँ भी कई बार अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने में विफल रहती हैं, वहाँ संत रामपाल जी महाराज की करुणा ने एक असहाय परिवार को नया जीवन दिया है। 84 साल के बुजुर्ग पिता और उनकी बेटी के लिए संत रामपाल जी महाराज साक्षात् भगवान बनकर आए हैं।
यह मुहिम केवल अन्नदान नहीं, बल्कि जीवनदान है। संत रामपाल जी महाराज की यह दयालुता, दूरदर्शिता और त्वरित सहायता यह सिद्ध करती है कि वे ही वास्तविक रूप से मानवता के उद्धारक और विश्व के पालनहार हैं। असम की धरती आज संत रामपाल जी महाराज के इस उपकार के लिए नतमस्तक है और उनका आभार प्रकट करती है।
