लातेहार (झारखंड): देश के कोने-कोने में आज भी करोड़ों परिवार रोटी, कपड़ा और मकान जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। भूखे पेट सोते बच्चे, असहाय माताएं जो अपने बच्चों को सिर्फ पानी पिलाकर चुप कराती हैं, बेसहारा लोग जो कूड़े के ढेर से अपना पेट भरने को मजबूर हैं—यह कड़वी सच्चाई है जिससे समाज अक्सर मुंह मोड़ लेता है। जिनके तन पर कपड़े नहीं, सिर पर छत नहीं, उनके लिए जीना एक अभिशाप बन जाता है।
इसी पीड़ा को समझते हुए संत रामपाल जी महाराज ने एक अभूतपूर्व राहत मुहिम शुरू की है जिसका नाम है ‘अन्नपूर्णा मुहिम’। इस अभियान के तहत जरूरतमंद परिवारों को राशन, गैस सिलेंडर, वस्त्र और पुस्तकें बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। आज संत रामपाल जी महाराज हजारों लाचार और बेबस लोगों की उम्मीद की किरण बन चुके हैं।
स्कॉर्पियो की टक्कर ने तोड़ दिया मजदूर परिवार की कमर
झारखंड के लातेहार जिले में रहने वाले सुरेश दास और उनके परिवार पर विपत्ति का पहाड़ तब टूटा जब एक भीषण सड़क हादसे में परिवार के तीन सदस्यों के पैर टूट गए। रोजमर्रा की मजदूरी से किसी तरह घर चलाने वाले इस परिवार के लिए यह दुर्घटना किसी आसमानी मुसीबत से कम नहीं थी।
घटना का ब्योरा देते हुए सुरेश दास ने बताया, “हम अपने काम से लौट रहे थे। मोड़ पर हाथ का इशारा देकर मुड़ रहे थे कि अचानक सामने से तेज रफ्तार स्कॉर्पियो आई और हमें जोरदार टक्कर मार दी।” इस दुर्घटना में सुरेश दास, उनकी पत्नी सुमित्रा देवी और उनके 10-12 वर्षीय बेटे के पैर बुरी तरह टूट गए। परिवार के ये दोनों ही कमाने वाले सदस्य थे।
सुरेश दास के एक बेटा और चार बेटियां हैं। दो बेटियों का पालन-पोषण उनकी बहन के घर हो रहा है, जबकि एक बेटी उनके साथ रहती है। दुर्घटना के बाद परिवार की आय का साधन पूरी तरह बंद हो गया और घर चलाना मुश्किल हो गया।
अंधेरे में डूबा घर, भूसे पर गुजरती थी जिंदगी
सुरेश दास के घर की हालत उनकी मुश्किलों की गवाह है। घर की दीवारों पर प्लास्टर नहीं है। बिजली की कोई व्यवस्था नहीं होने से दिन-रात घने अंधेरे में जीवन गुजरता है। छत पर जगह-जगह तिरपाल और खपरैल लगी हैं। बारिश के मौसम में दीवारों से पानी का रिसाव (सीपेज) होता रहता है।
सबसे ज्यादा दर्दनाक है परिवार के रहने की व्यवस्था। कंक्रीट से बने इस घर की पूरी ढलाई तो हो चुकी है, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते न खिड़कियां लगी हैं और न दरवाजे। पुराने दरवाजे इतने जर्जर हो चुके हैं कि उन्हें ठीक करवाना भी परिवार के बूते से बाहर है।
परिवार के पास सोने के लिए चारपाई खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। सुरेश दास और उनका पूरा परिवार सीमेंट के खंभों या पिलर पर लकड़ी रखकर, उस पर धान का भूसा/पवाल (धान का पुआल) बिछाकर, उसके ऊपर चटाई और कंबल डालकर एक अस्थायी बिस्तर बनाकर सोने को मजबूर है। यह दयनीय स्थिति उनकी आर्थिक स्थिति का जीता-जागता सबूत है।
पड़ोसियों या स्थानीय मुखिया/सरपंच की ओर से भी अभी तक कोई खास राहत या सहयोग नहीं मिला था। सरकार की ओर से बस थोड़ा-बहुत राशन मिल जाता था।
संत की दया से पहुंची 15 दिन की राहत सामग्री
जैसे ही संत रामपाल जी महाराज को इस दयनीय परिवार के हालात का पता चला, उन्होंने फौरन अपने शिष्यों की एक टीम वहां भेज दी। संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट उद्देश्य असहाय, गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राशन सामग्री मुहैया कराना है।
शिष्य प्रवीण दास ने बताया, “हम अपने गुरुजी की कृपा से इन लाचार और बेबस लोगों की सेवा के लिए राहत सामग्री लेकर आए हैं। यह सामग्री लगभग 15 दिनों के कोटे के लिए है और जरूरत महसूस होने पर परिवार के संपर्क करने पर आगे भी मुहैया कराई जाएगी। यह सहायता तब तक जारी रहेगी, जब तक परिवार के सदस्य पूरी तरह से स्वस्थ होकर खुद कमाने में सक्षम नहीं हो जाते।”
राहत सामग्री की विस्तृत सूची
प्रदान की गई सामग्री की मात्रा और गुणवत्ता दोनों ही बेहतरीन है:
| क्रम (No.) | सामग्री (Item) | मात्रा (Quantity) |
| 1 | आटे की थैली (गेहूँ का आटा) | 10 किलोग्राम |
| 2 | चावल | 10 किलोग्राम |
| 3 | चने की दाल | 1 किलोग्राम |
| 4 | मूंग की दाल | 1 किलोग्राम |
| 5 | फॉर्च्यून शुद्ध सरसों का तेल | 1 किलोग्राम |
| 6 | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 7 | टाटा नमक | 1 किलोग्राम |
| 8 | हल्दी | 100 ग्राम |
| 9 | साबुत जीरा | 100 ग्राम |
| 10 | मिर्च का पैकेट (लाल मिर्च) | 100 ग्राम (अनुमानित) |
| 11 | ताजा चाय (चायपत्ती) | 250 ग्राम |
| 12 | अमूल स्प्रे दूध पाउडर (सूखा दूध) | 1/2 किलोग्राम |
| 13 | कपड़े धोने का सर्फ पैकेट | 1 किलोग्राम (लगभग) |
| 14 | कपड़े धोने की टिकिया (साबुन) | 4 पीस |
| 15 | नहाने का साबुन | 5 पीस |
| 16 | अचार की डिब्बी (मिक्स अचार) | 1 किलोग्राम |
| 17 | आलू | 5 किलोग्राम |
| 18 | प्याज | 5 किलोग्राम |
“रोटी, कपड़ा और मकान, सबको देगा कबीर भगवान”
प्रवीण दास ने अन्नपूर्णा मुहिम के पीछे संत रामपाल जी महाराज के व्यापक उद्देश्य को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि गुरुजी कबीरपंथी विचारधारा से चलते हैं और उनका मूल मंत्र है,
“रोटी, कपड़ा और मकान। सबको देगा कबीर भगवान”।
संत रामपाल जी महाराज चाहते हैं कि कोई भी गरीब भूखा न रहे और बिना छत के न रहे। उन्होंने अपनी आध्यात्मिक शक्ति और आदेश से पूरे देश में सैकड़ों मकानों का निर्माण भी करवाया है। संत जी का मानना है कि ऐसे सभी लोग परमात्मा के बच्चे हैं, और उनकी सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है।
सेवकों ने सरकारी योजनाओं से तुलना करते हुए कहा कि सरकार की मुहिमों को जमीन पर उतारने में इतनी सारी परेशानियां होती हैं कि लोग लाभ नहीं उठा पाते, जबकि संत रामपाल जी महाराज के एक आदेश पर शिष्य तुरंत और प्रभावी ढंग से सेवा में लग जाते हैं।
नशा और मांस छोड़ना जरूरी शर्त
यह राहत सामग्री प्राप्त करने के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा एक सख्त मानदंड तय किया गया है। यह लाभ केवल उन्हीं जरूरतमंदों को दिया जाता है जो किसी भी प्रकार के नशे (जैसे शराब, तंबाकू, इत्यादि) या मांस का सेवन नहीं करते हों। यदि कोई व्यक्ति यह राहत सामग्री प्राप्त करके भी नशा नहीं छोड़ रहा हो, तो उसकी सामग्री बंद कर दी जाएगी। यह शर्त सेवा के साथ-साथ समाज को व्यसनमुक्त करने के संत के आध्यात्मिक मिशन का भी हिस्सा है।
सुरेश दास ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे संत रामपाल जी महाराज की ओर से कोई अभिभावक उनके लिए खड़ा हुआ है, जिससे उन्हें कुछ भरोसा मिला है।
“ऐसा देने वाला कोई अभी तक नहीं हुआ था”
इस मानवीय कार्य को देखने के लिए कई स्थानीय ग्रामवासी भी मौजूद थे। ग्राम के ही व्यक्ति ने राहत सामग्री की आवश्यकता की पुष्टि करते हुए कहा कि सुरेश जी के परिवार को खाने की और घर-परिवार के प्रयोग में आने वाले सोडा, साबुन जैसे हर सामान की बहुत जरूरत थी। उन्होंने इस मिशन को बहुत अच्छा बताया और इच्छा जाहिर की कि यह हर गरीब तक पहुंचना चाहिए।
एक अन्य वृद्ध गवाह ने इस कार्य की तारीफ करते हुए कहा, “ऐसा देने वाला कोई अभी तक नहीं हुआ था”। उन्होंने सरकारी सहायता में लगने वाले लंबे समय और अनिश्चितता के विपरीत, संत रामपाल जी महाराज की सेवा की गति की सराहना की, जो एक-दो सप्ताह के भीतर सारा इंतजाम कर देते हैं।
इस अपार दया को देखते हुए, उन्होंने यहां तक कहा,
“हम सोचते हैं कि जब गरीब पर इतनी दया कर रहे हैं तो वास्तव में परमात्मा जरूर होंगे”।
उन्होंने लोगों से प्रार्थना की कि इस दौर में ऐसे संत मिलना मुश्किल है, इसलिए सब कोई आकर इनसे मिलें और लाभ लें।
संत रामपाल जी महाराज से चल रही सामाजिक क्रांति
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ न केवल एक राहत अभियान है, बल्कि एक सामाजिक और आध्यात्मिक क्रांति है। यह अभियान हरियाणा से 1300 किलोमीटर दूर झारखंड के लातेहार जैसे सुदूर इलाकों में भी जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और सम्मान की जिंदगी दे रही है।
इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह तब तक जारी रहेगी जब तक लाभार्थी परिवार पुनः आत्मनिर्भर नहीं हो जाता। यह दीर्घकालिक प्रतिबद्धता इस मुहिम को अन्य राहत कार्यों से अलग और विशिष्ट बनाती है। संत रामपाल जी महाराज की यह पहल न सिर्फ शारीरिक भूख मिटा रही है, बल्कि लोगों को जीने का नया हौसला और आत्मविश्वास भी दे रही है।

