करौथा गाँव, हरियाणा – भारत जैसे विशाल और संसाधनों से भरपूर देश में जब कोई परिवार दो वक्त की रोटी के लिए तरसता है, तो यह न केवल नीति-निर्माताओं के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चिंतन का विषय बन जाता है। सरकारी योजनाएं भले कागजों पर शानदार दिखें, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि आज भी लाखों लोग भूखे पेट सोते हैं।
ऐसे हालात में जब सब दरवाज़े बंद हो जाते हैं, तब संतों की करुणा लोगों की जीवनरेखा बनती है। संत रामपाल जी महाराज के दिव्य मार्गदर्शन में चल रही “अन्नपूर्णा मुहिम” ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सच्चा धर्म सेवा और समानता में निहित होता है।
भूख से लड़ते एक परिवार की हकीकत
हरियाणा के करौथा गाँव का एक ऐसा ही परिवार इस मुहिम के तहत मदद पाने वाला हालिया उदाहरण है। इस परिवार में कुल छह सदस्य हैं — एक छोटी बेटी, एक मानसिक रूप से अस्वस्थ बहन, एक छोटा भाई, एक बुजुर्ग ताऊ, एक बहन और एक अन्य परिजन। यह परिवार वर्षों से घोर गरीबी, बीमारी और उपेक्षा का सामना कर रहा था।
प्रमुख समस्याएं जो परिवार झेल रहा था:
- मनरेगा में काम करने के बावजूद पिछले 5 महीनों से भुगतान नहीं मिला था।
- बिजली कनेक्शन कट चुका था क्योंकि सिक्योरिटी राशि भरने के लिए पैसे नहीं थे।
- गैस सिलेंडर नहीं था, लकड़ी जलाकर किसी तरह खाना बनता था।
- आटा, चावल, दाल जैसी बुनियादी खाद्य सामग्री भी महीनों से घर में नहीं थी।
- परिवार की मानसिक रूप से कमजोर बच्ची इलाज और देखभाल के अभाव में धीरे-धीरे और बिगड़ती जा रही थी।
- टपकती छत, अंधेरा घर, फटे पुराने कपड़े, और बर्तन तक न के बराबर – ये उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुके थे।
- पड़ोसियों ने बताया कि कई बार पूरा परिवार बिना खाना खाए ही सो जाता था, और बच्ची की हालत देखकर हर कोई द्रवित हो जाता था।
अन्नपूर्णा मुहिम के तहत राहत की रोशनी
जब यह पीड़ादायक स्थिति संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों को ज्ञात हुई, तो बिना समय गंवाए वे करौथा गाँव पहुँचे और परिवार की विस्तृत स्थिति का मूल्यांकन किया। उसी दिन अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत राहत सामग्री उपलब्ध करवाई गई।
अन्नपूर्णा मुहिम राशन सामग्री सूची – करौथा गाँव (बड़ा परिवार – 6 सदस्य)
| क्रम | सामग्री | मात्रा |
| 1 | गेहूं का आटा | 15 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | मूंग दाल | ½ किलो |
| 4 | चना दाल | ½ किलो |
| 5 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 6 | चीनी | 2 किलो |
| 7 | टाटा नमक | 1 किलो |
| 8 | हल्दी | 150 ग्राम |
| 9 | जीरा | 150 ग्राम |
| 10 | लाल मिर्च | 100 ग्राम |
| 11 | टाटा चायपत्ती | 250 ग्राम |
| 12 | नहाने का साबुन | 4 पीस |
| 13 | कपड़े धोने का साबुन | 1 किलो |
| 14 | मिक्स अचार | 1 किलो |
| 15 | सूखा दूध | ½ किलो |
| 16 | गैस सिलेंडर | 1 भरा हुआ सिलेंडर |
| 17 | गैस कनेक्शन | नया चूल्हा और रेगुलेटर |
बच्ची के लिए विशेष पहल:
बच्ची की मानसिक स्थिति को देखकर शिष्यों ने न केवल भोजन, बल्कि चिकित्सा सहायता और पुनर्वास की पहल भी शुरू की है। उनका उद्देश्य केवल एक बार मदद करना नहीं, बल्कि जब तक परिवार स्वावलंबी नहीं हो जाता, तब तक सहायता बनाए रखना है।
Also Read: अन्नपूर्णा मुहिम के तहत डीघल गाँव में संत रामपाल जी महाराज ने पहुँचाया राशन, दिया मानवता का संदेश
परिवार की प्रतिक्रिया: भूख से राहत और दिल से आभार
जब परिवार को राहत सामग्री सौंपी गई, तो उनकी आँखों में आँसू और चेहरे पर सच्चा आभार था।
परिवार की महिला सदस्य ने भावुक होकर कहा:
“हमें लगा था अब कोई उम्मीद नहीं बची, लेकिन आज पहली बार किसी ने बिना पूछे हमारी मदद की। हमारी बच्ची अब भूखी नहीं सोएगी। संत रामपाल जी महाराज को हम दिल से धन्यवाद देते हैं।”
बुजुर्ग ताऊ ने कहा:
“हमारी ज़िन्दगी अब तक सिर्फ संघर्ष थी, अब ऐसा लगता है कि कोई भगवान हमारी चिंता कर रहे हैं। पहली बार अंधेरे में उजाला दिखा है।”
मानवता का जीवंत रूप: अन्नपूर्णा मुहिम
अन्नपूर्णा मुहिम केवल भोजन वितरण की प्रक्रिया नहीं है, यह एक सामाजिक जागरण का प्रतीक है। इसका उद्देश्य है कि ज़रूरतमंद व्यक्ति सिर्फ रोटी ही नहीं पाए, बल्कि सम्मान, आत्मनिर्भरता और स्वास्थ्य भी प्राप्त कर सके।
इस मुहिम के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज का सच्चा सामाजिक और आध्यात्मिक दर्शन प्रकट होता है — सेवा, समानता और करुणा।
सभी सहायता निःशुल्क, बिना किसी जाति, धर्म या संप्रदाय के भेदभाव के दी जाती है।
सामाजिक पुनर्निर्माण की दिशा में अन्य कार्य
“अन्नपूर्णा मुहिम” के अतिरिक्त संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में निम्नलिखित समाज सुधारक कार्य भी निरंतर चल रहे हैं:
- नशा मुक्ति अभियान
- दहेज रहित विवाह (रमैणि पद्धति)
- निःशुल्क रक्तदान शिविर
- नारी सशक्तिकरण कार्यक्रम
- बेसहारा बच्चों की शिक्षा सहायता
- वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण
- गौ सेवा एवं आश्रय केंद्रों की स्थापना
जब संत बनें सहारा
करौथा गाँव का यह लाचार परिवार अब भूखा नहीं है। अब उनके चूल्हे में आग जल रही है, गैस से खाना पक रहा है, बच्ची भूखी नहीं सो रही, और घर में सिर्फ अंधेरा नहीं – उम्मीद की रोशनी है। यह केवल एक सेवा नहीं, एक पुनर्जन्म है।
संत रामपाल जी महाराज ने सिद्ध कर दिया है कि
“रोटी, कपड़ा और मकान – हर गरीब को दे रहा कबीर भगवान।“
हम मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट और संत रामपाल जी महाराज को इस सेवा भावना के लिए ह्रदय से धन्यवाद देते हैं।


Pingback: उड़ीसा के बरगढ़ में संत रामपाल जी महाराज की 'अन्नपूर्णा मुहिम' बनी कुश परिवार का सहारा