बलौदा बाजार: मानवता की सेवा और परोपकार का उदाहरण पेश करते हुए, संत रामपाल जी महाराज ने छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के भाटापारा गांव में एक अत्यंत निर्धन परिवार के जीवन में उजाला किया है। यहाँ के पटपर चौक इलाके में रहने वाली बुजुर्ग माता जानकी यादव और उनकी शारीरिक रूप से अक्षम बेटी मिलापा यादव बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रही थीं। उनका घर मिट्टी का बना हुआ है, जिसकी दीवारों में सीलन है और छत इतनी जर्जर है कि बारिश का पानी सीधे घर के अंदर टपकता है। दरवाजे के नाम पर लकड़ी के फ्रेम में तेल का टिन काटकर लगाया गया था। ऐसे समय में जब इस परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं था, तब संत रामपाल जी महाराज ने उनके लिए मसीहा बनकर मदद का हाथ बढ़ाया है।
कैसे ग्रामीण मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज के पास पहुंचते हैं
संत रामपाल जी महाराज की कार्यप्रणाली इतनी सुदृढ़ है कि हरियाणा में 1700 किलोमीटर दूर रहने के बावजूद उन्हें देश के कोने-कोने में बैठे जरूरतमंदों की पीड़ा का आभास हो जाता है। भाटापारा में भी यही हुआ। संत रामपाल जी महाराज के स्थानीय अनुयायी, जो इसी मोहल्ले में रहते हैं, ने गुरु जी के आदेशानुसार सर्वेक्षण किया। संत रामपाल जी का स्पष्ट निर्देश है कि जिस भी गांव या मोहल्ले में कोई व्यक्ति दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा हो या जिसका मकान टूटा-फूटा हो, उसकी जानकारी तुरंत उन तक पहुंचाई जाए।
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जानकारी मिलते ही संत रामपाल जी महाराज ने तत्काल प्रभाव से राशन, घरेलू सामग्री और घर की मरम्मत का सामान भिजवाने का आदेश दिया। इसके साथ ही, परिवार को एक विशेष संपर्क कार्ड भी दिया गया है। संत रामपाल जी महाराज ने व्यवस्था की है कि राशन खत्म होने से दो दिन पहले परिवार इस कार्ड पर दिए गए नंबर पर संपर्क कर सकता है, जिसके बाद सेवादार तुरंत उनके घर राशन पहुंचा देंगे। यह प्रक्रिया आजीवन जारी रहेगी।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई सहायता का विवरण
संत रामपाल जी महाराज ने परिवार की हर छोटी से छोटी जरूरत का ध्यान रखा है। केवल पेट भरने के लिए अनाज ही नहीं, बल्कि घर में रोशनी के लिए बड़े एलईडी बल्ब और छत की मरम्मत के लिए उच्च गुणवत्ता वाली तिरपाल भी भिजवाई गई है। प्रदान की गई सामग्रियों का विवरण निम्नलिखित है:
| क्रमांक | सामग्री का नाम | विवरण/मात्रा |
| 1 | आटा | 5-5 किलो के 3 पैकेट (कुल 15 किलो) |
| 2 | चावल | 15 किलो (महीन और अच्छी गुणवत्ता) |
| 3 | दालें | मूँग दाल, धुली मूँग, चना दाल, गुलाबी चना (प्रत्येक आधा किलो) |
| 4 | तेल | सरसों तेल की बोतलें |
| 5 | मसाले | हल्दी, मिर्च पाउडर, जीरा पैकेट |
| 6 | नमक | टाटा नमक पैकेट |
| 7 | चीनी (शक्कर) | 2 किलो |
| 8 | चाय पत्ती | चाय पत्ती का पैकेट |
| 9 | दूध पाउडर | दूध पाउडर के पैकेट |
| 10 | सब्जियाँ | आलू और प्याज |
| 11 | साबुन | नहाने और कपड़े धोने के साबुन (विभिन्न ब्रांड) |
| 12 | वाशिंग पाउडर | कपड़े धोने का पाउडर |
| 13 | अचार | अचार के पैकेट |
| 14 | अन्य | बड़ा एलईडी बल्ब, सिलपोलिन कंपनी की तारपोलिन |
लाभार्थियों की जुबानी: संत रामपाल जी महाराज बने तारणहार
लाभार्थी माता जानकी यादव ने भावुक होते हुए बताया कि उनकी बेटी बचपन से ही पैरों से लाचार है और वह खुद बुजुर्ग हो चुकी हैं। घर चलाने के लिए वे पूरी तरह सरकारी राशन (10 किलो चावल) और पेंशन पर निर्भर थीं, जो नाकाफी था। घर की छत से पानी टपकने के कारण वे गीली मिट्टी में रहने को मजबूर थीं। संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई मदद को देखकर जानकी यादव की आँखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा, “संत रामपाल जी महाराज ही मेरे लिए भगवान हैं। उन्होंने मेरे और मेरी बेटी के सिर पर छत और पेट के लिए भोजन दिया है।”
बेटी मिलापा यादव, जो ट्राई-साइकिल खराब होने और सड़कें ठीक न होने के कारण घर से बाहर नहीं निकल पाती थीं, ने भी संत जी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि बिजली के छोटे बल्ब के कारण घर में अंधेरा रहता था, लेकिन अब संत रामपाल जी महाराज ने बड़े बल्ब भिजवाकर उनके घर को रोशन कर दिया है।
संत रामपाल जी महाराज का संकल्प: नशा मुक्त और सुखी समाज
संत रामपाल जी महाराज की ओर से सेवा लेकर आए सेवादारों ने स्पष्ट किया कि यह सेवा पूर्णतः निशुल्क है और भविष्य में भी एक भी पैसा नहीं लिया जाएगा। हालांकि, संत रामपाल जी महाराज का यह सख्त नियम है कि मदद प्राप्त करने वाला परिवार पूर्णतः नशा मुक्त होना चाहिए और मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। यदि परिवार इन नियमों का पालन करता है, तो संत रामपाल जी महाराज जीवन भर उनकी जिम्मेदारी उठाएंगे। यह पहल समाज में सात्विकता और नैतिकता को भी बढ़ावा दे रही है।
कलयुग में मानवता के सच्चे रक्षक संत रामपाल जी महाराज
आज के दौर में जहां लोग अपने सगे-संबंधियों की मदद करने से कतराते हैं, वहां संत रामपाल जी महाराज जाति, धर्म और क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता की सेवा कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव में एक असहाय परिवार को आजीवन गोद लेकर संत रामपाल जी महाराज ने सिद्ध कर दिया है कि वे ही सच्चे समाज सुधारक और जगत गुरु हैं। उनकी यह दया दृष्टि केवल भौतिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के दिलों में विश्वास और भक्ति का दीप भी जला रही है। संत रामपाल जी महाराज की शरण में जो भी आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता। धन्य हैं संत रामपाल जी महाराज, जो धरती पर भगवान के रूप में दुखियों के आंसू पोंछ रहे हैं।


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