दरगापुर गांव की सुमन जी की कहानी: संघर्ष के बीच संत रामपाल जी महाराज बने सहारा

दरगापुर गांव की सुमन जी की कहानी: संघर्ष के बीच संत रामपाल जी महाराज बने सहारा

आज हम आपके सामने एक ऐसी कहानी लेकर आए हैं, जो इंसानियत, सेवा और सच्ची करुणा का उदाहरण है। यह कहानी है उत्तर प्रदेश के जिला शामली के दरगापुर गांव में रहने वाली सुमन जी और उनके परिवार की, जिनका जीवन पिछले कुछ वर्षों से संघर्षों से भरा रहा है।

सुमन जी के पति का निधन हो चुका है। परिवार में दो छोटे बच्चे हैं। परिवार की पूरी जिम्मेदारी अब सुमन जी के कंधों पर है। वह झाड़ू-पोछा और मेहनत-मजदूरी करके किसी तरह अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं। सीमित आमदनी में रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना उनके लिए बेहद कठिन हो गया था।

संघर्ष भरी दिनचर्या

सुमन जी ने बताया कि पति के निधन के बाद परिवार का कोई स्थायी सहारा नहीं बचा। बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन और अन्य जरूरी खर्च—सब कुछ एक बड़ी चिंता बन चुका था। कई बार हालात ऐसे हो जाते थे कि यह सोचना पड़ता था कि आज और कल बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था कैसे होगी।

संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची पुकार

जब सुमन जी के परिवार की यह स्थिति संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो उन्होंने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से इस परिवार की सहायता करने का निर्देश दिया। संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य है कि कोई भी जरूरतमंद परिवार भूख और मजबूरी के कारण टूट न जाए।

उनके मार्गदर्शन में संत रामपाल जी महाराज की टीम ने दरगापुर गांव पहुंचकर परिवार की वास्तविक स्थिति का सर्वे किया और तुरंत सहायता उपलब्ध कराई।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता

अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत सुमन जी के परिवार को एक महीने का पूरा राशन और रोजमर्रा की जरूरत का सामान निशुल्क प्रदान किया गया। यह सहायता केवल एक बार की नहीं है, बल्कि तब तक जारी रहेगी, जब तक परिवार की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत प्रदान की गई सहायता सामग्री

क्रमांकसहायता सामग्रीमात्रा / विवरण
1आटा20 किलोग्राम
2बासमती चावल5 किलोग्राम
3चीनी2 किलोग्राम
4चार प्रकार की दालेंमिश्रित पैक
5सरसों का तेल1 लीटर
6सूखा दूध1 पैकेट
7चाय पत्ती1 पैकेट
8नमक1 पैकेट
9हल्दी पाउडर1 पैकेट
10लाल मिर्च1 पैकेट
11जीरा1 पैकेट
12अचार1 पैक
13आलू5 किलोग्राम
14प्याज5 किलोग्राम
15नहाने का साबुन4 टिकिया
16कपड़े धोने का साबुन1 पैकेट
17कपड़े धोने का पाउडर (सर्फ)1 पैकेट
18बच्चों के उपयोग की आवश्यक सामग्रीजरूरत अनुसार
19घरेलू स्वच्छता सामग्रीआवश्यकता अनुसार
20अन्य जरूरी वस्तुएंपरिवार की जरूरत के अनुसार

साथ ही परिवार को एक संपर्क नंबर भी दिया गया है, ताकि राशन समाप्त होने से पहले सूचना देने पर अगली सहायता तुरंत घर तक पहुंचाई जा सके।

सेवा केवल राशन तक सीमित नहीं

संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम केवल भोजन तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत

  • जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा,
  • स्कूल ड्रेस व किताबें,
  • बीमार व्यक्तियों के लिए दवाइयां,

और आवश्यकतानुसार अन्य सहायता भी प्रदान की जाती है। संत रामपाल जी महाराज ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक परिवार आत्मनिर्भर नहीं बन जाता, तब तक सेवा निरंतर जारी रहेगी।

परिवार की भावनाएं

सहायता मिलने के बाद सुमन जी ने बताया कि अब उन्हें रोज-रोज यह डर नहीं सताता कि बच्चों को क्या खिलाएंगी। उन्होंने कहा कि यह मदद केवल राशन की नहीं है, बल्कि उस भरोसे की है, जिससे इंसान फिर से हिम्मत जुटा पाता है।

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परिवार की बुजुर्ग सदस्य पार्वती जी ने भी भावुक होकर कहा कि बुढ़ापे में जब सहारा नहीं रहता, तब इस तरह की सहायता बहुत बड़ा संबल बन जाती है।

गांव वालों की प्रतिक्रिया

दरगापुर गांव के पूर्व प्रधान ओमकार सिंह ने भी इस सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा कि अपने 64 वर्षों के जीवन में उन्होंने पहली बार देखा है कि कोई संस्था घर-घर जाकर असहाय परिवारों की तलाश कर रही है और बिना किसी स्वार्थ के निशुल्क सहायता दे रही है। उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के इस कार्य को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

अन्नपूर्णा मुहिम का उद्देश्य

संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में संचालित अन्नपूर्णा मुहिम का उद्देश्य है:

  • कोई भी जरूरतमंद भूखा न सोए,
  • गरीब परिवार सम्मान के साथ जीवन जिएं,
  • बच्चे शिक्षा से वंचित न रहें,
  • समाज को नशा-मुक्त और नैतिक जीवन की ओर प्रेरित किया जाए।

यह सहायता केवल उन्हीं व्यक्तियों को दी जाती है, जो नशा-मुक्त और मांसाहार रहित जीवन अपनाते हैं।

इंसानियत की सच्ची तस्वीर

दरगापुर गांव की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम केवल सहायता नहीं, बल्कि टूटे हुए जीवन को संभालने का कार्य कर रही है। यह मुहिम उन परिवारों के लिए आशा की किरण बन रही है, जिनके पास कोई सहारा नहीं है।

यह कहानी सुमन जी के परिवार की है, लेकिन इसका संदेश हजारों जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचता है—कि जब सेवा सच्चे मन से की जाती है, तो वह जीवन बदल सकती है।

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