सारंगढ़-बिलाईगढ़: आज के दौर में जहां एक ओर चकाचौंध भरी दुनिया है, वहीं दूसरी ओर हमारे समाज में ऐसे भी परिवार हैं जो दो वक्त की रोटी और सिर छुपाने वाली छत के लिए तरस रहे हैं। प्रशासन की तमाम योजनाओं के दावों के बीच, छत्तीसगढ़ के नवगठित जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के बिलाईगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम कैथा में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने इंसानियत को शर्मसार होने से बचाया है। यहां एक ऐसा परिवार जो 2018 से विपत्तियों का पहाड़ झेल रहा था, उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। ऐसे कठिन समय में संत रामपाल जी महाराज उस परिवार के लिए मसीहा बनकर उभरे हैं। संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता ने न केवल इस परिवार की भूख मिटाई है बल्कि उनके जीने की राह को भी आसान बना दिया है।
ग्रामीणों द्वारा संत रामपाल जी महाराज से सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया
ग्राम कैथा में निवासरत इस पीड़ित परिवार तक मदद पहुँचने की प्रक्रिया अत्यंत सहज और मानवीय दृष्टिकोण पर आधारित रही। संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी पूरे भारतवर्ष में फैले हुए हैं और वे समाज के हर उस व्यक्ति से जुड़े रहते हैं जो किसी न किसी कष्ट में है। इस प्रकरण में, पीड़ित महिला बसंती मानिकपुरी के पति के एक मित्र, जो संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी हैं, उनके संपर्क सूत्र बने। आपसी बातचीत और चर्चा के दौरान जब उन्हें बसंती के परिवार की दयनीय आर्थिक और शारीरिक स्थिति का भान हुआ, तो उन्होंने तत्काल इसकी सूचना संत रामपाल जी महाराज की संस्था को दी।
संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से चलने वाली यह व्यवस्था इतनी सुदृढ़ है कि सूचना मिलते ही सेवादारों की टीम ने स्थिति का जायजा लिया। इसमें किसी लंबी कागजी कार्रवाई या नौकरशाही बाधाओं की जगह, सीधे मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता दी गई। संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट आदेश है कि जहां भी कोई जरूरतमंद हो, उसकी जानकारी आश्रम तक पहुंचाई जाए और तत्काल प्रभाव से उसे सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसी प्रक्रिया के तहत संत रामपाल जी महाराज ने इस परिवार के लिए राशन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सामग्रियों का प्रबंध किया।
2018 की दुर्घटना और परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
ग्राम कैथा की रहने वाली बसंती मानिकपुरी का जीवन संघर्षों से भरा हुआ है। उनके परिवार में कुल पांच सदस्य हैं, जिनमें उनके पति, एक बुजुर्ग सास और दो बच्चे शामिल हैं। वर्ष 2018 से पहले सब कुछ सामान्य था; उनके पति वाहन चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। लेकिन 18 नवंबर 2018 को हुए एक भीषण सड़क हादसे ने इस हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को ग्रहण लगा दिया।
इस दुर्घटना में बसंती के पति की कमर के नीचे का पूरा हिस्सा लकवाग्रस्त (Paralyzed) हो गया। पिछले सात वर्षों से वे बिस्तर पर हैं और वर्तमान में उनकी स्थिति इतनी गंभीर है कि लगातार लेटे रहने के कारण उनके कुल्हों में गहरे घाव (Bedsores) हो गए हैं, जिसके चलते वे पिछले एक सप्ताह से बिलाईगढ़ के ब्लॉक अस्पताल में भर्ती हैं। घर में कमाने वाला मुख्य सदस्य जब लाचार हो गया, तो परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया। बसंती कभी खेत में मजदूरी करतीं तो कभी सिलाई, लेकिन 500 रुपये की वृद्धा पेंशन और सोसाइटी से मिलने वाले थोड़े से चावल से पांच लोगों का पेट भरना असंभव सा हो गया था।
आवास की अत्यंत जर्जर और भयावह स्थिति
संत रामपाल जी महाराज की सेवा टीम जब बसंती के घर पहुंची, तो वहां का दृश्य विचलित कर देने वाला था। घर मिट्टी का बना हुआ है और छत के नाम पर केवल टीन के कुछ टुकड़े रखे गए हैं, जो जर्जर हो चुके हैं। घर का मुख्य दरवाजा मुश्किल से तीन-चार फीट का है। बिजली की व्यवस्था अत्यंत खतरनाक स्थिति में है; खुले तार लटक रहे हैं और चीनी मिट्टी के सहारे काम चलाया जा रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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कमरों का आकार इतना छोटा है कि एक व्यक्ति ठीक से सीधा होकर सो भी नहीं सकता। एक कमरा लगभग 10 फीट का है तो दूसरा मात्र 4–5 फीट का। रसोई घर की हालत भी दयनीय है और घर में शौचालय या बाथरूम जैसी कोई बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकना एक आम बात थी, जिससे घर में रहना दूभर हो जाता था। इन हालातों को देखते हुए, संत रामपाल जी महाराज की ओर से तत्काल प्रभाव से घर की छत को ढकने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली तिरपाल (Polythene/Tarpaulin) की व्यवस्था की गई, ताकि बरसात में परिवार को राहत मिल सके।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई राहत सामग्री
संत रामपाल जी महाराज का नारा है “रोटी, कपड़ा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान, हर गरीब को देंगे कबीर भगवान।” इसी ध्येय को चरितार्थ करते हुए, उन्होंने इस परिवार को एक महीने से अधिक का राशन और दैनिक उपयोग की वस्तुएं निशुल्क प्रदान की हैं। प्रदान की गई सामग्रियों का विवरण निम्न प्रकार है:
| क्रमांक | सामग्री का नाम | मात्रा/विवरण |
| 1 . | आटा | 25 किग्रा. (5 पैकेट) |
| 2. | चीनी | 2 किग्रा. |
| 3. | दाल | मूंग और चना दाल |
| 4. | मसाले | जीरा, हल्दी, नमक |
| 5. | तेल | सरसों का तेल (सब्जी हेतु) |
| 6. | स्वच्छता सामग्री | नहाने का साबुन और कपड़े धोने का साबुन |
| 7. | दूध पाउडर | 1 किग्रा. (अमूल) |
| 8. | सब्जियां | आलू (5kg) प्याज (5kg) |
| 9. | अन्य खाद्य | चायपत्ती, आचार, अच्छी गुणवत्ता वाला चावल |
| 10. | बर्तन | स्टील की कटोरियां |
| 11. | आवास सुविधा | छत के लिए वॉटरप्रूफ तिरपाल |
चिकित्सा और शिक्षा का जिम्मा भी संत रामपाल जी महाराज ने लिया
राशन और आवास मरम्मत के अलावा, संत रामपाल जी महाराज ने परिवार की सबसे बड़ी चिंता-स्वास्थ्य और शिक्षा-को भी दूर कर दिया है। बसंती का छोटा बेटा बीमार है और उसे सर्दी, खांसी व बुखार की शिकायत है, जबकि पति गंभीर हालत में अस्पताल में हैं। सेवादार ने स्पष्ट किया कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा परिवार के सदस्यों के इलाज का पूरा खर्च उठाया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, परिवार का एक बच्चा जो 9वीं कक्षा में है, आर्थिक तंगी के कारण उसकी पढ़ाई बाधित हो रही थी। उसके पास न स्कूल ड्रेस थी, न किताबें और न ही स्कूल बैग। संत रामपाल जी महाराज ने इस बच्चे की शिक्षा का पूरा दायित्व अपने ऊपर लिया है। अब उसकी फीस, किताबें और ड्रेस की व्यवस्था संत रामपाल जी महाराज द्वारा निशुल्क की जाएगी, ताकि भविष्य में वह अपने पैरों पर खड़ा हो सके।
भविष्य की सुरक्षा और नियम
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी जा रही यह सहायता केवल एक बार की नहीं है। सेवा टीम की ओर से परिवार को एक संपर्क कार्ड दिया गया है, जिस पर आश्रम का नंबर अंकित है। उन्हें आश्वस्त किया गया है कि जब भी राशन खत्म हो या किसी अन्य सहायता की आवश्यकता हो, वे फोन कर सकते हैं; सामान उनके घर पहुंचा दिया जाएगा। सिलेंडर खत्म होने से दो दिन पहले सूचित करने पर नया सिलेंडर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
हालांकि, संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी जाने वाली इस सहायता के साथ एक महत्वपूर्ण नियम भी जुड़ा है। यह सहायता केवल उन परिवारों को दी जाती है जो नशा और मांस का सेवन नहीं करते। यदि कोई व्यक्ति इन व्यसनों में लिप्त पाया जाता है, तो उसे इन्हें त्यागना होगा। यदि सहायता प्राप्त करने के बाद भी कोई नशा करता है, तो सहायता बंद कर दी जाएगी। यह नियम समाज को नशामुक्त और सात्विक बनाने की दिशा में संत रामपाल जी महाराज का एक और बड़ा कदम है।
बसंती मानिकपुरी ने नम आंखों से संत रामपाल जी महाराज का धन्यवाद करते हुए कहा कि जब उनका कोई सहारा नहीं था, तब संत रामपाल जी ने उन्हें अपनाया है। उन्होंने संत रामपाल जी महाराज की जल्द रिहाई की प्रार्थना भी की ताकि वे समाज के और अधिक लोगों का भला कर सकें। यह पहल सिद्ध करती है कि संत रामपाल जी महाराज की “अन्नपूर्णा मुहिम” महज एक योजना नहीं, बल्कि मानवता की सच्ची सेवा है।

