संत नगर मोगा में गरीब दंपति पर संत रामपाल जी महाराज ने की विशेष रजा

पंजाब के मोगा में बुजुर्ग दंपति के अंधेरे जीवन में उजाले की किरण बनकर उभरी संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम

मोगा (पंजाब):- कहते हैं कि जब जीवन में चारों ओर अंधेरा छा जाता है और इंसान की उम्मीदें टूटने लगती हैं, तब परमात्मा किसी न किसी रूप में सहारा बनकर आते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक और भावुक कर देने वाली कहानी पंजाब के मोगा ज़िले के संत नगर से सामने आई है, जहाँ एक बेहद गरीब और असहाय दंपति परिवार के जीवन में संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम ने उम्मीद की नई रोशनी जला दी।

दयनीय स्थिति: परिवार के मौजूदा हालात

संत नगर में रहने वाला यह दंपति परिवार लंबे समय से अत्यंत दयनीय परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहा था। न उनका अपना घर था, न आय का कोई स्थायी साधन। जिस मकान में वे रह रहे थे, वह भी किराए का था और उसकी हालत बेहद जर्जर थी। घर में न तो ठीक से नहाने की व्यवस्था थी और न ही कपड़े धोने की। बाथरूम की छत पक्की नहीं थी, केवल टीन की चादर से ढका हुआ था, जिससे बरसात में हालात और भी खराब हो जाते थे। दरवाज़े इतने पुराने और टूटे हुए थे कि सुरक्षा का भी कोई भरोसा नहीं था।

बीमार पत्नी, संघर्षरत पति

इस दंपति परिवार की सबसे बड़ी पीड़ा, पत्नी की खराब सेहत थी। वे शुगर और हार्ट की गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। चलना-फिरना तक उनके लिए मुश्किल हो गया था। बीमारी के कारण वे घर का कोई काम करने में असमर्थ थीं। ऐसे में घर की पूरी जिम्मेदारी परिवार के मुखिया पर आ गई थी, जो बाहर मजदूरी करके जैसे-तैसे कुछ कमा लेते थे और फिर घर आकर खाना बनाते थे। पत्नी का कहना था कि यदि वे खाना न बनाएं, तो घर में रोटी तक बनाने वाला कोई नहीं है। यह स्थिति किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का हृदय द्रवित कर सकती है।

संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम का दिव्य हस्तक्षेप

ऐसे निराशाजनक हालातों में संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम इस परिवार के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई। संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन और करुणा से संचालित इस मुहिम के अंतर्गत इस परिवार तक भरपूर राहत सामग्री पहुंचाई गई। यह सहायता किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर प्रदान की गई।

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत संत रामपाल जी महाराज की दया से इस परिवार को निम्नलिखित राहत सामग्री प्रदान की गई:-

संख्या सामग्री मात्रा 
1.आटा 15 किलोग्राम 
2.चावल 5 किलोग्राम 
3.चीनी 2 किलोग्राम 
4.चायपत्ती 1 पैकेट 
5.सूखा दूध 1 डिब्बा 
6.सरसों तेल 1 लीटर 
7.टाटा नमक 1 किलोग्राम 
8.चना दाल 500 ग्राम 
9.पीली मूंग दाल 500 ग्राम 
10.हरी मूंग दाल 500 ग्राम 
11.काले चने 500 ग्राम 
12.लाल मिर्च पाउडर 100 ग्राम 
13.हल्दी पाउडर 150 ग्राम
14.जीरा 150 ग्राम 
15.आलू 2.5 किलोग्राम 
16.प्याज़ 2.5 किलोग्राम 
17.आचार 500 ग्राम 
18.नहाने का साबुन 2 पीस 
19.कपड़ा धोने का साबुन 1 किलोग्राम 
20.सर्फ500 ग्राम

निरंतर सहायता का दिव्य संकल्प

यह पूरी व्यवस्था संत रामपाल जी महाराज की दया एवं करुणा से संभव हुई। अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत यह भी सुनिश्चित किया गया कि यह सहायता निरंतर मिलती रहे। परिवार को एक विशेष कार्ड दिया गया, जिसमें कुछ संपर्क सूत्र दिए गए है और जिसके माध्यम से वे भविष्य में दो-तीन दिन पहले संपर्क करके अगली राशन सामग्री प्राप्त कर सकते हैं। यह व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज की सोच केवल तात्कालिक सहायता तक सीमित नहीं है। वे ज़रूरतमंदों को सिर्फ समाज में लोकप्रिय बनने के लिए नहीं बल्कि वास्तविक में उनके जीवन सुधार के लिए उनका हाथ हमेशा के लिए थाम लेते है।

परिवार और पड़ोसियों की प्रतिक्रिया 

राशन सामग्री मिलने के बाद दंपति परिवार की आंखों में खुशी के आँसू थे। परिवार के मुखिया ने भावुक होकर कहा कि बिना मांगे उनके घर तक खाने-पीने का पूरा सामान पहुंचा, इसके लिए वे संत रामपाल जी महाराज के हृदय से आभारी हैं। वहीं, बीमार माता जी ने कहा कि उनकी हालत बहुत खराब थी, लेकिन परमात्मा ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से उनकी भूख मिटाई और उन्हें नया संबल दिया।

पड़ोसियों ने भी इस सहायता की खुले दिल से सराहना की। उनका कहना था कि यह परिवार पिछले कई वर्षों से अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जी रहा था तथा घर में कोई कमाने वाला भी नहीं था। संत रामपाल जी महाराज की इस मुहिम ने इनके जीवन में बड़ा बदलाव ला दिया है। पड़ोसियों के अनुसार, ऐसे कार्य समाज में मानवता और भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं।

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नशा-मुक्त और शुद्ध समाज का निर्माण

संत रामपाल जी महाराज केवल अन्न ही नहीं दे रहे, बल्कि वे एक शुद्ध और मर्यादित समाज का निर्माण भी कर रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज जी का यह सख्त आदेश है कि इस मुहिम का लाभ केवल उन्हीं को मिलेगा जो पूरी तरह नशा-मुक्त हैं और मांसाहार का त्याग कर चुके हैं। संत रामपाल जी महाराज की यह प्रेरणा समाज को बुराइयों से दूर कर एक सात्विक जीवन जीने की ओर अग्रसर कर रही है। संत रामपाल जी महाराज जी का मानना है कि पूर्ण परमात्मा की भक्ति और समाज सेवा का लाभ तभी मिल सकता है जब मनुष्य के विचार और खान-पान शुद्ध हों।

अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत कोई लाभार्थी व्यक्ति मांस एवं नशा किसी का भी सेवन करता पाया गया तो उनकी सहायता तुरंत प्रभाव से रोक दी जाएंगी।

मानवता के सच्चे मसीहा संत रामपाल जी महाराज

आज जहाँ सरकारें और संस्थाएं कागजों पर दावे करती हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज ज़मीनी स्तर पर बदलाव ला रहे हैं। चाहे वह गरीबों को राशन देना हो, सरकारी स्कूलों के बच्चों को शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराना हो या बीमारों की सेवा करना, यह सब कुछ महाराज जी की दिव्य शक्ति और उनकी अपार करुणा से ही संभव हो पा रहा है। ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ वास्तव में कलयुग में मानवता के लिए एक वरदान सिद्ध हो रही है।

अंत में यह कहना गलत नहीं होगा कि संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम केवल राशन वितरण का कार्य नहीं है, बल्कि पूर्ण संत की शक्ति का जीवित प्रमाण है, जहां वह अपनी आत्माओं तक खुद पहुंच रहे है। संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में चल रही यह मुहिम आज समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लिए जीवनदायिनी बन चुकी है और इंसानियत की सच्ची मिसाल पेश कर रही है।

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