ओडिशा: कंधमाल जिले के एक छोटे से पहाड़ी गांव सिरी में मानवता और निस्वार्थ सेवा की एक अद्भुत मिसाल देखने को मिली। एक गरीब परिवार, जिसका मुखिया एक भयानक हादसे के कारण लकवाग्रस्त हो चुका है, दाने-दाने को मोहताज था। ऐसे विकट और बेबसी के समय में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम ने इस परिवार के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगाई। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार मुनीन्द्र धर्मार्थ ट्रस्ट के सेवादारों ने सीधे परिवार के जर्जर घर तक पहुंचकर उन्हें मुफ्त राशन और दैनिक जरूरत का सारा सामान उपलब्ध करवाया।
अन्नपूर्णा मुहिम ने कैसे बदली लकवाग्रस्त परिवार की जिंदगी से जुड़े मुख्य बिंदु:
- घर तक पहुंचा भरपूर राशन: परिवार को पूरे महीने के लिए 20 किलो चावल, आलू, प्याज, चीनी, दो प्रकार की दालें, चना, दूध, तेल, अचार, नमक और साबुन मुफ्त दिया गया।
- स्थाई मदद का कार्ड: परिवार को एक विशेष कार्ड दिया गया है। राशन खत्म होने से दो दिन पहले कॉल करने पर सेवादार दोबारा घर तक सामान पहुंचाएंगे।
- इलाज और शौचालय का आश्वासन: राशन के साथ-साथ परिवार के मुखिया के इलाज का प्रबंध करने और घर में शौचालय बनवाने का जिम्मा भी ट्रस्ट के सेवादारों ने उठाया है।
- संबलपुर से 240 किलोमीटर का सफर: संत रामपाल जी महाराज का आदेश मिलते ही सेवादारों ने 240 किलोमीटर दूर जाकर इस परिवार की सुध ली।
परिवार की लाचारी, पेड़ गिरने से हुआ हादसा
परिवार के मुखिया ने बताया कि उनके परिवार में कुल चार सदस्य हैं और वही अकेले कमाने वाले थे। काम के दौरान उनके सिर पर एक पेड़ गिर गया, जिससे उनका सिर फट गया और छाती के नीचे का पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया। आज वह पूरी तरह से बिस्तर पर लाचार पड़े हैं। उनके इलाज में काफी खर्च हुआ। अब घर की पूरी जिम्मेदारी उनकी पत्नी पर आ गई है।
पत्नी महीने में केवल चार-पांच दिन ही काम पर जा पाती हैं, क्योंकि उन्हें अपने बीमार पति और बच्चों की देखभाल भी करनी होती है। सरकार की तरफ से मिलने वाली एक हजार रुपये की पेंशन उनके इलाज और घर के खर्चे के लिए बिल्कुल नाकाफी है। हालात इतने खराब हो गए थे कि कई बार बच्चों को भूखे पेट ही सोना पड़ता था।
टूटी छत और बारिश का कहर
इस परिवार की बेबसी केवल भुखमरी तक सीमित नहीं थी। उनका घर बहुत ही जर्जर हालत में है। छत टिन और एस्बेस्टस की बनी है, जो कई जगह से टूट चुकी है। ओले गिरने से छत में दरारें आ गई हैं। बरसात के दिनों में पानी सीधा घर के अंदर टपकता है। ऐसी तंगहाली में यह परिवार अपना जीवन यापन कर रहा था।
प्यासे के पास खुद चलकर आया कुआं
जब इस परिवार के पास कोई पर्याप्त सरकारी या सामाजिक मदद नहीं पहुंची, तब संत रामपाल जी महाराज जी की अन्नपूर्णा मुहिम टीम को इनकी दयनीय स्थिति का पता चला। टीम के सेवादारों ने यह बात संत रामपाल जी महाराज तक पहुंचाई। संत रामपाल जी महाराज जी ने तत्काल मदद का आदेश दिया।
आदेश मिलते ही सेवादार संबलपुर से 230 से 240 किलोमीटर का सफर तय करके इस दूरस्थ पहाड़ी गांव में पहुंचे और परिवार को राहत सामग्री सौंपी। राशन पाकर राम तो प्रधान और उनकी पत्नी ने भावुक होते हुए संत रामपाल जी महाराज को कोटि-कोटि धन्यवाद दिया और कहा कि जिसका कोई नहीं होता, उसका खुदा होता है।
उम्र भर का सहारा और नशा मुक्त जीवन की सख्त शर्त
सेवादार ने बताया कि यह मदद कोई एक दिन का दिखावा नहीं है। संत रामपाल जी महाराज जी के आदेशानुसार, जब तक यह परिवार अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता, तब तक उन्हें राशन मिलता रहेगा। इसके पीछे संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट उद्देश्य है कि रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान हर गरीब को मिलना चाहिए।
हालांकि, इस अन्नपूर्णा मुहिम की एक सख्त शर्त है। राहत सामग्री केवल उन परिवारों को दी जाती है जो पूर्ण रूप से नशा मुक्त जीवन जीते हैं और मांस भक्षण नहीं करते हैं। यदि कोई लाभार्थी नशा या मांसाहार करता पाया जाता है, तो उसकी सहायता तुरंत प्रभाव से बंद कर दी जाती है। यह समाज से कुरीतियों को मिटाने और एक स्वच्छ वातावरण बनाने का बहुत ही कारगर कदम है।

