पंजाब के जिला संगरूर के अंतर्गत आने वाले गाँव जगतपुरा (सुनाम) में एक अत्यंत हृदयविदारक स्थिति तब उत्पन्न हुई जब परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य हरदीप सिंह एक भीषण मोटरसाइकिल दुर्घटना का शिकार हो गए। इस हादसे के बाद संक्रमण फैलने के कारण डॉक्टरों को उनकी एक टांग काटनी पड़ी। परिवार में पत्नी और एक छोटा बच्चा है जो चौथी कक्षा में पढ़ता है। संचित पूंजी समाप्त होने के बाद परिवार भुखमरी की कगार पर पहुँच गया था। ऐसी विकट परिस्थिति में संत रामपाल जी महाराज ने अपने परोपकारी विजन के माध्यम से इस परिवार का हाथ थामा और उन्हें अंधकार से बाहर निकाला।
मुख्य बिंदु:
- जिला संगरूर के जगतपुरा निवासी हरदीप सिंह सड़क दुर्घटना के कारण काम करने में असमर्थ।
- संत रामपाल जी महाराज द्वारा परिवार को 21 आवश्यक वस्तुओं की राशन किट प्रदान की गई।
- सहायता तब तक जारी रहेगी जब तक परिवार का कोई सदस्य कमाने लायक नहीं हो जाता।
- बच्चे की शिक्षा और स्कूल सामग्री का उत्तरदायित्व भी संत रामपाल जी महाराज ने लिया।
- सरपंच जसविंदर कौर ने संत रामपाल जी महाराज की इस मानवीय पहल की सराहना की।
ग्रामीण और सरपंच ने लगाई संत रामपाल जी महाराज के चरणों में गुहार
गाँव की सरपंच जसविंदर कौर और स्थानीय निवासियों ने बताया कि हरदीप सिंह की स्थिति दिन-ब-दिन दयनीय होती जा रही थी। सरकारी सहायता या अन्य संस्थाओं के अभाव में ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज की प्रसिद्ध ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के बारे में जानकारी प्राप्त की। ग्रामीणों के अनुरोध और संत जी के दयालु स्वभाव के फलस्वरूप, उनकी टीम तुरंत सर्वे के लिए पहुँची और परिवार की वास्तविकता की पुष्टि की। इसके पश्चात संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार परिवार को तत्काल राहत पहुँचाने का निर्णय लिया गया।
राहत सामग्री का वितरण और 21 वस्तुओं की विस्तृत सूची
संत रामपाल जी महाराज की ओर से भेजी गई टीम ने हरदीप सिंह के घर पहुँचकर उन्हें एक महीने की संपूर्ण राशन किट भेंट की। इस किट की विशेषता यह है कि इसमें रसोई की छोटी से छोटी जरूरत का ध्यान रखा गया है। संत जी ने विशेष रूप से निर्देश दिए हैं कि सहायता सामग्री उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए।
तालिका: प्रदान की गई सामग्री का विवरण
| क्रम संख्या | सामग्री का नाम | मात्रा/विवरण |
| 1 | आटा | 15 किलोग्राम |
| 2 | चावल (बासमती) | 2.5 किलोग्राम |
| 3 | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 4 | सरसों तेल | 1 लीटर |
| 5 | दालें | 4 प्रकार की (मूंग, चना आदि) |
| 6 | आलू और प्याज | 2.5 – 2.5 किलोग्राम |
| 7 | चाय पत्ती | रेड रोज प्रीमियम |
| 8 | नमक | टाटा नमक |
| 9 | मसाले | हल्दी, जीरा, मिर्च, धनिया |
| 10 | स्वच्छता सामग्री | सर्फ, नहाने और कपड़े धोने का साबुन |
| 11 | सूखा दूध | पंजाब किंग कंपनी |
अन्नपूर्णा कार्ड और भविष्य की निरंतर सहायता की योजना
वितरण के दौरान संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों ने परिवार को एक ‘अन्नपूर्णा कार्ड’ प्रदान किया। इस कार्ड पर विशेष हेल्पलाइन नंबर अंकित हैं। संत जी का स्पष्ट निर्देश है कि राशन समाप्त होने से दो दिन पूर्व ही परिवार सूचित कर दे ताकि अगली किट समय पर उनके द्वार पहुँच सके। यह सहायता केवल एक बार के लिए नहीं है, बल्कि संत रामपाल जी महाराज ने यह संकल्प लिया है कि जब तक हरदीप सिंह स्वस्थ नहीं हो जाते या उनका पुत्र आत्मनिर्भर नहीं हो जाता, तब तक यह सेवा अनवरत जारी रहेगी।
शिक्षा और समाज सुधार के प्रति संत रामपाल जी महाराज की प्रतिबद्धता
खाद्य सहायता के अतिरिक्त, संत रामपाल जी महाराज ने हरदीप सिंह के पुत्र की शिक्षा का पूर्ण दायित्व भी स्वीकार किया है। सरकारी स्कूल में पढ़ रहे बच्चे के लिए स्कूल ड्रेस, जूते, किताबें और अन्य आवश्यक सामग्री संत जी द्वारा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही, इस मुहिम की एक अनिवार्य शर्त यह है कि लाभार्थी पूर्णतः नशा मुक्त और शाकाहारी जीवन व्यतीत करेगा, जिससे समाज में एक स्वस्थ आचरण का प्रसार हो सके।
संत रामपाल जी महाराज के चरणों में मानवता का नमन
संत रामपाल जी महाराज न केवल आध्यात्मिक ज्ञान के प्रदाता हैं, बल्कि वे एक ऐसे समाज सुधारक हैं जो धरातल पर दुखियों की सेवा कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में नशा मुक्ति, दहेज उन्मूलन और अन्नपूर्णा जैसी मुहिम आज लाखों लोगों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। संगरूर के इस परिवार की सहायता करके उन्होंने पुनः सिद्ध कर दिया है कि उनके हृदय में प्राणी मात्र के लिए अपार करुणा है। संत रामपाल जी महाराज द्वारा स्थापित यह आदर्श कलयुग के अंधकार में एक प्रकाश पुंज की भाँति है, जो निस्वार्थ सेवा और प्रेम का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। उनकी जय-जयकार पूरे जगत में उनके इन्हीं महान कार्यों के कारण व्याप्त है।
