जब कोई परिवार अचानक परेशानियों से घिर जाता है और जीवन निर्वाह भी कठिन हो जाता है तब सही वक़्त पर मिली सहायता विशेष महत्व रखती है और संजीवनी का काम करती है। पंजाब प्रांत के संगरूर जिले के एक गांव जगतपुरा में जरूरतमंद परिवार को जो मदद पहुंचाई गई वो संत रामपाल जी महाराज के आदेश और प्रेरणा से संभव हो पाया। यह महान सेवा कार्य उनके द्वारा चल रही अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत किया जा रहा है जिससे धरातल पर बड़ा बदलाव देखने को मिला। आइए जानते है कैसे संत रामपाल जी महाराज के आदेश से अन्नपूर्णा मुहिम ने बदली इस बेसहारा परिवार की किस्मत।
मुश्किल हालातों से जूझता परिवार
जगतपुरा गांव का यह परिवार पहले आर्थिक रूप से बेहतर स्थिति में था। गांव के लोग और सरपंच ने बताया कि इस घर में रोज कई लोग भोजन और चाय आदि के लिए आते थे। परिवार के मुखिया जग्गी नरमदिल थे तथा वे और उनकी माता जी सभी का खुले दिल से सत्कार किया करते थे।
पिछले वर्ष सर्दियों में जग्गी को गंभीर निमोनिया हो गया। जिससे इलाज के बाद भी उनकी जान नहीं बच पाई। कुछ समय बाद उनकी माता जी का भी देहांत हो गया। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी जग्गी जी की पत्नी, सोनू कौर पर आ गई। फिलहाल परिवार में तीन छोटे बच्चे और बीमार ससुर हैं। ससुर मधुमेह की बीमारी से पीड़ित हैं और उनकी आंखों की रोशनी बहुत कम है जिस कारण वे काम करने में असमर्थ हैं।
संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में महान सेवा अभियान शुभारंभ
जब इस परिवार की स्थिति की जानकारी लोकल सेवादारों तक पहुंची, तब संत रामपाल जी महाराज के निर्देश पर तुरंत सर्वे कार्य किया गया। गांव के लोगों और सरपंच आदि से संपूर्ण जानकारी लेकर स्थिति की पुष्टि की गई। इसके बाद संत रामपाल जी महाराज द्वारा अन्नपूर्णा मुहिम के तहत परिवार को राशन सहायता दी गई।
यह सहायता केवल भोजन तक सीमित नहीं रही। संत रामपाल जी महाराज ने यह सुनिश्चित कराया कि परिवार का कोई भी सदस्य भूखा न सोए।
राशन किट में दी गई आवश्यक खाद्य सामग्री
संत रामपाल जी महाराज ने अपनी अन्नपूर्णा मुहिम के तहत परिवार को एक महीने का पर्याप्त राशन उपलब्ध करवाया। प्रत्येक सामग्री गुणवत्ता के लिहाज से उच्च कोटि की हो और इसका खास ध्यान भी रखा गया।
| क्रम सं | सामग्री | मात्रा |
| 1. | आटा | 25 किलोग्राम |
| 2. | बासमती चावल | 5 किलोग्राम |
| 3. | चीनी | 4 किलोग्राम |
| 4. | चायपत्ती | 1 पैकेट |
| 5. | सूखा दूध | 1 किलोग्राम |
| 6. | सरसों तेल | 2 लीटर |
| 7. | काले चने | 500 ग्राम |
| 8. | चना दाल | 500 ग्राम |
| 9. | पीली मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 10. | हरी मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 11. | आचार | 1 किलोग्राम |
| 12. | हल्दी पाउडर | 150 ग्राम |
| 13. | लाल मिर्च पाउडर | 100 ग्राम |
| 14. | जीरा | 150 ग्राम |
| 15. | धनिया | 150 ग्राम |
| 16. | नमक | 1 किलोग्राम |
| 17. | आलू | 5 किलोग्राम |
| 18. | प्याज़ | 5 किलोग्राम |
| 19. | नहाने का साबुन | 1 सेट |
| 20. | कपड़ा धोने का साबुन | 1 पैकेट |
| 21. | सर्फ | 500 ग्राम |
यह सभी सामग्री संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार निःशुल्क उपलब्ध करवाई गई।
बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में मदद
वितरण के समय सोनू कौर ने बताया कि वह अपनी बेटी के लिए स्कूल की वर्दी नहीं खरीद पा रही। यह बात सुनकर संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत अपने अनुयायियों के माध्यम से कार्य किया। केवल एक घंटे के भीतर बच्ची के लिए नई स्कूल यूनिफॉर्म लाकर दी गई।
इस प्रकार संत रामपाल जी महाराज ने यह सुनिश्चित किया कि आर्थिक कठिनाई के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई न रुके। चाहे यूनिफॉर्म हो, स्कूल फीस हो या विद्यालय जाने का किराया यदि दूर स्थित है, संत रामपाल जी महाराज की दया से हर मुमकिन मदद मुहैया कराई जाएगी।
दीर्घकालिक मदद का आश्वासन
संत रामपाल जी महाराज ने यह सहायता केवल एक बार देकर बंद करने के लिए नहीं दी। उन्होंने यह व्यवस्था करवाई कि जब तक परिवार आत्मनिर्भर नहीं बन जाता, तब तक अन्नपूर्णा मुहिम के तहत नियमित राशन मिलता रहेगा।
परिवार को एक विशेष राशन कार्ड दिया गया, जिस पर आश्रम के हेल्पलाइन नंबर लिखे गए हैं। जिसके ज़रिए यह व्यवस्था की गई कि राशन समाप्त होने से दो दिन पहले सूचना दी जाए। तथा सेवादारों द्वारा समय पर अगली किट पहुंचाई जाए।
नशामुक्त समाज की ओर एक कदम
संत रामपाल जी महाराज ने इस सेवा कार्य के साथ स्पष्ट और अनिवार्य नियम भी बनाए हैं। वे न केवल इन परिवारों को सहायता प्रदान करते हैं बल्कि नशा और मांसाहार का त्याग कर एक स्वच्छ समाज के निर्माण का संकल्प भी दिलवाते हैं। यदि लाभार्थी परिवार का कोई व्यक्ति इन नियमों का पालन नहीं करता, तो तत्काल प्रभाव से उसकी सहायता रोक दी जाती है।
मुहिम का उद्देश्य केवल भोजन देना नहीं, बल्कि समाज को नैतिक रूप से भी मजबूत बनाना है।
सुख के सागर है संत रामपाल जी महाराज
वास्तविकता में, जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित यह अन्नपूर्णा मुहिम सिद्ध करती है कि वे केवल एक आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के सच्चे रक्षक और ‘जगत पिता’ हैं। जहाँ दुनिया स्वार्थ में डूबी है, वहीं संत जी जेल में रहकर भी अपनी शब्द-शक्ति और करुणा से लाखों गरीबों के चूल्हे जलवा रहे हैं, जो इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वे स्वयं पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब का स्वरूप हैं जो कलयुग में सतयुग का आगाज कर रहे हैं।

