संसार में विपत्ति कभी बताकर नहीं आती, और जब आती है तो हँसते-खेलते परिवारों को उजाड़ कर रख देती है। विशेषकर उन परिवारों के लिए जहाँ केवल एक ही व्यक्ति कमाने वाला हो, उसकी मृत्यु के बाद परिवार के सामने न केवल भावनात्मक बल्कि ‘दो वक्त की रोटी’ का भी गहरा संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे ही कठिन समय में जब दुनिया मुँह मोड़ लेती है, तब जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज एक मसीहा के रूप में सामने आते हैं। उनकी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ केवल एक सहायता अभियान नहीं है, बल्कि यह उस ईश्वरीय करुणा का साक्षात् प्रमाण है, जो हर बेसहारा को सम्मान के साथ जीने का हक देती है। उत्तर प्रदेश के शामली जिले के पेलखा गांव में हाल ही में एक ऐसी ही हृदयस्पर्शी घटना सामने आई है। आइए जानते है इसके बारे में विस्तार से।
एक हफ्ते में उजड़ गई दुनिया: पेलखा के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
शामली जिले के पेलखा गांव की रहने वाली ममता के ऊपर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है कि जिसकी कल्पना मात्र से हृदय कांप उठता है। ममता के पति, जो मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालते थे, उनका निधन मात्र एक सप्ताह पूर्व हो गया। घर का एकमात्र सहारा छिन जाने के बाद ममता और उनके दो मासूम बच्चे पूरी तरह बेसहारा हो गए। मजदूरी से आने वाली थोड़ी-बहुत आय भी बंद हो गई, जिससे घर में चूल्हा जलना भी दूभर हो गया। पड़ोसी अमरेश बहन जी ने बताया कि परिवार की स्थिति अत्यंत दयनीय है और मुखिया के चले जाने के बाद बच्चों की पढ़ाई और खाने-पीने का कोई जरिया नहीं बचा है।
जर्जर मकान और बुनियादी सुविधाओं का अभाव
संत रामपाल जी महाराज के आदेश से जब इस परिवार के घर का जायजा लिया, तो स्थिति अत्यंत विचलित करने वाली थी। परिवार एक पुराने और जर्जर घर में रहने को मजबूर है। घर की दीवारों और छत की हालत तो खराब है ही, साथ ही बुनियादी सुविधाओं का भी भारी अभाव है। घर में स्थित शौचालय और बाथरूम की व्यवस्था अत्यंत खराब है; वहां न तो दरवाजे हैं और न ही कोई उचित आड़, वह पूरी तरह से खुला हुआ है। ऐसी परिस्थितियों में एक विधवा महिला और छोटे बच्चों का जीवन निर्वाह करना समाज की संवेदनशीलता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम: अँधेरे में उम्मीद की किरण
जब इस परिवार की बेबसी की खबर संत रामपाल जी महाराज तक पहुँची, तो उन्होंने बिना देर किए कदम उठाए। संत रामपाल जी महाराज के आदेश से उनके अनुयायियों द्वारा तुरंत गांव का दौरा किया और स्थिति का मुआयना किया। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार अन्नपूर्णा मुहिम हर भूखे व्यक्ति तक पहुंचने लग रही है। लाभार्थी बहन ममता ने भावुक होकर कहा कि जब वह पूरी तरह बेसहारा महसूस कर रही थीं, तब संत जी ने उन्हें सहारा देकर भगवान होने का प्रमाण दिया है।
प्रदान की गई राहत सामग्री का विवरण
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में परिवार को एक महीने का पूरा राशन और रसोई की हर छोटी-बड़ी वस्तु उपलब्ध कराई गई। प्रदान की गई सामग्री की सूची नीचे दी गई है:
| सामग्री | मात्रा |
| आटा | 15 किलो |
| चावल | 5 किलो |
| आलू | 5 किलो |
| प्याज | 5 किलो |
| सरसों का तेल | 1 लीटर |
| चीनी | 2 किलो |
| दालें (4 प्रकार की) | आवश्यकतानुसार |
| सूखा दूध (अमूल) | 1 डिब्बा |
| हल्दी, मिर्च, जीरा | उचित मात्रा में |
| चाय पत्ती | 1 पैकेट |
| नहाने और कपड़े धोने का साबुन | 1–1 सेट |
| डिटर्जेंट पाउडर (घड़ी) | 1 पैकेट |
| आचार | 1 पैकेट |
| नमक | 1 किलोग्राम |
शिक्षा और उज्जवल भविष्य का वादा
संत रामपाल जी महाराज की यह मुहिम केवल भोजन तक सीमित नहीं है। परिवार की स्थिति को देखते हुए, बच्चों की शिक्षा के लिए भी विशेष आश्वासन दिया गया है। संत जी के आदेशानुसार यह स्पष्ट किया गया है कि यदि परिवार बच्चों की स्कूल फीस, ड्रेस या किताबों का खर्च उठाने में असमर्थ है, तो ‘रोटी, कपड़ा, शिक्षा और मकान – हर गरीब को देगा कबीर भगवान’ के संकल्प के तहत बच्चों की पूरी पढ़ाई का खर्च भी संत रामपाल जी महाराज ही उठाएंगे।
आजीवन सहायता और निरंतरता का संकल्प
इस मुहिम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि संत रामपाल जी महाराज के आदेश से यह मदद एक बार की औपचारिकता नहीं है। परिवार को एक विशेष सहायता कार्ड प्रदान किया गया है जिसमें संपर्क सूत्र दिए गए हैं। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार जब भी राशन खत्म होने वाला हो, परिवार दो दिन पहले सूचित कर दे, और सामग्री तुरंत उनके घर पहुँचा दी जाएगी। संत जी के आदेश से यह सहायता तब तक निरंतर जारी रहेगी जब तक कि परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो जाता या घर का कोई सदस्य कमाने योग्य नहीं हो जाता।
नशामुक्त और शाकाहारी जीवन की अनिवार्य शर्त
अन्नपूर्णा मुहिम का लाभ प्राप्त करने के लिए संत रामपाल जी महाराज ने कुछ नैतिक नियम भी निर्धारित किए हैं। सहायता केवल उन्हीं परिवारों को दी जाती है जो पूर्णतः नशामुक्त जीवन जीते हैं और मांस या किसी भी प्रकार की अभक्ष वस्तु का सेवन नहीं करते। यदि कोई लाभार्थी इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसकी सहायता तुरंत प्रभाव से रोक दी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज को न केवल गरीबी से बल्कि बुराइयों से भी मुक्त करना है।
मानवता के सच्चे रक्षक संत रामपाल जी महाराज
पेलखा गांव के ग्रामीण संदीप कुमार ने कहा कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा अनेकों समाज सुधार अभियान चलाए जा रहे है, जैसे नशा मुक्ति, दहेज मुक्ति और अन्नपूर्णा मुहिम, यह सभी देश की प्रगति के लिए एक बहुत बड़ा योगदान है, और उनके अनुसार काफी सराहनीय है। आज के समय में जहाँ लोग एक-दूसरे की मदद करने से कतराते हैं, वहाँ जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज बिना किसी भेदभाव के हज़ारों परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं।
वास्तव में, केवल संत रामपाल जी महाराज ही वह पूर्ण संत हैं जो धरातल पर कलयुग में सतयुग जैसा वातावरण तैयार कर रहे हैं। उनके द्वारा दी जा रही यह निस्वार्थ सेवा और उनके साथ आता इतना बड़ा जनसमूह इस बात का प्रमाण है कि मानवता की असली सेवा का फल अलौकिक है। समाज के हर व्यक्ति को ऐसी महान मुहिम का समर्थन करना चाहिए और संत जी के महान विचारों से जुड़कर अपने जीवन का कल्याण करना चाहिए।

