हमारे समाज में ऐसे असंख्य परिवार हैं, जिनकी पीड़ा रोज हमारी आंखों के सामने होती है, लेकिन हम उसे देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। उत्तर प्रदेश के जिला लखीमपुर खीरी के कुर्रा गांव में रहने वाला गंगाराम का परिवार इसी कड़वी सच्चाई का प्रतीक था। गंगाराम दोनों आंखों से पूरी तरह दृष्टिहीन हैं। उनके पास न खेती है, न मजदूरी करने की क्षमता और न ही आय का कोई स्थायी साधन।
परिवार में पत्नी और चार छोटे बच्चे हैं। सुलेना ने बताया कि परिवार का गुजारा भीख मांगकर होता था। कई बार हालात ऐसे हो जाते थे कि बच्चों को सिर्फ पानी पिलाकर सुलाना पड़ता था। बच्चों के पैरों में चप्पल नहीं, तन पर पूरे कपड़े नहीं और सिर पर पक्की छत नहीं थी। एक बच्ची गंभीर रूप से बीमार है, लेकिन इलाज के लिए पैसे नहीं थे। कच्चे, जर्जर घर में बारिश के पानी से बचना भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी।
जब संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची पीड़ा
इस असहाय परिवार की जानकारी जब संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों तक पहुंची, तो उन्होंने बिना किसी देरी के अन्नपूर्णा मुहीम के तहत सहायता पहुंचाने का निर्णय लिया। संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य स्पष्ट है—इस समाज में कोई भी व्यक्ति भूखा, नंगा और बेसहारा न रहे। इसी मानवीय सोच के साथ उनके शिष्य कुर्रा गांव पहुंचे और परिवार की स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।
अन्नपूर्णा मुहिम के तहत प्रदान की गई सहायता
संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा और आशीर्वाद से परिवार को निम्नलिखित सामग्री पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की गई:
| क्रमांक | सामग्री का नाम | मात्रा / विवरण |
| 1 | आटा | 20 किलोग्राम |
| 2 | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3 | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 4 | आलू | 5 किलोग्राम |
| 5 | प्याज | 5 किलोग्राम |
| 6 | सरसों का तेल | 1 लीटर (उच्च गुणवत्ता) |
| 7 | देसी घी | 1 किलोग्राम |
| 8 | दाल (मूंग और चना) | 1–1 किलोग्राम |
| 9 | मसाले (हल्दी, मिर्च, जीरा) | पूर्ण पैकेट |
| 10 | चाय पत्ती | 1 किलोग्राम |
| 11 | अमूल सूखा दूध | 1 किलोग्राम |
| 12 | नमक | 1 किलोग्राम |
| 13 | अचार | 500 ग्राम |
| 14 | साबुन (नहाने व कपड़े धोने) | 4 नहाने के, 1 पैकेट कपड़े धोने का |
| 15 | डिटर्जेंट पाउडर | घड़ी (बड़ा पैकेट) |
| 16 | त्रिपाल (Tarpaulin) | घर की छत ढकने हेतु |
यह सहायता केवल एक दिन या एक माह की नहीं है। संत रामपाल जी महारज के निर्देशानुसार, जब तक परिवार में कोई कमाने योग्य सदस्य नहीं बन जाता, तब तक आवश्यकता अनुसार यह सामग्री निरंतर उपलब्ध कराई जाएगी।
परिवार की भावनात्मक प्रतिक्रिया
राशन और आवश्यक सामग्री पाकर गंगाराम और उनका परिवार भावुक हो उठा। गंगाराम ने कहा कि अब उन्हें यह डर नहीं रहेगा कि बच्चे भूखे सोएंगे। गंगाराम की पत्नी सुलेना ने बताया कि पहली बार किसी ने बिना भेदभाव उनके हालत को समझा और सम्मान के साथ मदद की। बच्चों के चेहरों पर राहत और सुरक्षा का भाव साफ दिखाई दे रहा था।
पड़ोसियों और ग्रामीणों की राय
गांव के लोगों ने भी इस सेवा की खुले दिल से सराहना की। ग्रामीणों का कहना था कि वर्षों में पहली बार किसी ने इस परिवार की सुध ली। बारिश के बीच भी संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों का सहायता सामग्री लेकर पहुंचना यह साबित करता है कि यह सेवा केवल दिखावा नहीं, बल्कि सच्ची इंसानियत का उदाहरण है।
अन्नपूर्णा मुहिम का उद्देश्य और सामाजिक संदेश
संत रामपाल जी महाराज द्वारा अन्नपूर्णा मुहिम पूरे देश में चलाई जा रही है। इस मुहिम का उद्देश्य केवल पेट भरना नहीं, बल्कि एक नशामुक्त, स्वस्थ और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करना है। इसलिए राहत पाने वाले परिवारों से नशा और मांसाहार त्यागने का संकल्प भी लिया जाता है।
इसके साथ ही, जिन गरीब बच्चों के पास स्कूल ड्रेस, किताबें या अन्य शैक्षिक सामग्री नहीं होती, उन्हें संत रामपाल जी महाराज की ओर से निःशुल्क सामान उपलब्ध कराया जाता है।
इंसानियत की मिसाल बनती अन्नपूर्णा मुहिम
कुर्रा गांव का यह परिवार आज भी संघर्ष के रास्ते पर है, लेकिन अब वे अकेले नहीं हैं। अब उनके पास सिर्फ राशन नहीं, बल्कि यह भरोसा है कि कोई है जो समय पर उनकी पीड़ा को समझता है। अन्नपूर्णा मुहीम के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज ने यह सिद्ध किया है कि सच्चा संत वही है, जो भूखे को भोजन, नंगे को वस्त्र और असहाय को सम्मान प्रदान करे।

