पंजाब: रेतगढ़ में संत रामपाल जी महाराज ने गरीब परिवार को दिया सहारा

पंजाब के जिला संगरूर, गांव रेतगढ़ में एक अत्यंत गरीब परिवार को संत रामपाल जी महाराज ने राशन सहायता प्रदान की

पंजाब के जिला संगरूर के अंतर्गत आने वाले गांव रेतगढ़ में मानवता की एक ऐसी हृदयविदारक स्थिति सामने आई, जहाँ एक पूरा परिवार बीमारी और भुखमरी की कगार पर खड़ा था। प्यारा सिंह का यह परिवार, जिसमें उनकी पत्नी और दो युवा बेटे शामिल हैं, पिछले कई वर्षों से अत्यंत कष्टकारी जीवन व्यतीत कर रहा था। घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उनके पास पक्की छत तो दूर, दो वक्त की रोटी का भी प्रबंध नहीं था। ऐसी विषम परिस्थिति में जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज ने अपनी असीम अनुकंपा से इस परिवार का हाथ थामा और उन्हें अंधकार से बाहर निकाला।

मुख्य बिंदु:

  • स्थान और लाभार्थी: पंजाब के जिला संगरूर, तहसील सुनाम के अंतर्गत आने वाले गांव रेतगढ़ में रहने वाले प्यारा सिंह के परिवार को संत रामपाल जी महाराज की ओर से विशेष सहायता पहुँचाई गई।
  • अत्यंत दयनीय स्थिति: परिवार के चारों सदस्य गंभीर शारीरिक और मानसिक कष्टों से जूझ रहे हैं। घर की स्थिति इतनी खराब है कि कच्ची छत, टूटी दीवारें और जमीन से 2 फुट नीचे कमरा होने के कारण बरसात का पानी घर में भर जाता है।
  • बीमारियों का विवरण: प्यारा सिंह (मुखिया) का हर्निया का ऑपरेशन हुआ है, उनकी पत्नी पाइप के कैंसर से पीड़ित हैं, और उनके दोनों युवा बेटे मानसिक रूप से अस्वस्थ (बेसुध) हैं, जिसके कारण घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा।
  • अन्नपूर्णा मुहिम के तहत सहायता: संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में सेवादारों ने परिवार को 21 प्रकार की राशन सामग्री प्रदान की, जिसमें 25 किलो आटा, 5 किलो चावल, 4 किलो चीनी, दालें, तेल, सब्जियां और दैनिक उपयोग के मसाले व साबुन शामिल हैं।
  • निरंतर सेवा का संकल्प: परिवार को एक विशेष संपर्क कार्ड दिया गया है। महाराज जी का आदेश है कि राशन खत्म होने से 2 दिन पहले सूचित करने पर अगली किट तुरंत उनके घर पहुँचा दी जाएगी।
  • नशा मुक्ति और शाकाहार की शर्त: इस मानवीय सेवा का लाभ केवल उन्हीं को मिलता है जो पूर्णतः नशा मुक्त और शाकाहारी जीवन जीने का संकल्प लेते हैं। प्यारा सिंह ने महाराज जी के चरणों में आकर अपने पुराने नशे त्याग दिए हैं।
  • समाज सुधार के अन्य कार्य: लेख में संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे अन्य परोपकारी कार्यों जैसे रक्तदान शिविर, दहेज मुक्त विवाह (रमैणी), नशा मुक्ति अभियान और वृक्षारोपण का भी उल्लेख किया गया है।
  • दिव्य अवतार के रूप में पहचान: ग्रामीणों और अनुयायियों ने संत रामपाल जी महाराज को पूर्ण परमात्मा का अवतार बताया है, जो जेल में रहते हुए भी समाज के सबसे निचले तबके की नि:स्वार्थ सेवा कर रहे हैं।

संकट की घड़ी में ग्रामीणों ने लगाई संत रामपाल जी महाराज से गुहार

गांव रेतगढ़ के निवासियों और परिवार के मुखिया प्यारा सिंह ने अपनी लाचारी को देखते हुए पूर्ण परमात्मा संत रामपाल जी महाराज के चरणों में प्रार्थना की थी। परिवार की स्थिति इतनी दयनीय थी कि घर का मुख्य द्वार तक टूटा हुआ था और शौचालय व रसोई की कोई व्यवस्था नहीं थी। प्यारा सिंह ने भावुक होकर बताया कि उनके दोनों बेटे किसी अज्ञात बाधा या जादू-टोने के कारण मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, उनकी पत्नी को पाइप का कैंसर है और वह स्वयं हर्निया के ऑपरेशन के कारण भारी काम करने में असमर्थ हैं। ग्रामीणों और परिवार की इस पुकार को सुनकर महाराज जी ने तत्काल सहायता भेजने का आदेश दिया।

परिवार की वर्तमान स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति का विवरण

इस परिवार की स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय है। प्यारा सिंह का घर जमीन स्तर से लगभग 2 फुट नीचे बना हुआ है, जिससे बरसात का पानी सीधे कमरे में भर जाता है। उनके बड़े बेटे सतपाल सिंह पूरी तरह बेसुध रहते हैं और छोटा बेटा भी मानसिक अक्षमता का शिकार है। पत्नी के कैंसर ऑपरेशन के बाद घर में भोजन पकाने वाला भी कोई नहीं बचा था। कई बार इस परिवार को दो-दो दिनों तक भूखा रहना पड़ता था, क्योंकि प्यारा सिंह मजदूरी करने की स्थिति में नहीं थे।

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संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदत्त राशन सामग्री का विवरण 

क्रम संख्यासामग्री का नाममात्रा
1आटा25 किलोग्राम
2चावल5 किलोग्राम
3चीनी4 किलोग्राम
4सरसों का तेल2 किलोग्राम
5आलू5 किलोग्राम
6प्याज5 किलोग्राम
7चाय पत्ती1 पैकेट
8नमक (टाटा)1 पैकेट
9सूखा दूध1 किलोग्राम
10अचार1 किलोग्राम
11दालें (4 प्रकार)चने, मूंग, पीली मूंग, चना दाल
12मसाले (4 प्रकार)हल्दी, मिर्च, धनिया, जीरा
13साबुन (नहाने व धोने की)गोदरेज नंबर 1, व्हील, छोकरा

नशा मुक्त और नैतिक समाज के निर्माण का संकल्प

संत रामपाल जी महाराज की यह अन्नपूर्णा मुहिम केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य समाज को बुराइयों से मुक्त करना भी है। सहायता प्राप्त करने वाले परिवार के लिए यह अनिवार्य है कि वे पूर्णतः नशा मुक्त रहें और मांस का सेवन न करें। प्यारा सिंह ने स्वीकार किया कि महाराज जी के शरण में आने के बाद उन्होंने अपने पुराने नशे त्याग दिए हैं। महाराज जी का स्पष्ट संदेश है कि यदि कोई सहायता प्राप्त करने के बाद पुनः नशा या मांसाहार करता है, तो उसकी सहायता तुरंत बंद कर दी जाएगी।

आगामी सहायता के लिए कार्ड वितरण और स्थायी व्यवस्था

महाराज जी के आदेशानुसार, सेवादारों ने परिवार को एक विशेष कार्ड प्रदान किया है। इस कार्ड पर पंजाब राज्य के सेवादारों के संपर्क सूत्र (9992600518, 9992600519) अंकित हैं। माता जी को निर्देश दिया गया है कि राशन समाप्त होने से दो दिन पूर्व इन नंबरों पर सूचित करें, ताकि महाराज जी की ओर से अगली किट समय पर पहुंचाई जा सके। यह सेवा तब तक जारी रहेगी जब तक परिवार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हो जाता।

अभावों में जी रहे परिवार के लिए मसीहा बने संत रामपाल जी महाराज

प्यारा सिंह और उनके परिवार ने भरे गले से संत रामपाल जी महाराज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “जिसका कोई नहीं होता, उसका साथ महाराज जी देते हैं।” समाज के लोग भी महाराज जी के इन कार्यों को देखकर उन्हें पूर्ण परमात्मा मान रहे हैं। जेल में रहते हुए भी जिस प्रकार महाराज जी देश के कोने-कोने में गरीबों की सुध ले रहे हैं, वह प्रमाणित करता है कि वे कोई साधारण संत नहीं बल्कि साक्षात् भगवान के अवतार हैं। उनके द्वारा संचालित दहेज मुक्त विवाह, रक्तदान शिविर और नशा मुक्ति अभियान पूरे विश्व के लिए एक मार्गदर्शक हैं।

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