आज हम आपको एक ऐसे परिवार की कहानी बता रहे हैं, जिसकी जिंदगी पिछले छह–सात वर्षों से लगातार कठिनाइयों से गुजर रही है। यह कहानी है राजकुमार जी और उनके परिवार की, जिनके जीवन में अचानक आई गंभीर बीमारी ने सब कुछ बदल दिया। राजकुमार जी पहले स्वयं मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। लेकिन लगभग छह–सात वर्ष पहले उन्हें लकवा हो गया। इस बीमारी के बाद वे न तो काम कर पाए और न ही परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाने में सक्षम रहे। घर में पत्नी और तीन बच्चे हैं, जो स्कूल जाते हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें धीरे-धीरे परिवार के लिए बेहद कठिन होती चली गईं।
राजकुमार जी की देखभाल और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके छोटे भाई राजवीर जी ने संभाली। राजवीर जी ऑटो चलाकर अपना परिवार भी चलाते और बड़े भाई के परिवार का खर्च भी उठाते। आज के दौर में, जब महंगाई लगातार बढ़ रही है, एक परिवार का खर्च चलाना ही चुनौतीपूर्ण है, ऐसे में दो परिवारों की जिम्मेदारी निभाना उनके लिए अत्यंत कठिन था।
राजवीर जी जितना कमा पाते, उसी में दोनों घरों का गुजारा चलता। लेकिन बच्चों की पढ़ाई, राशन और अन्य घरेलू खर्च पूरे करना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा था।
रहने की स्थिति भी बेहद कठिन
परिवार जिस स्थान पर रहता है, वहां की हालत भी काफी दयनीय है। दोनों परिवार एक ही जगह रहते हैं। शौचालय और स्नानघर साझा हैं और उनमें दरवाजे तक नहीं हैं। दीवारें जर्जर अवस्था में हैं। घर आंगन की तुलना में नीचे धंसा हुआ है, जिससे बरसात के समय पानी भरने का खतरा बना रहता है। रसोई और कमरे बेहद साधारण हैं। घर की स्थिति देखकर साफ समझ आता है कि यह परिवार लंबे समय से आर्थिक तंगी में जीवन बिता रहा है।
संत रामपाल जी महाराज बने सहारा
इसी कठिन समय में संत रामपाल जी महाराज ने इस जरूरतमंद परिवार की सहायता की। संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित इस मुहिम का उद्देश्य है कि कोई भी जरूरतमंद परिवार भूखा न रहे और बच्चों की पढ़ाई आर्थिक अभाव के कारण न रुके। राजकुमार जी के परिवार तक यह सहायता संत रामपाल जी महाराज ने अपनी अन्नपूर्णा मुहिम के तहत पहुंचाई। यह मदद केवल एक बार की राहत नहीं थी, बल्कि उस रोज-रोज की चिंता को कम करने वाली थी, जो परिवार को लगातार घेरे रहती थी।
परिवार को मिली सहायता
संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत इस परिवार को रोजमर्रा की जरूरत का पूरा सामान उपलब्ध कराया गया। इसमें आटा, चावल, दाल, चीनी, तेल, आलू, प्याज, दूध, मसाले, साबुन, कपड़े धोने का सामान और अन्य आवश्यक घरेलू वस्तुएं शामिल थीं।
इसके साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए किताबें और कपड़े भी दिए गए। यह सहायता परिवार के लिए बड़ी राहत बनकर आई, क्योंकि अब बच्चों की शिक्षा और घर के राशन की चिंता काफी हद तक कम हो गई।
सहायता सामग्री का विवरण
| क्रमांक | सहायता सामग्री | विवरण / उपयोग |
| 1 | आटा | परिवार के दैनिक भोजन हेतु |
| 2 | चावल | नियमित भोजन के लिए |
| 3 | दाल | पौष्टिक भोजन हेतु |
| 4 | चीनी | घरेलू उपयोग |
| 5 | खाद्य तेल | भोजन बनाने के लिए |
| 6 | आलू | सब्जी के रूप में |
| 7 | प्याज | दैनिक रसोई उपयोग |
| 8 | दूध | बच्चों के पोषण हेतु |
| 9 | मसाले | हल्दी, मिर्च, जीरा |
| 10 | नहाने का साबुन | स्वच्छता के लिए |
| 11 | कपड़े धोने का साबुन | कपड़ों की सफाई हेतु |
| 12 | कपड़े धोने का पाउडर | घरेलू उपयोग |
| 13 | बच्चों की किताबें | शिक्षा के लिए |
| 14 | बच्चों के कपड़े | पहनने हेतु |
परिवार की बात
राजकुमार जी की पत्नी ने बताया कि अब उन्हें हर दिन यह डर नहीं सताता कि बच्चों को क्या खिलाएंगे। उन्होंने कहा कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा मिली यह सहायता सिर्फ राशन तक सीमित नहीं है, बल्कि उस भरोसे की है, जिससे परिवार को आगे बढ़ने की हिम्मत मिलती है।
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राजवीर जी ने भी कहा कि इस मदद से उनका बोझ काफी हल्का हुआ है। उन्होंने पूरी कोशिश से अपने भाई के परिवार की जिम्मेदारी निभाई, लेकिन संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम से मिली सहायता ने उन्हें भी मानसिक और आर्थिक राहत दी है।
बच्चों की उम्मीदें
परिवार की बेटी निशा, जो दसवीं कक्षा में पढ़ती है, आगे चलकर शिक्षिका बनना चाहती है। उसने बताया कि पढ़ाई के लिए किताबें और जरूरी सामान मिलना बहुत जरूरी होता है। संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम के तहत मिली सहायता से उसे यह विश्वास मिला है कि उसकी पढ़ाई अब बीच में नहीं रुकेगी।
अन्नपूर्णा मुहिम का वास्तविक असर
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम ने इस परिवार की सबसे बड़ी समस्या—खाने और जरूरी सामान की कमी—को काफी हद तक दूर किया है। यह सहायता केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने परिवार को यह एहसास भी दिलाया कि वे इस संघर्ष में अकेले नहीं हैं।
एक भरोसे की शुरुआत
राजकुमार जी के परिवार को मिली यह सहायता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि संत रामपाल जी महाराज किस प्रकार अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। जहां पहले हर दिन चिंता और असमंजस था, वहां अब कुछ सुकून और भरोसा नजर आता है।
यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं है, बल्कि उन सभी परिवारों की है, जिनके लिए संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम सहारा, सम्मान और अपनापन लेकर आ रही है।


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