रुद्रपुर, उत्तराखंड: गरीबी भारत के लाखों परिवारों के लिए एक ऐसी भयावह समस्या है जो न केवल उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज करती है, बल्कि जीवन की मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रखती है। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर स्थित विवेक नगर, ट्रांजिट कैंप से सामने आई 65 वर्षीय दुर्गा देवी की कहानी, ऐसे ही दुखद जीवन की पराकाष्ठा है।
उनका जीवन भूख, बीमारी और निराशा के काले साये में घिरा हुआ था। कोरोना महामारी ने इस परिवार पर ऐसा आघात किया कि दुर्गा देवी ने अपने पति और इकलौते बेटे को हमेशा के लिए खो दिया। इस त्रासदी के बाद, उनके परिवार में सिर्फ पाँच साल की मासूम नातिन खुशी ही बची, जिसका भरण-पोषण करने वाला कोई नहीं था।
अपनी नातिन के साथ जीवन के संघर्ष में, दुर्गा देवी को कई बार फुटपाथ या खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ी। 65 वर्ष की उम्र में, जब शरीर को सहारे की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है, उन्हें लकवे (पैरालाइज़) की शिकायत हो गई। अत्यधिक सूजन और गुर्दे की समस्या ने उन्हें एक तरफ से लगभग निष्क्रिय कर दिया।
जब वे चिकित्सकों के पास गईं, तो पैसे की कमी के कारण उन्हें बताया गया कि उनके पास पैरालाइज़ की कोई दवाई नहीं है, जिसके कारण वह तीन दिन तक भूखी-प्यासी बिस्तर पर पड़ी रहीं। यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति दर्शाती है कि कैसे गरीबी एक वृद्ध और बीमार व्यक्ति को जीवन रक्षक चिकित्सा से भी वंचित कर देती है।
साँप, कीड़ों का डर और उजाड़ आवास
जीवन-यापन की अत्यंत दयनीय परिस्थितियों में, दुर्गा देवी और उनकी नातिन खुशी को किसी ने एक छोटा सा कमरा या कहें दुकान का शटर रहने के लिए दिया था, जिसका आकार मात्र 8×8 फुट था। इस संकीर्ण और असुरक्षित आवास में रहने की न तो कोई उचित व्यवस्था थी और न ही सोने के लिए कोई बिस्तर। माता जी स्वयं बताती हैं कि रात के समय उनके बिस्तर पर साँप, कीड़े और कनखजूरे जैसे विषैले जीव निकलते थे, जिससे उनकी मासूम नातिन भयभीत होकर रोती थी और वे रात भर जागने को विवश थीं।
उन्हें कभी भी स्थायी आवास नहीं मिल पाया; लोग दयावश उन्हें दो-चार महीने के लिए रख लेते थे, लेकिन बाद में किराए के विवाद या अपने परिजनों के विरोध के कारण उन्हें घर से निकाल दिया जाता था। 65 वर्ष की उम्र में उन्हें खेतों, प्लाटों और फार्मों में भटकना पड़ा, जिससे उनका जीवन एक निरंतर दुःखद यात्रा बन गया था। छोटी बच्ची खुशी भी, गरीबी के कारण, स्कूल नहीं जा पा रही थी। दो-दो, तीन-तीन दिन भूखा रहना उनके लिए एक सामान्य बात हो गई थी, और बच्ची भी अपनी दादी से कुछ मांगती नहीं थी।
मसीहा बनकर आए संत रामपाल जी महाराज
ऐसे गहन अंधकार के बीच, संत रामपाल जी महाराज एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरे। संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई गई ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ का उद्देश्य गरीबों को रोटी, कपड़ा, शिक्षा और मकान प्रदान करना है, जिसका उद्घोष है: “रोटी कपड़ा शिक्षा और मकान हर गरीब को देगा कबीर भगवान।” जब संत रामपाल जी महाराज के टीम को दुर्गा देवी की दयनीय स्थिति के बारे में जानकारी मिली, तो वे तुरंत उनकी सहायता के लिए विवेक नगर, रुद्रपुर पहुँचे।
संत रामपाल जी महराज जी ने इस 65 वर्षीय वृद्ध महिला और उनकी 5 वर्षीय नातिन को तत्काल उस असुरक्षित 8×8 फुट के कमरे से निकालकर एक सुरक्षित, स्वच्छ और आरामदायक नए आवास में अस्थायी रूप से स्थानांतरित किया। यह व्यवस्था पूर्णतः निःशुल्क है, जिसका कोई किराया या शुल्क नहीं लिया जाएगा।
जीवन की गाड़ी चलाने हेतु आवश्यक सामग्री का वितरण
संत रामपाल जी महाराज जी ने केवल आवास ही नहीं, बल्कि जीवन की बुनियादी ज़रूरतों को भी तुरंत पूरा किया। उन्हें दो महीने के लिए पर्याप्त राशन और घरेलू उपयोग की सामग्री प्रदान की गई। यह सहायता इतनी विस्तृत थी कि इसमें दैनिक उपयोग की हर छोटी-बड़ी वस्तु शामिल थी जिसका विवरण इस प्रकार है:-
| क्रम (No.) | सामग्री (Item) | मात्रा (Quantity) |
| खाद्य सामग्री | ||
| 1 | उत्तम गुणवत्ता का आटा | 15 किलोग्राम |
| 2 | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3 | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 4 | मूंग दाल | 1 किलोग्राम |
| 5 | मसूर दाल | 1 किलोग्राम |
| 6 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 7 | आलू | 5 किलोग्राम |
| 8 | प्याज | 5 किलोग्राम |
| 9 | दलिया | 1 किलोग्राम (माता जी के स्वास्थ्य को देखते हुए) |
| 10 | नमक (Salt) | 1 किलोग्राम |
| 11 | चाय पत्ती | 1 पैकेट/डिब्बा |
| 12 | धनिया पाउडर | 1 पैकेट/डिब्बा |
| 13 | हल्दी पाउडर | 1 पैकेट/डिब्बा |
| घरेलू उपकरण एवं स्वच्छता | ||
| 14 | नया गैस सिलेंडर | 1 |
| 15 | नया रेगुलेटर | 1 |
| 16 | गैस पाइप | 1 |
| 17 | नया चूल्हा | 1 (किचन के अंदर ही स्थापित किया गया) |
| 18 | डेटोल साबुन | 4 पैकेट |
| 19 | वॉशिंग साबुन | 3 |
| 20 | अतिरिक्त वॉशिंग पाउडर | 1 किलोग्राम |
आवास सुविधाएँ:- अस्थायी मकान के अंदर एक नया चारपाई (पलंग) भी दिया गया। साथ ही, अलग से बर्तन धोने के लिए सिंक, सामान रखने के लिए जगह और एक संलग्न बाथरूम की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।
संत रामपाल जी के भगतों ने स्पष्ट किया कि यह सहायता ‘परमात्मा की तरफ से’ है और इसका श्रेय पूरी तरह से संत रामपाल जी महाराज को जाता है।
आजीवन सहायता का संकल्प और भविष्य की योजनाएँ
यह मदद केवल एक बार की नहीं है, बल्कि संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत यह एक आजीवन सेवा का संकल्प है। दुर्गा देवी को आश्रम के पाँच संपर्क नंबरों वाला एक कार्ड प्रदान किया गया है, ताकि किसी भी ज़रूरत के समय वे 24 घंटे में कभी भी कॉल कर सकें और टीम तुरंत उनकी सहायता के लिए तत्पर रहे।
संत रामपाल जी महाराज जी ने भविष्य के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएँ भी जताई हैं
- शिक्षा:- नातिन खुशी की शिक्षा का पूरा खर्च (स्कूल फीस, किताबें, स्कूल बैग, ड्रेस) आजीवन संत रामपाल जी महाराज द्वारा वहन किया जाएगा।
- चिकित्सा:– दुर्गा देवी के स्वास्थ्य, विशेष रूप से लकवे और अन्य बीमारियों का इलाज और आने-जाने का सारा खर्च भी मुफ्त प्रदान किया जाएगा।
- आवास:– आगे चलकर, मुहिम के अंतर्गत, माता जी के लिए एक नया और स्थायी मकान बनाकर भी दिया जाएगा।
- दैनिक ज़रूरतें:– ठंडी के कपड़े, रजाई और घरेलू उपयोग की अन्य वस्तुएँ भी आवश्यकतानुसार उपलब्ध कराई जाएँगी।
यह सहायता केवल दुर्गा देवी के लिए नहीं है, बल्कि संत रामपाल जी महाराज ने बीड़ा उठाया है कि संसार में कोई भी असहाय गरीब भूखा नहीं सोएगा।
मुहिम की शर्त: नशामुक्त जीवन अनिवार्य
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा संचालित इस मुहिम की एक विशेष और महत्वपूर्ण शर्त है। राहत सामग्री केवल उन्हीं जरूरतमंदों को दी जाती है जो पूर्ण रूप से नशामुक्त जीवन जीते हैं और किसी भी प्रकार के मांस या अभक्ष वस्तुओं का सेवन नहीं करते। यदि कोई लाभार्थी सहायता प्राप्त करने के बाद नशा या मांसाहार करता हुआ पाया जाता है, तो उसकी सहायता तत्काल प्रभाव से बंद कर दी जाएगी। यह शर्त सुनिश्चित करती है कि भौतिक सहायता के साथ-साथ सामाजिक और आध्यात्मिक शुद्धि भी हो।
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मानवता का चमत्कार: संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत बुजुर्ग माँ के जीवन में जगाई खुशी।
दुःख और निराशा के दलदल में फँसी 65 वर्षीय दुर्गा देवी के लिए, संत रामपाल जी महाराज वास्तव में भगवान के रूप में पहुँचे हैं। माता जी की आँखों में खुशी के आँसू थे, वे शब्दों में संत रामपाल जी महाराज का धन्यवाद व्यक्त नहीं कर पाईं और कहा कि वे सातों जन्म तक उनका ऋण नहीं चुका पाएंगी। रुद्रपुर में हुआ यह वाक्य, संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के माध्यम से मानवता की सबसे बड़ी सेवा का साकार उदाहरण है।
यह दर्शाता है कि एक सच्चा संत केवल उपदेश नहीं देता, बल्कि ‘रोटी कपड़ा शिक्षा और मकान’ देकर गरीबों के जीवन को परिवर्तित करने का काम भी करता है। संत रामपाल जी महाराज इस धरा पर एक जगत के तारणहार के रूप में उभर कर आ रहे हैं, जिनकी निस्वार्थ सेवा ने एक बेसहारा परिवार को नया जीवन और सम्मान दिया है।

