कैसे संत रामपाल जी महाराज संगरूर के सुलर घराट के एक असहाय परिवार के लिए नई जिंदगी की उम्मीद बनकर पहुंचे

कैसे संत रामपाल जी महाराज संगरूर के सुलर घराट के एक असहाय परिवार के लिए नई जिंदगी की उम्मीद बनकर पहुंचे

सुलर घराट (पंजाब): आज की दुनिया में जब महँगाई, बेरोज़गारी और सामाजिक असमानता के कारण असंख्य परिवार कठिनाइयों में जी रहे हैं, ऐसे समय में संत रामपाल जी महाराज मानवता के लिए एक सच्चे शुभचिंतक के रूप में सामने आए है जो कि देखते ही बनता है। वह केवल दुखियों की पीड़ा को समझते ही नहीं, बल्कि सीधे जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुँचाकर यह सिद्ध कर रहे हैं कि सच्ची दया और सेवा वही है जो किसी के जीवन में वास्तविक सहारा बन सके। आइए इस लेख में जानते है कि कैसे संगरूर जिले के सुलर घराट गांव के एक असहाय परिवार को संत रामपाल जी महाराज ने जीने की एक नई उम्मीद दी।

परिवार की दयनीय स्थिति और जीवन की कठिनाइयाँ

संगरूर जिले के गांव सुलर घराट में एक अत्यंत गरीब परिवार रहता है जिसकी स्थिति किसी भी संवेदनशील हृदय को विचलित कर सकती है। परिवार के मुखिया की आयु 80 वर्ष से अधिक है और वे चलने-फिरने में असमर्थ हैं।

घर की हालत अत्यंत जर्जर है— सभी कमरे कमजोर हालत में है, बरसात में पानी सीधे कमरे में भर आता है, रसोई की दीवारें कमजोर हैं, बाथरूम के ऊपर छत नहीं है, और मुख्य कमरा ज़मीन से नीचे बैठा हुआ है जिससे वर्षा के दिनों में घर में पानी भरने का खतरा हमेशा बना रहता है। घर के बाहर लगी पुरानी सीढ़ी भी पूरी तरह टूट चुकी है। परिवार में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो कमाई कर सके या बुजुर्ग को सहारा दे सके।

अन्नपूर्णा मुहिम—गरीबों के लिए जीवनदान

ऐसे कठिन समय में संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम इस परिवार के लिए एक बड़ा सहारा बनकर आई है। इस मुहिम के अंतर्गत संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट नारा है—


“रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान—हर गरीब को देगा कबीर भगवान।”

इसी नारे के तहत संत रामपाल जी महाराज इतने विशाल सेवा कार्य को कर रहे है। उन्होंने इस मुहिम को जिम्मेदारी के साथ धरातल पर अंजाम दिया है और अनुशासन सहित लाभार्थी परिवारों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाई भी है और पहुंचा भी रहे है।

लाभार्थी परिवारों को कब तक लाभ मिलेगा

यह सहायता एक बार की नहीं, बल्कि आजीवन उपलब्ध कराई जाएगी, जब तक परिवार में से कोई सदस्य अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता। लाभार्थियों को एक विशेष सहायता कार्ड दिया जाता है। जब भी राशन समाप्त होने के दो दिन पहले लाभार्थी कार्ड पर दिए गए नंबरों पर संपर्क करते हैं, संत रामपाल जी महाराज की ओर से राशन पुनः उनके घर पहुँचा दिया जाता है।

कौन-कौन सी सामग्री मिली — वस्तुओं की मात्रा सहित

संत रामपाल जी महाराज द्वारा परिवार को निम्न राहत सामग्री निःशुल्क प्रदान की गई:

आटा10 किलो
चावल5 किलो
चना दाल1 किलो
हरी मूंग दाल1 किलो
मिर्च का अचारआधा किलो
सुखा दूध (Amul)1 किलो
लाल मिर्च, हल्दी, जीरा, टाटा नमकआवश्यक मात्रा में
टाटा टी की ‘अग्नि’ चाय1 पैकेट
नहाने का साबुन4 साबुन
कपड़े धोने का साबुन1 पैकेट
घड़ी डिटर्जेंट पाउडर1 पैकेट
चीनी2 किलो
सरसों का तेल1 किलो
आलू5 किलो
प्याज5 किलो

यह सामग्री किसी औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि संत रामपाल जी महाराज और भगवान कबीर साहेब की विशेष दया से जरूरतमंदों के जीवन में वास्तविक सहारा देने के उद्देश्य से दी जाती है।

जरूरतों के अनुसार अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध

राशन के अतिरिक्त संत रामपाल जी महाराज लाभार्थियों को आवश्यकतानुसार अन्य सुविधाएँ भी निःशुल्क प्रदान करते है—

  • सर्दियों के कपड़े
  • जूते-चप्पल
  • गैस सिलेंडर
  • चूल्हा
  • घर की अनिवार्य जरूरतों की सामग्री

इस परिवार के बुजुर्ग की उम्र अधिक होने और चलने-फिरने में असमर्थता को देखते हुए आगे भी आवश्यकता अनुसार सारी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।

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परिवार और पड़ोसियों की प्रतिक्रियाएँ

परिवार के बुजुर्ग गुरदेव सिंह ने भावुक होकर कहा कि उनके पास कोई सहारा नहीं है। राशन मिलने पर उन्होंने संत रामपाल जी महाराज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह संत रामपाल जी महाराज का शुक्रिया अदा करते है और मानते है कि यह सहायता उस समय पहुंची जब उनका कोई सहारा नहीं था।

पड़ोसी अमरजीत सिंह ने बताया कि यह परिवार लंबे समय से अत्यंत कठिन हालात में रह रहा है। उन्होंने कहा कि संत रामपाल जी महाराज एक बहुत महान कार्य कर रहे है, क्योंकि आज के समय में लेने वाले तो बहुत हैं, लेकिन देने वाला कोई नहीं है।

उनके अनुसार, ‘परमात्मा ही ऐसा कार्यक्रम चला सकते है, जो सच्चे मन से गरीबों की मदद करे।’

अन्नपूर्णा मुहिम—गरीबों के लिए आशा की किरण

इस मुहिम का सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत यह है कि सहायता केवल दिखावे के लिए नहीं दी जाती, न ही फोटो खिंचवाने के उद्देश्य से। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार जरूरतमंद को तब तक सहायता दी जाती है जब तक वह आत्मनिर्भर न हो जाए।

सुलर घराट का यह परिवार अनेक कठिनाइयों से जूझ रहा है, लेकिन अन्नपूर्णा मुहिम ने इनके जीवन में नई उम्मीदें जगा दी हैं। ऐसे समय में जब समाज में उपस्थित अन्य संतों ने सिर्फ गरीबों के लिए वास्तविक गरीब परिवारों तक नाम मात्र ही सहायता पहुंचाई है, संत रामपाल जी महाराज गरीबों की सेवा करके यह सिद्ध कर रहे हैं कि सच्चे संत वही हैं जो दूसरों के दर्द को महसूस करें।

विशेष सूचना

अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत राहत सामग्री केवल उन्हीं जरूरतमंदों को दी जाती है जो—

  • नशा मुक्त जीवन जीते हों
  • मांस तथा किसी भी प्रकार की अभक्ष वस्तु का सेवन न करते हों

यदि कोई लाभार्थी सहायता प्राप्त करने के बाद नशा या मांसाहार करता पाया गया, तो उसकी सहायता तुरंत बंद कर दी जाएगी।

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