मध्य प्रदेश के इंदौर जिले की सांवेर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम बलधारा में एक झकझोर देने वाली कहानी सामने आई है। एक बेसहारा विधवा मां, जो तंगहाली और मुफलिसी में अपने तीन बच्चों का पेट पालने के लिए संघर्ष कर रही थी, उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। जब समाज और सरकारी तंत्र ने अपनी आंखें मूंद लीं, तब तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ ने इस घर के अंधेरे को दूर किया। संत रामपाल जी महाराज जी के आदेश से मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट के सेवादारों ने सीधे इस परिवार के जर्जर घर तक पहुंचकर उन्हें मुफ्त राशन और दैनिक जरूरत का सारा सामान उपलब्ध करवाया।
पति की मौत, दृष्टिहीन बच्चा और मुफलिसी का दर्द
बलधारा गांव की रहने वाली कोमल नाम की इस महिला के जीवन का संघर्ष बेहद दर्दनाक है। आठ साल पहले उनके पति का देहांत हो गया था, जिसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। घर में कुल चार सदस्य हैं, जिनमें एक 15 साल का बेटा भी है जो दृष्टिहीन है और शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण चल-फिर भी नहीं सकता।
कोमल दिहाड़ी मजदूरी करके किसी तरह अपने परिवार का पेट पालती हैं। कई बार दिहाड़ी मिलती है और कई बार खाली हाथ लौटना पड़ता है। परिवार को सरकारी मदद के नाम पर केवल 600 रुपये की मामूली सहायता मिलती है, जो इतने बड़े परिवार और एक बीमार बच्चे के इलाज के लिए बिल्कुल नाकाफी है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि कई बार पड़ोसियों से आटा मांगकर बच्चों का पेट भरना पड़ता है।
घर की स्थिति यह है कि ऊपर केवल टिन का शेड लगा है। खिड़कियां और दरवाजे टूटे हुए हैं। बारिश के दिनों में घर के अंदर पानी भर जाता है और उसी टिन शेड के नीचे एक कोने में बने चूल्हे पर यह मां खाना पकाने को मजबूर है।
मुख्य बातें : अन्नपूर्णा मुहिम द्वारा प्रदान की गई राहत सामग्री

संत रामपाल जी महाराज जी ने इस परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए उनकी हर जरूरत का सामान अन्नपूर्णा मुहिम के द्वारा उनके घर पहुंचाया। इस राहत सामग्री में शामिल है:
- 25 किलो आटा और 5 किलो चावल।
- 4 किलो चीनी, आलू और प्याज।
- 1 किलो सूखा दूध।
- मूंग और चने की दाल।
- खाने के तेल की बोतल और अचार के दो डिब्बे।
- हल्दी पाउडर, मिर्ची, चाय पत्ती, नमक और जीरा।
- नहाने व कपड़े धोने का साबुन और सर्फ।
प्यासे के पास खुद चलकर आया कुआं
आमतौर पर लाचार इंसान को मदद के लिए दूसरों के दरवाजे खटखटाने पड़ते हैं, लेकिन यहां संत रामपाल जी महाराज की कृपा से कुआं खुद प्यासे के पास चलकर आया। मदद पाकर कोमल और उनकी स्कूल जाने वाली बेटी कल्पना के चेहरे पर एक नई उम्मीद की चमक आ गई।
पड़ोस में रहने वाली शिवानी सोलंकी और गांव के ही अनिल गिरी ने भी इस मुहिम की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जो काम सरकार नहीं कर पाई, वह संत रामपाल जी महाराज कर रहे हैं। अगर यह मदद नहीं आती, तो यह गरीब परिवार यूं ही घुट-घुट कर जीने को मजबूर रहता।
बच्चों की शिक्षा का जिम्मा और नशा मुक्त जीवन की शर्त
यह मदद केवल एक दिन का दिखावा नहीं है। सेवादारों ने परिवार को एक विशेष कार्ड दिया है। राशन खत्म होने से दो दिन पहले फोन करने पर, संत रामपाल जी महाराज जी के आदेश से सेवादार दोबारा सारा राशन घर पहुंचाएंगे। इसके अलावा, संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट आदेश है कि शिक्षा में पैसे की कमी आड़े नहीं आनी चाहिए। स्कूल जाने वाली बच्ची की फीस, किताबें और ड्रेस का खर्च भी आश्रम द्वारा उठाया जाएगा।
हालांकि, इस मुहिम की एक सख्त शर्त है। राहत केवल नशा मुक्त और शाकाहारी जीवन जीने वालों को मिलती है। यदि लाभार्थी भविष्य में किसी भी प्रकार का नशा या मांस का सेवन करता पाया गया, तो मदद तुरंत बंद कर दी जाएगी। यह समाज सुधार की दिशा में एक कड़ा और सकारात्मक कदम है।
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