जब जीवन में कोई संबल बाक़ी नहीं रहता, तब सही वक़्त पर मिली मदद नई शुरुआत का कारण बनती है। संत रामपाल जी महाराज ने अपनी अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से सोनीपत, हरियाणा के गांव झरोठ में रहने वाली शकुंतला देवी और उनके परिवार को जो राहत पहुंचाई है वो सेवा का अनुपम उदाहरण है। जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने स्थिति से अवगत होकर तत्काल निर्देश दिये कि वे इस जरूरतमंद परिवार तक पहुँचकर उन्हें भोजन और उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक सामग्री, साथ में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखकर मुहैया करवाएं। आइए जानते है इस विशेष मदद की अनोखी कहानी।
कठिन हालातों में गुजर-बसर करतीं ज़िंदगियां
संत रामपाल जी महाराज ने अपनी अन्नपूर्णा मुहिम के तहत शकुंतला देवी की पारिवारिक स्थिति का जायज़ा लिया। मालूम हुआ कि उनके पति का दो वर्ष पहले देहांत हो गया। जैसे ही उन्हें यह पता चला कि परिवार के पास आय का कोई नियमित और स्थाई स्रोत नहीं है, संत जी के आदेश से उनके अनुयायी तुरंत उस परिवार तक पहुँचें। शकुंतला देवी थोड़ा ऊंचा सुनती हैं, जिससे उनकी कठिनाइयाँ और बढ़ गईं। उनकी बेटी कक्षा 12वीं में पढ़ रही है। सरकारी पेंशन के लिए कई बार आवेदन करने के बावजूद बार-बार उसे अस्वीकृत कर दिया गया।
तथा उनको जब यह जानकारी मिली कि माँ-बेटी को कई बार चटनी और रोटी खाकर गुजारा पड़ता था, या भूखा भी सोना पड़ता, तब तुरंत उनके लिए पर्याप्त राशन की व्यवस्था करवाई गई।
मकान की जर्जर स्थिति का किया गया निरीक्षण
संत रामपाल जी महाराज ने अपने सेवादारों को शकुंतला देवी के मकान की स्थिति का जायज़ा लेने का निर्देश दिया। उनके अनुयायियों ने घर का निरीक्षण किया और पाया कि दीवारों में दरारें थीं और छत पर टीन की चादरें लगी हुई थीं, जिनसे बारिश के मौसम में पानी टपकता था। उन्होंने अपने अनुयायियों को निर्देश दिया कि एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि घर की स्थिति में सुधार किया जा सके। शौचालय और स्नानघर की स्थिति भी शोचनीय थी। उन्होंने इन परिस्थितियों को सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाने के सख्त निर्देश दिए।
राशन व दैनिक उपयोग की सामग्री की गई प्रदान
संत रामपाल जी महाराज ने अपनी अन्नपूर्णा मुहिम के तहत परिवार को एक महीने का पर्याप्त राशन उपलब्ध करवाया। प्रत्येक सामग्री गुणवत्ता के लिहाज से उच्च कोटि की हो, का खास ध्यान रखा गया।
| क्रम सं | सामग्री | मात्रा |
| 1. | आटा | 15 किलोग्राम |
| 2. | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3. | चीनी | 4 किलोग्राम |
| 4. | चायपत्ती | 1 पैकेट |
| 5. | सूखा दूध | 1 किलोग्राम |
| 6. | सरसों तेल | 2 लीटर |
| 7. | काले चने | 500 ग्राम |
| 8. | चना दाल | 500 ग्राम |
| 9. | पीली मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 10. | हरी मूंग दाल | 500 ग्राम |
| 11. | आचार | 1 किलोग्राम |
| 12. | हल्दी पाउडर | 150 ग्राम |
| 13. | लाल मिर्च पाउडर | 100 ग्राम |
| 14. | जीरा | 150 ग्राम |
| 15. | धनिया | 150 ग्राम |
| 16. | नमक | 1 किलोग्राम |
| 17. | आलू | 5 किलोग्राम |
| 18. | प्याज़ | 5 किलोग्राम |
| 19. | नहाने का साबुन | 1 सेट |
| 20. | कपड़ा धोने का साबुन | 1 पैकेट |
| 21. | सर्फ | 500 ग्राम |
यह सभी सामग्री संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार निःशुल्क उपलब्ध करवाई गई।
साथ ही बेटी के लिए नए कपड़े, यूनिफॉर्म, चप्पल तथा स्कूल के जूते और मोज़े भी उपलब्ध करवाए, ताकि उसकी पढ़ाई बिना किसी कठिनाई के जारी रह सके।
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उपेक्षा से सम्मान तक का सफर
परिवार में कमाने वाले मुखिया के ना रहने पर जिस आर्थिक दयनीयता का सामना शकुंतला देवी कर रही थीं वो परिचय की मोहताज नहीं। जिसके कारण समाज में उपेक्षा लाजमी है। किन्तु अन्नपूर्णा मुहिम जैसी अभूतपूर्व पहल करने वाले संत रामपाल जी महाराज जी ने उपेक्षा से सम्मान तक का जो सफर तय करवाया है वो अतुलनीय है। अपने कार्यों से उन्होंने सिद्ध कर दिया कि जिसका कोई नहीं उसका खुद भगवान होता है।
शकुंतला देवी ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज उस वक्त उनका सहारा बने, जब कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया। मां-बेटी दोनों ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत मिली मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज का हाथ जोड़कर तहे दिल से धन्यवाद व्यक्त किया।
नियमित सहायता का प्रबंध
संत रामपाल जी महाराज ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जब तक परिवार आत्मनिर्भर नहीं हो जाता, तब तक हर माह राशन उपलब्ध करवाया जाएगा।
उन्होंने ऐसी व्यवस्था भी करवाई कि राशन समाप्त होने से दो दिन पहले परिवार आश्रम को सूचना दे सके, और वे यह सुनिश्चित करते हैं कि समय पर राशन पहुँचाया जाए। जिससे कि भविष्य में कभी भी परिवार को भूखा न रहना पड़े।
नशामुक्त और शाकाहारी जीवन की शर्त
संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत यह नियम बनाया है कि सहायता केवल उन परिवारों को दी जाए जो नशा और मांसाहार से दूर रहें।
एक अनुशासित और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए उन्होंने इस नियम को लागू किया। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई व्यक्ति इस शर्त का उल्लंघन करता है, तो उसकी सहायता तत्काल प्रभाव से रोक दी जाएगी।
समाज व युग परिवर्तन की व्यापक मुहिम
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के मार्गदर्शन में चल रही अन्नपूर्णा मुहिम के साथ-साथ दहेज मुक्त विवाह (रमैनी), रक्तदान शिविर, निःशुल्क नेत्र जांच केंद्र, देहदान जागरूकता और वृक्षारोपण जैसे अनेक सामाजिक कार्य निरंतर प्रगति पर हैं।
प्राकृतिक आपदाओं के समय भी उन्होंने मानवता की मिसाल पेश करते हुए बाढ़ से प्रभावित हजारों किसान भाइयों को करोड़ों रुपये की मोटर और पाइप प्रदान कर बड़ी सहायता की। सोनीपत के झरोठ गांव में की गई यह सेवा उनके द्वारा चलाए जा रहे व्यापक समाज सुधार अभियान की केवल एक झलक है, जो समाज में करुणा, सहयोग और मानवता के नए मानदंड स्थापित कर रहा है।

