हरियाणा के चम्मू कलां में एक परिवार के असहाय मुखिया ने भावुक होकर क्यों माना संत रामपाल जी को भगवान

हरियाणा के चम्मू कलां में एक परिवार के असहाय मुखिया ने भावुक होकर क्यों माना संत रामपाल जी को भगवान

चम्मू कलां (हरियाणा): गरीबी का दर्द वही समझ सकता है जिसके घर में रोज़ की जरूरतें पूरी करने का भी साधन न बचे। लेकिन जब हालात इतने बदतर हो जाएँ कि घर का मुखिया बिस्तर पर पड़ जाए, बेटी की नज़र कमजोर हो जाए और घर के नाम पर सिर्फ टूटी टीन-शेड बची हो, तब इंसान की उम्मीदें भी टूट जाती हैं। 

मगर कहते हैं कि जब चारों तरफ से रास्ते बंद हो जाते हैं, तब परमात्मा किसी न किसी रूप में सहारा भेज ही देते हैं। ऐसे ही सहारे के रूप में सामने आते हैं संत रामपाल जी महाराज, जिनकी अनंत करुणा और रहमत से शुरू की गई अन्नपूर्णा मुहिम आज देश-दुनिया में लाखों परिवारों की जिंदगी संवार रही है। आइए जानते है कैसे संत रामपाल जी महाराज ने चम्मू कलां के असहाय परिवार को पूरी तरह से अपनाकर उनकी जिंदगी में एक नई किरण का प्रकाश किया।

परिवार की लाचार हालत: टूटी टांगें और धुंधली आँखें बता रहे थी बेबसी

हरियाणा के कुरूक्षेत्र के चम्मू कलां गांव में मनजीत कौर जी और उनका परिवार गरीबी के उस अंधकार से घिरे हुए थे जहां से उन्हें कोई भी मदद की रोशनी नहीं दिखाई दे रही थी। उनके परिवार में उनके पति और उनकी बेटी गुरमीत कौर है।

इस परिवार की परिस्थिति ऐसी है कि मनजीत कौर जी के पति जी का पैर 12 साल पहले टूट गया। जब डाक्टर को पैर दिखाया गया तो डॉक्टर ने पैर का ऑपरेशन बोल दिया तब उनके पैर का तीन बार ऑपरेशन हुआ और उनका पैर 3 इंच छोटा हो गया पर ठीक नहीं हुआ और अब पैसे के अभाव के कारण उनका इलाज भी नहीं हो रहा है। बस पेंशन की पैसों की बदौलत कुछ दवाइयां आ जाती है। 

बेटी की आंखों की नाजुक स्थिति

उनकी बेटी गुरमीत कौर जो अपने पिता जी के पैर टुट जाने के बाद सिलाई का काम करके घर तथा खान-पान की जरूरत को पूरा करती थी। लेकिन ज़्यादा सिलाई का काम करने से उनकी बेटी की आंखें कमजोर हो गई जिससे उनकी सिलाई का काम भी बंद हो गया और उसके साथ ही एक मात्र आमदनी का साधन भी। 

घर की हालात इतने कमजोर थे कि उनके पास अपनी बेटी की आंखों के चश्मे के लिए पैसे भी नहीं थे। बेटी का सिलाई का काम बंद होने के बाद स्थिति इतनी खराब हो गई कि घर में खाने के लाले पड़ गए। मनजीत जी बतलाती है कि अगर कोई पड़ोसी खाना दे जाता तो खा लेते थे अन्यथा भूखे रहना पड़ता था।

इस अंधेरे में आशा की किरण बनकर पहुंचे संत रामपाल जी महाराज 

इस परिवार की लाचारी जब सामने आई तो उन्हें उम्मीद की किरण मिली तो सिर्फ संत रामपाल जी महाराज के द्वारा चलाई गई अन्नपूर्णा मुहिम से। वह सदैव गरीब तथा पीड़ितों की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं, चाहे स्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार, मनजीत कौर जी के घर तत्काल राहत पहुंचाई गई। संत जी के द्वारा पहुंचाई गई राहत सामग्री ने उन्हें एक सही जीने की राह और सम्मानात्मक जीवन प्रदान किया।

प्रदान की गई सामग्री का विवरण

संत रामपाल जी महाराज की ओर से परिवार को उच्च गुणवत्ता वाली निम्नलिखित सामग्री दी गई:

सामग्रीमात्रा
आटा 15 किलो
चावल 5 किलो
चीनी 2 किलो
चाय 1 पैकेट (250 ग्राम)
सूखा दूध 1 पैकेट
नमक 1 किलो
तेल1 लीटर
मिर्च पाउडर 1 पैकेट
हल्दी पाउडर 1 पैकेट
चना दाल 1 किलो
मूंग दाल 1 किलो
आलू 5 किलो
प्याज़ 5 किलो
सर्फ 1 पैकेट (500 ग्राम)
बर्तन धोने का साबुन 2 पीस 
कपड़ा धोने का साबुन 1 पैकेट
नहाने का साबुन 1 सेट (4 पीस)

भविष्य में भी सहायता करने की पहल

संत रामपाल जी महाराज जी महाराज द्वारा मनजीत कौर और उनके परिवार को दी गई ये मदद केवल एक बार के लिए सीमित नहीं है बल्कि संत रामपाल जी महाराज जी के द्वारा मनजीत कौर जी को आश्वासन दिया गया कि जब तक उनका परिवार आत्मनिर्भर नहीं हो जाता तब तक संत रामपाल जी महाराज जी की अन्नपूर्णा मुहिम के द्वारा हर महीने घर बैठे राशन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए परिवार को संपर्क सूत्र के रूप में कुछ मोबाइल नंबर दिए गए है, जिनको उन्होंने राशन खत्म होने से 2 या 3 दिन पहले संपर्क करना है।

चिकित्सा का भी रखा गया विशेष ध्यान

मनजीत कौर जी का परिवार जो कि गरीबी के साथ-साथ बीमारी की दोहरी मार भी झेल रहा था। उनके पति जिनका पैर टूट गया था जिसके कारण वह ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे उन्होंने संत रामपाल जी महाराज जी से बैसाखी की मांग की जिसकी सहायता से वे चल फिर सके। 

मनजीत कौर जी की बेटी गुरमीत कौर जिनकी नजर कमजोर हो गई थी पर आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे अपने आंखों के लिए चश्मा नहीं ले पा रही थी। उन्होंने संत रामपाल जी महाराज जी से एक चश्में की मांग की जिसपर सेवादारों द्वारा बतलाया कि संत रामपाल जी महाराज जी के आदेशानुसार उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा।

लाभार्थी के लिए विशेष सूचना

संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित इस मुहिम के अंतर्गत सहायता केवल उन्हीं परिवारों को दी जाती है जहां परिवार का प्रत्येक सदस्य नशा तथा मांस जैसी अभक्ष्य पदार्थ का सेवन‌ नहीं करता हो। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार यदि अन्नपूर्णा मुहिम से राहत प्राप्त करता व्यक्ति या परिवार नशीली वस्तुओं एवं मांस का सेवन करता पाया गया, तो उनकी सेवा रोक दी जाएगी।

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मानव समाज के लिए प्रेरणादायक पहल 

संत रामपाल जी महाराज द्वारा मानव समाज के कल्याण के लिए और भी कई पहल की गई है:-

  • दहेज मुक्त विवाह 
  • नशा मुक्त समाज 
  • रक्तदान तथा देहदान शिविर 
  • वृक्षारोपण 
  • बाढ़ राहत सेवा
  • निःशुल्क दंत तथा नेत्र जांच 

मानवता का असली स्वरूप — संत रामपाल जी महाराज

आज स्वयं को सामाजिक कार्यकर्ता कहने वाले कई लोग केवल दिखावा करते हैं, मदद नाम मात्र की होती है। लेकिन संत रामपाल जी महाराज की विशेषता यह है कि वे बिना भेदभाव, बिना दिखावे, बिना प्रचार सिर्फ मानवता के लिए कार्य करते हैं। यह परिवार इसका जीवंत प्रमाण है कि वास्तव में दया क्या होती है, करुणा क्या होती है, और मानवता किसे कहते हैं।

धरातल पर केवल एक मात्र सच्चे संत ही ऐसे असंभव काम करके अपने बच्चों को ढूंढ लेते है जैसे संत रामपाल जी महाराज ने मनजीत कौर के परिवार को खोजा। संत रामपाल जी महाराज के द्वारा किया गया यह अद्भुत उपकार हमेशा के लिए गांववासियों और दुनिया वालो के हृदय पर एक अनोखी छाप छोड़ गया है।

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