रोहतक जिले के गांव सुनारिया खुर्द में संत रामपाल जी महाराज की अपार कृपा से अंजलि और उनके चार बच्चों को मिला जीवनदान

रोहतक जिले के गांव सुनारिया खुर्द में संत रामपाल जी महाराज की अपार कृपा से अंजलि और उनके चार बच्चों को मिला जीवनदान

सुनारिया खुर्द, हरियाणा: समाज में जब विपदा और गरीबी का अंधकार किसी परिवार को घेर लेता है, तब मानवता के सच्चे रक्षक ही उस अंधकार को दूर करने का साहस दिखाते हैं। ऐसी ही एक हृदयविदारक लेकिन उम्मीद से भरी घटना हरियाणा के रोहतक जिले के गांव सुनारिया खुर्द से सामने आई है। यहाँ एक बेसहारा विधवा बहन अंजलि अपने चार मासूम बच्चों के साथ अत्यंत दयनीय स्थिति में जीवन यापन कर रही थी, लेकिन अब संत रामपाल जी महाराज उनके लिए एक मसीहा बनकर उभरे हैं।

गांव सुनारिया खुर्द में रहने वाली अंजलि की दुखभरी कहानी 

गांव सुनारिया खुर्द में रहने वाली अंजलि के पति का देहांत लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व हो गया था। पति की मृत्यु के बाद, परिवार की पूरी जिम्मेदारी अंजलि के कंधों पर आ गई। वह एक फैक्ट्री में मजदूरी करके किसी तरह अपने चार बच्चों का पेट पाल रही थी, लेकिन महंगाई और गरीबी के कारण उन्हें दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो रहा था। उनका घर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है, जो मात्र एक कमरे का बना हुआ है।

इसी एक कमरे में पूरा परिवार रहता है और यहीं खाना बनाने के लिए मजबूर है। घर की हालत इतनी खस्ताहाल है कि छत को रोकने के लिए बांस और लकड़ी का सहारा (जिसे स्थानीय भाषा में ‘ठहर’ कहा जाता है) दिया गया है। दीवारों से प्लास्टर पूरी तरह झड़ चुका है और ईंटों के बीच से आर-पार रोशनी दिखाई देती है, जो इस बात का प्रमाण है कि यह घर किसी भी मौसम की मार झेलने में सक्षम नहीं है।

घर के दरवाजे टूटे हुए हैं और सुरक्षा के नाम पर केवल एक लकड़ी का गेट है। खिड़कियां बिना दरवाजों की हैं। शौचालय और स्नानघर की कोई उचित व्यवस्था नहीं है; दीवार के एक कोने में ईंटों की आड़ लेकर परिवार ने किसी तरह स्नान की व्यवस्था कर रखी है। बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है क्योंकि आधार कार्ड जैसे आवश्यक दस्तावेज न होने के कारण वे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ऐसी विकट परिस्थितियों में, जब कोई भी सरकारी योजना या रिश्तेदार इस परिवार के काम नहीं आया, तब संत रामपाल जी महाराज ने इस परिवार का हाथ थामा।

ग्रामीण किस प्रकार सहायता के लिए संत रामपाल जी महाराज तक पहुंचते हैं

संत रामपाल जी महाराज की कार्यप्रणाली केवल आश्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज के हर कोने में सक्रिय रूप से जरूरतमंदों की तलाश कर रहे हैं। इस मामले में, सुनारिया गांव के निवासी और संत रामपाल जी महाराज के शिष्य साधु राम ने इस परिवार की दयनीय स्थिति को देखा। उन्होंने देखा कि परिवार के मुखिया की मृत्यु हो चुकी है और बच्चे कई बार भूखे पेट सोने को मजबूर हैं। मकान भी दूसरे के प्लॉट में बना हुआ है और रहने के लायक नहीं है।

जब यह जानकारी संत रामपाल जी महाराज के संज्ञान में लाई गई, तो उन्होंने तुरंत सहायता के आदेश दिए। यह प्रक्रिया दिखाती है कि संत रामपाल जी महाराज सदा ही जनकल्याण में लगे रहते है। संत रामपाल जी महाराज के आदेश पर उनके अनुयायी गांव-गांव और शहर-शहर जाकर ऐसे परिवारों को चिन्हित करते हैं जिन्हें वास्तव में मदद की आवश्यकता है।

इसके बाद, बिना किसी भेदभाव के, संत रामपाल जी महाराज की ओर से सहायता सामग्री सीधे पीड़ित परिवार के घर तक पहुंचाई जाती है। यह सहायता केवल एक बार की नहीं होती, बल्कि परिवार को एक ‘सहायता कार्ड’ दिया जाता है, जिसके माध्यम से वे भविष्य में भी अपनी जरूरत का सामान प्राप्त कर सकते हैं। यह सुनिश्चित किया जाता है कि जब तक परिवार अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता, तब तक संत रामपाल जी महाराज उनकी देखभाल करेंगे।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई राहत सामग्री का विवरण

संत रामपाल जी महाराज ने अंजलि के परिवार की तत्काल जरूरतों को समझते हुए व्यापक स्तर पर खाद्य और घरेलू सामग्री उपलब्ध कराई है। प्रदान की गई सामग्री का विवरण निम्नलिखित तालिका में दिया गया है:

क्रमांकवस्तु का नाममात्रा/विवरण
1आटा25 किलोग्राम
2चावल5 किलोग्राम
3चना दाल½ किलो
4हरी मूंग दाल½ किलो
5प्याज5 किलोग्राम
6आलू5 किलोग्राम
7अचार1 किलोग्राम
8खाद्य तेल1 किलोग्राम
9हल्दी1 पैकेट
10जीरा1 पैकेट
11नमक1 किलो
12चीनी2 किलो
13सर्फ (कपड़े धोने का पाउडर)½ किलो
14साबुन4 पीस
15दूध1 किलो

यह सूची दर्शाती है कि संत रामपाल जी महाराज ने केवल पेट भरने का नहीं, बल्कि एक गृहस्थी को सुचारू रूप से चलाने का पूरा प्रबंध किया है।

जीवन भर सहयोग और पुनर्वास का संकल्प

संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी जाने वाली सहायता की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निरंतरता है। जैसा कि उनके शिष्य साधु राम ने बताया, यह मदद केवल एक बार राशन देकर फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं है। परिवार को स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया गया है कि जब तक अंजलि के बच्चे बड़े होकर कमाने लायक नहीं हो जाते या परिवार किसी अन्य तरीके से आत्मनिर्भर नहीं हो जाता, तब तक संत रामपाल जी महाराज उनका भरण-पोषण करेंगे। चाहे इसमें 20 साल लगें या पूरा जीवन, संत रामपाल जी महाराज ने इस परिवार को गोद ले लिया है।

संत रामपाल जी महाराज का नारा है—

“रोटी, कपड़ा, शिक्षा और मकान, हर गरीब को देगा कबीर भगवान।”

इसी सिद्धांत का पालन करते हुए, रोहतक जिले के आसपास के कई गांवों जैसे बालंद, कबूलपुर आदि में भी कई परिवारों को संत रामपाल जी महाराज द्वारा गोद लिया गया है। जिन परिवारों के पास छत नहीं थी, उन्हें संत रामपाल जी महाराज ने पक्के मकान बनाकर दिए हैं। इसके अलावा, बेटियों की शिक्षा, स्कूल की फीस, कपड़े, जूते और बस्ते का खर्च भी संत रामपाल जी महाराज वहन कर रहे हैं।

नशा मुक्त समाज का निर्माण

संत रामपाल जी महाराज केवल आर्थिक सहायता ही नहीं कर रहे, बल्कि एक स्वस्थ और नैतिक समाज का निर्माण भी कर रहे हैं। सहायता प्राप्त करने के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं, जो समाज सुधार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम हैं। राहत सामग्री केवल उन्हीं व्यक्तियों को दी जाती है जो पूर्ण रूप से नशा मुक्त जीवन जीते हैं और मांस अथवा किसी भी प्रकार की अभक्ष वस्तुओं का सेवन नहीं करते। यदि कोई लाभार्थी नशा करता है, तो उसे सहायता प्राप्त करने से पहले इन बुराइयों को त्यागना अनिवार्य होता है।

यह शर्त समाज से कुरीतियों को मिटाने का एक सशक्त माध्यम है। संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं के कारण आज हजारों परिवार नशा जैसी सामाजिक बुराइयों से मुक्त हो चुके हैं।

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ग्रामीणों और लाभार्थियों की प्रतिक्रिया

गांव सुनारिया खुर्द के अन्य निवासियों ने भी संत रामपाल जी महाराज के इस कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। एक पड़ोसी ग्रामीण ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी किसी को इस प्रकार निस्वार्थ भाव से मदद करते नहीं देखा। उन्होंने कहा कि अंजलि का पति गुजर चुका है और घर में कोई कमाने वाला नहीं था, ऐसे में संत रामपाल जी महाराज की यह मदद उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। 

स्वयं लाभार्थी अंजलि ने भावुक होकर संत रामपाल जी महाराज का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस सहायता से उन्हें बहुत बड़ा सहारा मिला है। उन्होंने बताया कि उन्हें एक कार्ड दिया गया है और कहा गया है कि जब भी किसी सामान की जरूरत हो, वे फोन कर सकती हैं और सामान उनके घर पहुंचा दिया जाएगा। अंजलि के शब्दों में कृतज्ञता और राहत स्पष्ट दिखाई दे रही थी।

संत रामपाल जी महाराज: मानवता के सच्चे रक्षक और युग प्रवर्तक

रोहतक के सुनारिया खुर्द गांव की यह घटना सिद्ध करती है कि संत रामपाल जी महाराज केवल एक आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि मानवता के सच्चे रक्षक हैं। आज जब सरकारी योजनाएं भी कई बार लालफीताशाही का शिकार हो जाती हैं, तब संत रामपाल जी महाराज की त्वरित और प्रभावी सहायता प्रणाली गरीबों के लिए संजीवनी का काम कर रही है। हिसार जेल में रहते हुए भी उनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन में समाज सेवा के जो कार्य चल रहे हैं, वह अद्वितीय है।

संत रामपाल जी महाराज ने धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखकर उसे मानव सेवा का पर्याय बना दिया है। भूखों को भोजन, बेघरों को छत, और असहायों को सहारा देकर वे कलयुग में एक नई सभ्यता की नींव रख रहे हैं। उनकी यह पहल न केवल अंजलि जैसे हजारों परिवारों का पेट भर रही है, बल्कि समाज को दया, करुणा और सहयोग का पाठ भी पढ़ा रही है। निस्संदेह, संत रामपाल जी महाराज का यह योगदान इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा और पीढ़ियों तक मानवता को प्रेरित करता रहेगा।

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