अमृतसर (पंजाब): समाज में अक्सर देखा जाता है कि जब किसी परिवार पर विपत्ति का पहाड़ टूटता है, तो अपने भी मुंह मोड़ लेते हैं। एक विधवा मां के लिए अपने बच्चों का पेट भरना और उन्हें सम्मानजनक जीवन देना किसी युद्ध से कम नहीं होता। लेकिन, घोर कलयुग के इस दौर में मानवता अभी जिंदा है। संत रामपाल जी महाराज ऐसे ही हजारों बेसहारा परिवारों के लिए मसीहा बनकर उभरे हैं। उनकी अनूठी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ ने अमृतसर के गुरुनाम नगर में एक विधवा महिला जीवन जीने का नया हौसला प्रदान किया है।
एक माँ का संघर्ष और तंगहाली का जीवन
यह कहानी है गुरुनाम नगर, अमृतसर की रहने वाली पूनम और उनके दो बेटों की। पूनम के जीवन में दुखों का अंधेरा तब छा गया जब एक साल पहले उनके पति का निधन हो गया। पति की मृत्यु के बाद, घर की सारी जिम्मेदारी पूनम के कंधों पर आ गई।
पूनम का परिवार एक छोटे से मकान में रहता है, जहाँ जगह के नाम पर केवल एक कमरा और एक कोने में बनी छोटी सी रसोई है। यद्यपि घर में अन्य रिश्तेदार (जेठ आदि) भी रहते हैं, लेकिन पूनम अपने बच्चों के साथ ऊपरी हिस्से में सीमित संसाधनों में गुजर-बसर करने को मजबूर थीं। आय का कोई ठोस साधन न होने के कारण, वह केवल विधवा पेंशन और बच्चों की सरकारी सहायता के सहारे दिन काट रही थीं। कई बार स्थिति ऐसी हो जाती थी कि दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी भारी पड़ जाता था।
संत रामपाल जी महाराज ने भेजी ‘मदद की सौगात’
पूनम की इस दयनीय स्थिति की जानकारी जब संत रामपाल जी महाराज के संज्ञान में आई, तो उन्होंने तत्काल प्रभाव से उस परिवार तक मदद पहुँचाई। संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य केवल पेट भरना नहीं, बल्कि
“रोटी, कपड़ा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान, हर जरूरतमंद को दे रहा कबीर भगवान।”
के नारे को चरितार्थ करना है। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार, उनके अनुयायी राशन से भरी गाड़ी लेकर पूनम के घर पहुँचे।
गुणवत्ता ऐसी जो अमीर भी सोचें: मिली भरपूर सामग्री
संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई राहत सामग्री की गुणवत्ता यह साबित करती है कि वे गरीबों को भी वीआईपी (VIP) दर्जा देते हैं। पूनम के परिवार को जो राशन दिया गया, उसमें शामिल हर वस्तु उच्च गुणवत्ता (Branded) वाली थी:
| क्र.सं. | सामग्री | मात्रा |
| 1 | आटा | 15 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | चीनी | 2 किलो |
| 4 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 5 | चना दाल | 1 किलो |
| 6 | हरी मूंग दाल | 1 किलो |
| 7 | हल्दी | 150 ग्राम |
| 8 | जीरा | 150 ग्राम |
| 9 | लाल मिर्च | 100 ग्राम |
| 10 | नहाने का साबुन | 4 पीस |
| 11 | कपड़े धोने का साबुन | 1 किलो |
| 12 | टाटा नमक | 1 किलो |
| 13 | टाटा चाय | 250 ग्राम |
| 14 | मिल्क पाउडर (सूखा दूध) | 1 किलो |
| 15 | आलू | 5 किलो |
| 16 | प्याज | 5 किलो |
| 17 | अचार | 1 किलो |
| 18 | वाशिंग पाउडर | ½ किलो |
| 19 | धनिया पाउडर | 100 ग्राम |
| 20 | बेसन | 0.5 किलो |
| 21 | दलिया | 1 किलो |
यह सामग्री पूनम के परिवार के लिए लगभग महीने भर का पूरा राशन है, जिससे अब उन्हें भूखे पेट नहीं सोना पड़ेगा।
“जब तक बच्चे बड़े नहीं होते, तब तक जिम्मेदारी मेरी”
इस मुहिम की सबसे बड़ी और भावुक कर देने वाली बात संत रामपाल जी महाराज का वह वचन है, जो उन्होंने इस परिवार को दिया। यह मदद केवल एक बार की नहीं है। संत रामपाल जी महाराज ने सुनिश्चित किया है कि जब तक पूनम के बच्चे बड़े होकर अपने पैरों पर खड़े नहीं हो जाते और घर की जिम्मेदारी उठाने लायक नहीं बन जाते, तब तक आजीवन उन्हें इसी प्रकार राशन मिलता रहेगा।
परिवार को एक संपर्क कार्ड (Contact Card) दिया गया है। जैसे ही राशन खत्म होने वाला होगा, पूनम को बस एक सूचना देनी होगी, और संत रामपाल जी महाराज की व्यवस्था के तहत राशन उनके घर के दरवाजे पर पुनः उपलब्ध हो जाएगा।
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कलयुग में सतयुग की स्थापना का प्रयास
पंजाब, जिसे आज नशे का गढ़ माना जाने लगा है, वहाँ संत रामपाल जी महाराज एक नई सामाजिक और आध्यात्मिक क्रांति ला रहे हैं। जहाँ युवा नशे की गिरफ्त में हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज अपने ज्ञान से लाखों लोगों को नशामुक्त बना रहे हैं।
इस अन्नपूर्णा मुहिम के साथ एक अनिवार्य शर्त भी जुड़ी है लाभार्थी परिवार को पूर्णतः नशामुक्त और शाकाहारी होना होगा। संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट संदेश है कि मांस-मदिरा और नशा मनुष्य के पतन का कारण है। उनकी यह पहल समाज को न केवल भूख से, बल्कि बुराइयों से भी मुक्त कर रही है।
बेबसों की पुकार सुनने वाले एकमात्र
पूनम ने नम आँखों से संत रामपाल जी महाराज का कोटि-कोटि धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि आज तक किसी ने उनकी ऐसी सुध नहीं ली थी। संत रामपाल जी महाराज ने साबित कर दिया है कि सच्चा संत वही है जो दूसरों की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझे। उनके इस प्रयास से यह स्पष्ट है कि वे कलयुग में सतयुग लाने और एक स्वस्थ, शिक्षित व खुशहाल समाज के निर्माण के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
चाहे कोई परिवार उनका अनुयायी हो या न हो, संत रामपाल जी महाराज किसी के साथ भेदभाव नहीं करते; वे हर उस व्यक्ति की सेवा करते हैं जो संकट में होता है। यह घटना इस बात का सशक्त प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज एक परम संत (पूर्ण संत) हैं। वे मानव कल्याण के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुए हैं, दुःखियों के कष्ट दूर करने और बेसहारों का सहारा बनने के लिए। इस सेवा की पूरी कवरेज यहाँ देखें:


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