संत रामपाल जी महाराज कानपुर के नेत्रहीन वासुदेव और उसके परिवार के लिए मसीहा बनकर उभरे

संत रामपाल जी महाराज कानपुर के नेत्रहीन वासुदेव और उसके परिवार के लिए मसीहा बनकर उभरे 

कानपुर (उत्तर प्रदेश): समाज में आज भी एक ऐसा तबका है जिसके लिए ‘रोटी, कपड़ा और मकान‘ महज एक सपना बनकर रह गया है। गरीबी की मार झेल रहे ऐसे बेबस परिवारों के लिए एक वक्त का भोजन जुटाना भी किसी युद्ध से कम नहीं होता। जहां सरकारी योजनाएं कागजों में उलझ कर रह जाती हैं, वहां मानवता की सच्ची सेवा के लिए संत रामपाल जी महाराज एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आए हैं।

संत रामपाल जी महाराज ने समाज के ऐसे ही वंचित और पीड़ित परिवारों के दर्द को अपना दर्द समझा है और ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ की शुरुआत की है। इस महाअभियान के तहत संत रामपाल जी महाराज द्वारा गरीब, असहाय और जरूरतमंद परिवारों को न केवल राशन, बल्कि गैस सिलेंडर, कपड़े और बच्चों के लिए पुस्तकें बिल्कुल निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

नेत्रहीन पिता और पुत्री का संघर्ष: भीख मांगकर गुजरती थी जिंदगी

उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर के फजलगंज इलाके में रहने वाले वासुदेव जी और उनका परिवार गरीबी और लाचारी का ऐसा जीवन जीने को मजबूर था, जिसे सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाए। इस परिवार में कुल तीन सदस्य हैं वासुदेव जी, उनकी पत्नी और उनकी बेटी लक्ष्मी।

इस परिवार की व्यथा यह है कि घर के मुखिया वासुदेव जी और उनकी बेटी लक्ष्मी, दोनों ही नेत्रहीन (दृष्टिहीन) हैं। वासुदेव जी की पत्नी भी अक्सर बीमार रहती हैं। परिवार के पास आय का कोई साधन नहीं था। पेट भरने के लिए बुजुर्ग वासुदेव जी और उनका परिवार भीख मांगने पर निर्भर था। चिलचिलाती धूप हो या कड़कड़ाती ठंड, उन्हें अपने और परिवार के जीवित रहने के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ता था।

वासुदेव जी बताते हैं कि कई बार मांगने पर भी कुछ नहीं मिलता था, और परिवार को भूखे पेट या केवल पानी पीकर रात गुजारनी पड़ती थी। कभी-कभी घर में जो सूखा-रूखा पड़ा होता, उसी से काम चलाना पड़ता था। बेटी लक्ष्मी ने बताया कि गरीबी और माता-पिता की बीमारी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। फीस न भर पाने के कारण उनका स्कूल जाना बंद हो गया।

“आज तक केवल ठगा गया, लेकिन देने वाला कोई नहीं मिला”

वासुदेव जी ने बताया कि वे पहले निरंकारी पंथ से जुड़े थे, लेकिन जब उन पर मुसीबत आई, उनकी आंखों की रोशनी गई, तो वहां से कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। उन्होंने कहा, “हमें आज तक केवल चंदा मांगने वाले मिले, लेकिन देने वाला कोई नहीं मिला। हमारे दुख में न कोई रिश्तेदार खड़ा हुआ और न ही कोई समाज का व्यक्ति।

लेकिन, जब संत रामपाल जी महाराज को इस परिवार की दयनीय स्थिति का पता चला, तो उन्होंने तत्काल प्रभाव से इस परिवार की सुध ली।

संत रामपाल जी महाराज ने भेजी महीने भर की राहत सामग्री

संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार, उनके अनुयायियों ने वासुदेव जी के घर पहुंचकर उन्हें तत्काल राहत पहुंचाई। संत रामपाल जी महाराज द्वारा इस परिवार को एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए भरपूर राशन सामग्री उपलब्ध कराई गई है।

प्रदान की गई सामग्री का विवरण: संत रामपाल जी महाराज की ओर से मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से परिवार को उच्च गुणवत्ता वाली निम्नलिखित सामग्री भेंट की गई:

क्रम (No.)सामग्री (Item)मात्रा (Quantity)
1आटा (गेहूँ का आटा)15 किलोग्राम
2चावल5 किलोग्राम
3चने की दाल1 किलोग्राम
4मूंग की दाल1 किलोग्राम
5अमूल सूखा दूध (अमूल दूध पाउडर)1 किलोग्राम
6चीनी2 किलोग्राम
7नमक (टाटा नमक)1 किलोग्राम
8हल्दी (हल्दी पाउडर)1 पैकेट
9मिर्च (लाल मिर्च पाउडर)1 पैकेट
10धनिया (धनिया पाउडर)1 पैकेट
11ताज़ा चाय (चायपत्ती)1 पैकेट
12सरसों का तेल 1 लीटर बोतल
13नहाने का साबुन5 पीस
14कपड़े धोने का साबुन5 पीस
15आलू5 किलोग्राम
16प्याज5 किलोग्राम
17अन्य आवश्यक सब्ज़ियांआवश्यकतानुसार

आजीवन सहयोग का वचन: “अब कोई भूखा नहीं सोएगा”

इस मुहिम की सबसे विशेष बात यह है कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई यह मदद केवल एक बार के लिए नहीं है। संत रामपाल जी महाराज ने वचन दिया है कि जब तक यह परिवार स्वावलंबी नहीं हो जाता, तब तक उन्हें हर महीने घर बैठे राशन उपलब्ध कराया जाएगा। सामग्री खत्म होने से दो दिन पहले सूचित करने पर अगली रसद तुरंत पहुंचा दी जाएगी। 

इसके अतिरिक्त, परिवार को बिजली के बिल और अन्य आर्थिक संकटों से भी मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया गया है।

बेटी लक्ष्मी ने भावुक होकर कहा,

मैंने आज तक ऐसे संत नहीं देखे जो खुद गरीब के घर आकर उनका दुख पूछें। लोग तो अपनों का साथ छोड़ देते हैं, लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने हमारा हाथ तब थामा जब हमारे पास कोई उम्मीद नहीं बची थी। मेरे लिए तो वे साक्षात भगवान हैं।

शिक्षा और भविष्य की चिंता भी हुई दूर

संत रामपाल जी महाराज केवल पेट की भूख ही नहीं मिटा रहे, बल्कि भविष्य भी संवार रहे हैं। अभियान के तहत यह भी सुनिश्चित किया गया है कि आर्थिक तंगी के कारण जिन बच्चों की पढ़ाई छूट गई है, उनकी शिक्षा, ड्रेस और किताबों का खर्च भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा उठाया जाएगा। लक्ष्मी, जिसकी पढ़ाई फीस न होने के कारण छूट गई थी, अब फिर से शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी।

जेल में रहकर भी समाज का कल्याण कर रहे हैं संत

यह एक विचारणीय विषय है कि संत रामपाल जी महाराज, जो वर्तमान में जेल में हैं, वहां से भी समाज के हर दुखियारे के आंसू पोंछ रहे हैं। उनकी प्रेरणा और शक्ति से ही आज देश के कोने-कोने में ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत हजारों परिवारों को नया जीवन मिल रहा है।

रोटी, कपड़ा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान, हर जरूरतमंद को दे रहा कबीर भगवान।

संत रामपाल जी महाराज इसी वाक्य को चरितार्थ कर रहे हैं।

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