“आज बच्चों का पेट कैसे भरेगा?”
यह सवाल हरियाणा के रोहतक जिले के बखता गांव में रहने वाले कर्मवीर और उनके परिवार की रोज़मर्रा की सच्चाई बन चुका था। यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि उस समाज के उस कोने की तस्वीर है, जहां भूख और बीमारी इंसान की आवाज़ को दबा देती है।
जर्जर घर, भूखे बच्चे और लाचार पिता
कर्मवीर गांव बखता में अपने परिवार के साथ एक बेहद जर्जर मकान में रहते हैं। घर की छत जगह-जगह से टूटी हुई है, बारिश में पानी टपकता है और रहने की स्थिति किसी भी तरह सुरक्षित नहीं कही जा सकती। परिवार में पांच छोटे-छोटे बच्चे हैं। पत्नी दिन-भर गौशाला में गोबर उठाने का काम करती है, ताकि बच्चों के लिए कुछ खाने का इंतज़ाम हो सके।
कर्मवीर स्वयं गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। वे कई वर्षों से कैंसर से पीड़ित हैं। इलाज अधूरा है, दवाइयों के पैसे नहीं हैं और अब वे बिस्तर पर पड़े-पड़े अपनी आखिरी सांसों का इंतज़ार कर रहे हैं। न रिश्तेदार साथ हैं, न गांव से कोई मदद। हालत यह थी कि कई बार बच्चों को समय पर खाना तक नसीब नहीं होता था।
भूख की मार और टूटती उम्मीदें
परिवार की महिला ने बताया कि कई बार बच्चों को केवल आलू या चटनी से ही दिन गुजारना पड़ता था। दूध, चीनी, दाल जैसी चीज़ें महीनों तक घर में नहीं आती थीं। बच्चे भूख लगने पर चुपचाप बैठ जाते थे, क्योंकि मां के पास देने को कुछ नहीं होता था।
गैस सिलेंडर होते हुए भी पैसे न होने के कारण वह खाली पड़ा रहता था। बारिश में चूल्हा बुझ जाता, तो रोटी तक बनाना मुश्किल हो जाता था। बाथरूम की स्थिति इतनी खराब थी कि केवल प्लास्टिक की पन्नी से काम चलाया जा रहा था, जिसे बदलने के भी पैसे नहीं थे।
जब संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची पुकार
इसी अंधेरे और निराशा के बीच कर्मवीर के परिवार की स्थिति संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची। उन्होंने बिना किसी देरी के अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से इस परिवार की सहायता करने का निर्देश दिया। संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में उनकी टीम बखता गांव पहुंची, परिवार की वास्तविक स्थिति देखी और तुरंत राहत पहुंचाई।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता
अन्नपूर्णा मुहिम के तहत कर्मवीर के परिवार को रोज़मर्रा की ज़रूरत का पूरा राशन, कपड़े और अन्य आवश्यक सामग्री दी गई।
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परिवार को जो सामग्री दी गई, उसमें शामिल है:
| क्रमांक | सामग्री का नाम | मात्रा / विवरण |
| 1 | आटा | 20 किलोग्राम |
| 2 | चावल | 5 किलोग्राम |
| 3 | चीनी | 2 किलोग्राम |
| 4 | दाल (मूंग) | 1 किलोग्राम |
| 5 | दाल (चना) | 1 किलोग्राम |
| 6 | सरसों का तेल | 1 लीटर |
| 7 | नमक | 1 पैकेट |
| 8 | हल्दी पाउडर | 1 पैकेट |
| 9 | लाल मिर्च पाउडर | 1 पैकेट |
| 10 | जीरा | 1 पैकेट |
| 11 | अचार | 1 किलोग्राम |
| 12 | चाय पत्ती (टाटा) | 1 पैकेट |
| 13 | सूखा दूध | 2 पैकेट |
| 14 | नहाने का साबुन | 4 टिकिया |
| 15 | कपड़े धोने का साबुन | 1 पैकेट |
| 16 | कपड़े धोने का पाउडर | 1 पैकेट |
| 17 | बच्चों के कपड़े | सिलाई हेतु |
| 18 | गैस सिलेंडर | भरवाया गया |
| 19 | चारपाई | उपलब्ध कराई जाएगी |
| 20 | इलाज/दवाइयां | आवश्यकतानुसार |
इसके साथ-साथ गैस सिलेंडर तुरंत भरवाया गया और यह भी बताया गया कि भविष्य में सिलेंडर खत्म होने पर फिर से भरवाया जाएगा।
इलाज और घर की सुविधाओं का भरोसा
सिर्फ राशन ही नहीं, कर्मवीर के इलाज की जिम्मेदारी भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा ली गई है। टीम ने स्पष्ट किया कि दवाइयों और इलाज का खर्च भी अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत उठाया जाएगा।
इसके अतिरिक्त,
- चारपाई की व्यवस्था
- जर्जर बाथरूम की मरम्मत
- बच्चों की पढ़ाई के लिए किताबें, ड्रेस और जूते
भी संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार उपलब्ध कराए जाएंगे।
जीवनभर सहायता का आश्वासन
परिवार को एक संपर्क कार्ड दिया गया और बताया गया कि राशन खत्म होने से दो दिन पहले फोन करने पर नई सामग्री तुरंत पहुंचाई जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सहायता एक बार या कुछ महीनों के लिए नहीं, बल्कि तब तक जारी रहेगी जब तक परिवार पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं बन जाता—चाहे इसमें सालों क्यों न लग जाएं।
परिवार की भावनाएं
सहायता मिलने के बाद परिवार भावुक हो गया। महिला ने कहा कि अब बच्चों को भूखा सुलाने की मजबूरी नहीं रहेगी। कर्मवीर ने कमजोर आवाज़ में कहा कि जब सबने साथ छोड़ दिया, तब संत रामपाल जी महाराज उनके लिए भगवान बनकर आए। बच्चों के चेहरों पर भी राहत साफ दिखाई दे रही थी। पहली बार घर में ढंग का राशन देखकर वे मुस्कुरा रहे थे।
इंसानियत की सच्ची तस्वीर
बखता गांव की यह कहानी दिखाती है कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम केवल सहायता नहीं, बल्कि जीवन को फिर से खड़ा करने का प्रयास है। जहां समाज और रिश्ते चुप हो जाते हैं, वहां यह मुहिम भूखे बच्चों, बीमार बुजुर्गों और टूटे परिवारों के लिए सहारा बन रही है।
यह कहानी कर्मवीर के परिवार की है, लेकिन इसका संदेश उन हजारों परिवारों तक जाता है, जिनके लिए आज भी एक रोटी सबसे बड़ा सपना है—और जिनके लिए संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम उम्मीद की सबसे मजबूत डोर बन चुकी है।

