धनौरा जटान में असहाय परिवार को संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता

धनौरा जटान गांव में पांच बच्चों वाले असहाय परिवार तक पहुँची अन्नपूर्णा मुहिम, तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा चल रहा राहत अभियान

हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के धनौरा जटान गांव में रहने वाले एक अति निर्धन और असहाय परिवार की स्थिति उस समय सामने आई, जब गांव में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के शिष्य अन्नपूर्णा मुहिम के तहत राहत सामग्री लेकर पहुंचे। परिवार में पांच छोटे बच्चे हैं, जिनके माता-पिता का निधन हो चुका है। बच्चों का पालन-पोषण उनकी दादी कर रही हैं और परिवार अपने चाचा के घर में रह रहा है। संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई इस सहायता में राशन और दैनिक ज़रूरत की सामग्री शामिल रही। इस दौरान परिवार, बच्चों और गांव के लोगों से बातचीत कर उनकी स्थिति को सामने रखा गया।

अन्नपूर्णा मुहिम: धनौरा जटान गांव परिवार के प्रमुख बिंदु:

  • स्थान: गांव धनौरा जटान, लाडवा क्षेत्र, जिला कुरुक्षेत्र, हरियाणा
  • लाभार्थी परिवार: पांच छोटे बच्चे और उनकी दादी
  • माता-पिता: दोनों का निधन हो चुका है
  • रहने की स्थिति: अपना घर नहीं, चाचा के घर में निवास
  • सहायता का माध्यम: अन्नपूर्णा मुहिम
  • मार्गदर्शन: जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज
  • संचालन: मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट, कुरुक्षेत्र
  • सहायता का स्वरूप: राशन व दैनिक उपयोग की सामग्री
  • शर्तें: नशा-मुक्त और मांसाहार-मुक्त जीवन

गांव धनौरा जटान में परिवार की वास्तविक स्थिति

धनौरा जटान गांव में रहने वाला यह परिवार लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। परिवार में कुल पांच बच्चे हैं, जिनके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। बच्चों की देखभाल और पालन-पोषण की पूरी ज़िम्मेदारी उनकी दादी पर है। दादी ने बताया कि सरकारी राशन से किसी तरह घर का गुज़ारा होता है, लेकिन अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना बेहद कठिन हो जाता है। बच्चे पढ़ाई भी करते हैं और ज़रूरत के चलते घर के कामों में हाथ भी बंटाते हैं।

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परिवार का अपना कोई मकान नहीं है। वे अपने चाचा के घर में रह रहे हैं, जैसा कि मौके पर मौजूद लोगों और जानकारी के अनुसार बताया गया। दादी अकेले बच्चों को स्कूल भेजने, भोजन की व्यवस्था करने और रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करने का प्रयास कर रही हैं।

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत दी गई राहत सामग्री

जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने परिवार के लिए राहत किट भिजवाया। सेवादारों ने बताया कि यह किट सभी ज़रूरतमंद परिवारों को दी जाती है, ताकि रसोई की बुनियादी आवश्यकताएं पूरी हो सकें।

राशन किट में शामिल सामग्री:

सामग्रीमात्रा
गेहूं का आटा25 किलो
चावल5 किलो
चीनी4 किलो
प्याज़5 किलो
आलू5 किलो
मूंग दाल500 ग्राम
चना दाल500 ग्राम
काला चना500 ग्राम
दूध पाउडर2 डिब्बे
सरसों का तेल1 पैक
अचार2 पैकेट
हल्दी, लाल मिर्च, जीरानिर्धारित मात्रा
टाटा नमक1 किलो
डिटर्जेंट व साबुनआवश्यक मात्रा
चाय1 पैक

सेवादारों ने स्पष्ट किया कि इस सहायता के लिए न तो किसी प्रकार की पर्ची काटी जाती है और न ही किसी से दान लिया जाता है।

सेवादारों का पक्ष और मुहिम का उद्देश्य

सेवादारों ने बताया कि गांव में मौजूद भक्तों ने इस परिवार की स्थिति की जानकारी दी थी। इसके बाद सर्वे किया गया और फिर सहायता पहुंचाई गई। उनका कहना था कि अन्नपूर्णा मुहिम का उद्देश्य केवल राशन देना नहीं है, बल्कि उन सभी ज़रूरतों को पूरा करना है जो सरकारी योजनाओं से पूरी नहीं हो पातीं।

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इस मुहिम के तहत शिक्षा, स्कूल ड्रेस, किताबें, गैस सिलेंडर और अन्य दैनिक आवश्यकताओं की व्यवस्था भी की जाती है। पूरे भारत देश में यह मुहिम बड़े स्तर पर चल रही है और हर महीने हज़ारों परिवारों को सहायता दी जा रही है।

परिवार और बच्चों की प्रतिक्रिया

बच्चों से बातचीत में उन्होंने बताया कि वे पढ़ाई करते हैं, लेकिन मजबूरी में कुछ काम भी करना पड़ता है। जब उनसे पूछा गया कि यदि पढ़ाई से जुड़ी सभी ज़रूरतें पूरी कर दी जाएं तो वे क्या करना चाहेंगे, तो बच्चों ने कहा कि वे पढ़ाई करना चाहेंगे।

दादी ने बताया कि उन्हें इस मुहिम की जानकारी सुखवीर के माध्यम से मिली। बाद में संपर्क कर सहायता के लिए बात हुई और राशन सामग्री परिवार तक पहुंचाई गई। परिवार को एक कार्ड भी दिया गया, जिसमें आश्रम और मुहिम से जुड़े संपर्क नंबर दर्ज हैं। जरूरत पड़ने पर परिवार दोबारा संपर्क कर सकता है।

ग्राम प्रधान और गांव के लोगों की प्रतिक्रिया

गांव धनौरा जटान के ग्राम प्रधान प्रीतपाल सिंह ने परिवार की स्थिति को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि परिवार का कमाने वाला सदस्य करंट लगने से गुज़र (मर) गया था और बाद में बच्चों की मां का भी किडनी फेल होने से निधन हो गया। अब दादी ही बच्चों की देखभाल कर रही हैं और बच्चों के चाचा भी सीमित सहायता ही कर पाते हैं।

ग्राम प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले कभी ऐसा नहीं देखा कि कोई संत गांव में आकर बिना कुछ लिए मदद करे। उन्होंने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत किए जा रहे कार्यों को सराहनीय बताया और तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज तथा उनके शिष्यों का धन्यवाद किया।

अन्नपूर्णा मुहिम से जुड़ी आवश्यक शर्तें

अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत राहत सामग्री केवल उन्हीं ज़रूरतमंद परिवारों को दी जाती है, जो नशा-मुक्त जीवन जीते हैं और मांस अथवा किसी भी प्रकार की अभक्ष वस्तुओं का सेवन नहीं करते। यदि कोई लाभार्थी इन शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसकी सहायता तत्काल बंद कर दी जाती है।

मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा संचालित इस मुहिम के अंतर्गत खाद्य सामग्री, गैस सिलेंडर और अन्य राहत सामग्री निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले उन बच्चों की भी सहायता की जाती है, जिनके पास स्कूल ड्रेस और किताबें खरीदने की सामर्थ्य नहीं होती।

अन्नपूर्णा मुहिम गांव-गांव और शहरों तक पहुंच रही है

धनौरा जटान का यह मामला उन परिवारों की स्थिति को सामने लाता है, जिनके लिए दैनिक जीवन की ज़रूरतें पूरी करना चुनौती बना हुआ है। इस मुहिम के तहत ज़रूरतमंद परिवारों को निरंतर सहायता उपलब्ध कराई जाती है, ताकि जब तक परिवार में कोई कमाने वाला सदस्य न हो, तब तक मूल आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे।

यह पहल ज़रूरतमंदों तक राहत पहुंचाने के साथ-साथ गांव के लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है और स्थानीय स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आ रही है।

निरंतर सहायता और संपर्क व्यवस्था

अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत सहायता प्राप्त करने वाले लाभार्थी परिवारों को यह भी जानकारी दी गई कि यदि राशन सामग्री या गैस सिलेंडर समाप्त होने में दो दिन शेष हों, तो वे पहले से संपर्क कर सकते हैं, ताकि नई पैकिंग की व्यवस्था समय पर की जा सके। इसके लिए संत रामपाल जी महाराज की ओर से संपर्क नंबर 9992800455, 9992600771, 9992600161 और 9992600162 उपलब्ध कराए गए हैं। 

यह मुहिम जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित की जा रही है, जिसके तहत ज़रूरतमंद, असहाय और निर्धन परिवारों तक निशुल्क खाद्य सामग्री, गैस सिलेंडर और अन्य आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। ट्रस्ट के सेवादारों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य केवल तत्काल राहत देना नहीं, बल्कि तब तक निरंतर सहयोग सुनिश्चित करना है, जब तक परिवार आत्मनिर्भर स्थिति में नहीं पहुंच जाता।

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