कुरुक्षेत्र के गांव बहादुरपुर में एक ऐसा हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहाँ तीन नन्हे मासूमों के सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। इन अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी इनकी 80 वर्षीय बुजुर्ग दादी के कंधों पर है, जो स्वयं वृद्धावस्था की बीमारियों और अत्यंत गरीबी से जूझ रही हैं।
परिवार की माली हालत इतनी खस्ता है कि उनके पास रहने के लिए एक सुरक्षित छत तक नहीं है। घर की दीवारें और छत इस कदर जर्जर हो चुकी हैं कि वे कभी भी ढह सकती हैं। शौचालय और स्नानघर के नाम पर केवल बिना छत का एक ढांचा है, जिसे उपयोग करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
बहुत कम संसाधनों में जीवन का संघर्ष
बुजुर्ग दादी ने रुंधे गले से बताया कि उन्हें सरकार की ओर से मात्र 3,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है। इसी सीमित राशि में उन्हें तीन बच्चों का पेट पालना, उनकी शिक्षा और स्वयं की दवाइयों का खर्च करना पड़ता है।
जगदीश नामक ग्रामीण की सूचना पर जब संत रामपाल जी महाराज के सेवादार इस घर में पहुँचे, तो स्थिति अत्यंत दयनीय पाई गई। घर में न तो सुरक्षा के लिए दरवाजे हैं और न ही पर्याप्त खाद्य सामग्री। संसाधनों के अभाव में यह परिवार समाज की मुख्यधारा से कटा हुआ और उपेक्षित महसूस कर रहा था।
अन्नपूर्णा मुहिम: मानवता की एक नई मिसाल
इस संकट की घड़ी में संत रामपाल जी महाराज ने इस घर में राशन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं का अंबार लगा दिया।
संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट निर्देश है कि कोई भी निर्धन परिवार भूखा न सोए। सेवादारों ने बताया कि यह सहायता केवल एक बार के लिए नहीं है, बल्कि जब भी राशन समाप्त होगा, ट्रस्ट द्वारा पुनः आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इस मुहिम का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सहारा प्रदान करना है।
विस्तृत खाद्य एवं घरेलू सामग्री का वितरण
संत रामपाल जी महाराज की ओर से इस परिवार को जो सहायता सामग्री प्रदान की गई है, उसकी सूची काफी विस्तृत है। संत रामपाल जी महाराज की तरफ़ से यह भी घोषणा की है कि यदि गैस सिलेंडर समाप्त होता है या मकान की मरम्मत की आवश्यकता होती है, तो वह खर्च भी पूर्णतः संत रामपाल जी महाराज द्वारा किया जाएगा।
| क्र.सं. | सामग्री का नाम | मात्रा/विवरण |
| 1 | आटा | 25 किलो |
| 2 | चावल | 5 किलो |
| 3 | आलू | 5 किलो |
| 4 | प्याज | 5 किलो |
| 5 | चीनी | 4 किलो |
| 6 | नमक (टाटा) | 1 किलो |
| 7 | तेल | 1 लीटर |
| 8 | अमूल दूध (सूखा) | 2 किलो |
| 9 | मूंग दाल | ½ किलो |
| 10 | चना दाल | ½ किलो |
| 11 | नहाने का साबुन | 1 सेट (4 टिक्की) |
| 12 | चाय पत्ती (टाटा) | 250 ग्राम |
| 13 | मिर्च पाउडर | 100 ग्राम |
| 14 | हल्दी पाउडर | 150 ग्राम |
| 15 | जीरा | 150 ग्राम |
| 16 | आचार | 1 पैकेट |
| 17 | कपड़े धोने का साबुन | 1 सेट ( 4 टिक्की) |
| 18 | घड़ी डिटर्जेंट पाउडर (सर्फ) | 500 ग्राम |
| 19 | मूंग दाल (हरी) | ½ किलो |
सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार और नशामुक्त समाज
अन्नपूर्णा मुहिम के तहत सहायता प्राप्त करने की एक अनिवार्य शर्त यह है कि लाभार्थी पूर्णतः नशामुक्त और शाकाहारी होना चाहिए। संत रामपाल जी महाराज का मानना है कि नशा और मांसाहार न केवल स्वास्थ्य को बिगाड़ते हैं, बल्कि आध्यात्मिक पतन का भी मुख्य कारण हैं।
इस मुहिम के माध्यम से समाज में दहेज प्रथा उन्मूलन, रक्त दान और नशामुक्ति जैसे सकारात्मक बदलाव लाए जा रहे हैं। जेल में होने के बावजूद महाराज जी के मार्गदर्शन में देश भर में 12 से 14 विशाल आश्रम संचालित हैं, जहाँ से परोपकार के ये कार्य अनवरत जारी हैं।
संत रामपाल जी महाराज की अनूठी मदद से भूले-बिसरे चेहरों पर मुस्कान
कुरुक्षेत्र के बहादुरपुर गांव में अनाथ बच्चों और असहाय बुजुर्ग महिला को मिली यह सहायता इस बात का प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज के विचार धरातल पर क्रियान्वित हो रहे हैं।
जहाँ दुनिया स्वार्थ में डूबी है, वहीं संत रामपाल महाराज जी की अन्नपूर्णा मुहिम उन मुरझाए चेहरों पर मुस्कान लाने का कार्य कर रही है जिन्हें समाज भूल चुका था। यह सेवा कार्य केवल राशन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, नैतिक और व्यसनमुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
निःस्वार्थ सहायता से संतोष
सहायता प्राप्त होने के पश्चात बुजुर्ग माताजी अत्यंत संतुष्ट एवं भावुक दिखाई दीं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में पहली बार किसी ने इस स्तर की सहायता प्रदान की है।
अब तक लोग केवल पर्चियाँ काटने या औपचारिकताएँ निभाने आते रहे, परंतु संत रामपाल जी महाराज ने न केवल वास्तविक सहायता की, बल्कि आवश्यक राशन भी उपलब्ध कराया, जो उनके लिए अत्यंत सहायक सिद्ध हुआ।
ग्रामीणों द्वारा सहायता की सराहना
ग्रामवासियों ने संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई इस सहायता की काफ़ी प्रशंसा की। उन्होंने इसे अपना सौभाग्य बताते हुए कहा कि जिन अनाथ एवं निर्धन बच्चों को यह सहयोग प्राप्त हुआ है, उन पर यह एक अत्यंत बड़ी कृपा है।

