दरभंगा के कमरौली गांव में बेघर दंपती तक पहुँची अन्नपूर्णा मुहिम

दरभंगा के कमरौली गांव में बेघर दंपती तक पहुँची अन्नपूर्णा मुहिम, संत रामपाल जी महाराज से मिली रोटी और सम्मान

बिहार के दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड अंतर्गत कमरौली गांव में एक ऐसा परिवार सामने आया, जिसकी पीड़ा वर्षों से खामोशी में दबकर रह गई थी। श्रवण कुमार, जो बोलने और ठीक से चलने में असमर्थ हैं, और उनकी पत्नी निशा, जिनकी आवाज़ मानो हालातों ने छीन ली हो—दोनों के पास न तो पक्का घर था और न ही दो वक्त की रोटी का भरोसा। परिवार बिखर चुका था। दो बेटे गरीबी की आंधी में अलग हो गए। ऐसे समय में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने भोजन ही नहीं, बल्कि स्वाभिमान के साथ सहायता उपलब्ध कराई।

यह राहत संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई, जिसका उद्देश्य असहाय परिवारों को निरंतर सहयोग देकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाना है।

अन्नपूर्णा मुहिम: कमरौली गांव परिवार के प्रमुख बिंदु

  • स्थान: कमरौली गांव, बहादुरपुर प्रखंड, जिला दरभंगा, बिहार
  • लाभार्थी परिवार: श्रवण कुमार, पत्नी निशा और एक पुत्र
  • पारिवारिक स्थिति: बोलने में असमर्थता, गंभीर आर्थिक संकट
  • रहने की स्थिति: घास-फूस की जर्जर झोपड़ी
  • आजीविका: पुत्र की सीमित आय (किराना दुकान)

परिवार की वास्तविक स्थिति

परिवार जिस झोपड़ी में रह रहा था, उसकी हालत बेहद दयनीय थी। बारिश और आंधी में कभी भी ढहने का खतरा बना रहता था। अंदर न तो पर्याप्त राशन था और न ही सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था। बोलने में असमर्थता के कारण श्रवण कुमार से कई बार काम तो कराया गया, पर मेहनत का उचित मेहनताना नहीं मिला। पत्नी निशा भी अपनी बात स्पष्ट नहीं रख पातीं। 

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पुत्र की लगभग 4,000 रुपये मासिक आय से तीन-चार सदस्यों का गुज़ारा मुश्किल था। सरकारी राशन कार्ड भी उपलब्ध नहीं था, जिससे हालात और गंभीर हो गए थे।

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत दी गई राहत सामग्री

संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार सेवादारों ने परिवार को अन्नपूर्णा मुहिम की विस्तृत राहत किट प्रदान की, ताकि भोजन, स्वच्छता और सुरक्षित भंडारण की आवश्यकताएँ पूरी हो सकें।

राहत किट में शामिल सामग्री:

सामग्रीमात्रा
चावल15 किलो
गेहूं का आटा5 किलो
चीनी2 किलो
मूंग दाल500 ग्राम
चना दाल500 ग्राम
काला चना500 ग्राम
आलू2.5 किलो
प्याज़2.5 किलो
सरसों का तेल1 लीटर
दूध पाउडर500 ग्राम
अचार500 ग्राम
टाटा नमक1 किलो
चाय1 पैक
हल्दी, जीरा, लाल मिर्चनिर्धारित मात्रा
साबुन (नहाने व कपड़े)आवश्यक मात्रा
सर्फ500 ग्राम
स्टोरेज ट्रंक1
प्लास्टिक ड्रम2

सेवादारों ने स्पष्ट किया कि यह सहायता पूरी तरह निशुल्क है; इसके लिए किसी प्रकार की पर्ची या दान नहीं लिया जाता।

बरसात को देखते हुए विशेष व्यवस्था

बरसात के मौसम में झोपड़ी की जर्जर हालत को देखते हुए अन्नपूर्णा मुहिम के तहत परिवार को बड़े आकार की उच्च गुणवत्ता वाली त्रिपाल (तारपोलिन शीट) उपलब्ध कराई गई, जिसे झोपड़ी के छप्पर पर बिछाया गया। इससे परिवार को बारिश से तत्काल राहत मिली और रहने की स्थिति कुछ सुरक्षित हुई।

निरंतर सहायता की व्यवस्था

परिवार को एक संपर्क कार्ड दिया गया, जिसमें आश्रम और नजदीकी सेवादारों के नंबर दर्ज हैं। निर्देश दिया गया कि राशन समाप्त होने से दो दिन पूर्व संपर्क करें, ताकि नई पैकिंग समय पर पहुँचाई जा सके। सेवादारों ने बताया कि यह सहायता तब तक जारी रहेगी, जब तक परिवार की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती।

परिवार और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

परिवार ने भावुक होकर बताया कि अब उन्हें भूखे सोने की चिंता नहीं रही। ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार देखा है कि कोई संत गांव-गांव जाकर असहायों को खोजकर मदद करता है—वह भी बिना किसी स्वार्थ के। बुजुर्गों ने इस पहल को मानवता का सच्चा उदाहरण बताया और संत रामपाल जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त किया।

अन्नपूर्णा मुहिम से जुड़ी आवश्यक शर्तें

अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत राहत सामग्री केवल उन्हीं जरूरतमंद परिवारों को दी जाती है, जो पूर्ण रूप से नशा-मुक्त जीवन जीते हैं और मांस अथवा किसी भी प्रकार की अभक्ष वस्तुओं का सेवन नहीं करते। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में सहायता तत्काल बंद कर दी जाती है।

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