रोहतक के बलंबा गाँव ने देखी संत रामपाल जी की विशेष रजा

संत रामपाल जी महाराज की कृपा रोहतक के बहलबा (बलंबा) के अनाथ भाई-बहन के लिए बनी जीवनरेखा

कठोर परिस्थितियाँ अक्सर लोगों को असहाय बना देती हैं, लेकिन जब उचित व सही मार्गदर्शन हो तो छोटी-सी आशा भी जीवन बदल सकती है। रोहतक, हरियाणा के बलंबा गाँव में एक अनाथ भाई-बहन भी ऐसे ही कठिनाई में समय व्यतीत कर रहे थे। इस मुश्किल दौर में संत रामपाल जी महाराज ने अपनी अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से इन बच्चों को राहत, सुरक्षा और स्थायी सहारा प्रदान किया। आइए जानते है इस लेख के माध्यम से कि कैसे संत रामपाल जी महाराज ने अनाथ बच्चों के सिर पर अपना हाथ रख उनको प्रदान की एक नई जीने की राह।

संत रामपाल जी महाराज ने हमेशा के लिए थामा दोनों बच्चों का हाथ

गाँव बलंबा के इन दोनों बच्चों ने 5–6 साल की छोटी उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया था। इस आफत के बाद उनका जीवन आर्थिक और भावनात्मक संकट से घिर गया। वे स्थायी सहारे बगैर अनाथ जीवन गुज़ार रहे थे। कभी-कभी पड़ोसियों की सहायता से ही भर पेट खाना नसीब होता था, बाकी समय भूखे रहकर ही समय गुजरता था।

इस मुश्किल वक्त में, जब कहीं से किसी ओर सहारे की उम्मीद नहीं थी, तब संत रामपाल जी महाराज ने असहाय परिवार को राहत दी। संत रामपाल जी महाराज के आदेश अनुसार उनको राशन रूप में राहत सामग्री और अतिरिक्त आवश्यक वस्तुएं प्रदान की गई।

अनाथ बच्चों की मौजूदा स्थिति

संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने जब घर का जायज़ा लिया, तो स्थिति बदतर मिली। देखने पर विश्वास नहीं होता था और मन में सवाल आता है कि वास्तविक में दो असहाय बच्चे ऐसी स्थिति में कैसे जीवन निर्वाह कर रहे होंगे।

  • एक छोटे, जर्जर कमरे में गुजारा
  • बरसात में छत से पानी टपकना 
  • सीमित रसोई व्यवस्था
  • शौचालय अनुपस्थित

पड़ोसी चाचाजी ने बताया कि बच्चों के लिए सर्वप्रथम शौचालय और घर की मरम्मत आवश्यक है। इन परिस्थितियों को देखकर स्पष्ट हुआ कि बच्चों को केवल खाने की ही नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं की भी सख्त जरूरत है।

प्रदान की गई राहत सामग्री का विवरण

संत रामपाल जी महाराज ने अपनी अन्नपूर्णा मुहिम के तहत बच्चों के लिए व्यापक सामग्री भेजी, जिसमें भोजन के साथ-साथ दैनिक उपयोग की वस्तुएँ भी शामिल थीं।

सामग्रीमात्रा
आटा25 किलो
चावल5 किलो 
चीनी2 किलो 
चना दाल व मूंग दाल1-1 किलो 
नमक1 किलो 
सूखा दूध1 किलो
तेल1 लीटर
अचार½ किलो
चाय पत्ती250 ग्राम
जीरा और हल्दी150-150 ग्राम
लाल मिर्च100 ग्राम
आलू5 किलो 
प्याज5 किलो 
डिटर्जेंट पाउडर½ किलो
नहाने और कपड़े धोने का साबुन1 सेट

संत रामपाल जी महाराज की दया से पहुंचाए गए राशन से बच्चों को खाने के लिए किसी पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है।

सिर्फ एक बार राशन देने तक नहीं सीमित है अन्नपूर्णा मुहिम 

अनुयायियों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज के निर्देश और आदेश पर बच्चों को स्थायी मदद निरंतर प्रदान की जाएगी।

इसके अलावा निम्न कार्य संत रामपाल जी महाराज के आदेश अनुसार करवाए जाने की भी पूरी उम्मीद है:

  • गैस कनेक्शन/सिलेंडर उपलब्ध कराना 
  • घर की मरम्मत (टीप-लिपाई) 
  • शौचालय निर्माण करवाया जाना

संत रामपाल जी महाराज के निर्देश अनुसार अनुयायियों ने घर की वीडियो बनाकर आश्रम कमेटी को भेजने का निर्णय लिया, ताकि आगे की कार्यवाही संत रामपाल जी महाराज के आदेश के अनुसार अति शीघ्र की जा सके।

साथ ही, परिवार को आश्रम के संपर्क नंबर दिए गए और राशन खत्म होने से 2 दिन पहले सूचित करने को कहा, ताकि अविलंब जरूरत अनुसार फिर से नई पैकिंग भेजी जा सके। शिष्यों ने स्पष्ट किया कि संत रामपाल जी महाराज के आदेश अनुसार जब तक यह परिवार आत्मनिर्भर नहीं हो जाता, तब तक संत रामपाल जी महाराज अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत मदद करते रहेंगे।

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सिर्फ परमार्थ के लिए मदद ने उड़ाए सबके होश

जब मदद पहुँची, तो कई ग्राम वासी और माताएँ वहाँ एकत्रित हो गईं। सबने इस सेवा की हृदय की गहराइयों से प्रशंसा की। एक माता जी के शब्द, “बहुत अच्छा काम किया भाई, बच्चे बहुत परेशान रहते थे।”

सबने कहा कि उन्होंने ऐसा संत कभी नहीं देखा, जो मानवता के लिए समर्पित है और ऐसे गाँव-गाँव पहुँचकर अनाथ और बेसहायों के लिए आसरा बन रहे हैं। गांववासियों की भावनाओं से यह साफ झलक रहा था कि वह सब संत रामपाल जी महाराज के द्वारा किए गए परमार्थ के कार्यों को पूरी तरह जायज़ और वास्तविकता में उसका पूरा समर्थन करते है।

कैसे मुमकिन हो रही है यह अद्भुत सेवा

शिष्यों ने अपने गुरुदेव के सत्संग प्रवचनों के आधार से स्पष्ट किया कि जिस तरह एक मोबाइल टावर दूर स्थित होते हुए भी कई किलोमीटर तक नेटवर्क देता है, वैसे ही संत रामपाल जी महाराज की “शब्द-रूपी शक्ति” हर जगह कार्य करती है। फर्क नहीं पड़ता उनके जेल में होने से, उनकी ताकत उसी तरह से प्रत्येक प्राणी पर प्रभाव डाल रही है। एक संत के ज्ञान, शिक्षा और उसके दर्शन पर चर्चा की जानी चाहिए न कि उसके रहने के स्थान और वेशभूषा से।

उनकी यह आध्यात्मिक अलौकिक शक्ति ही आज अन्नपूर्णा मुहिम के तहत अपने बच्चों को खोज रही है। वास्तविकता में गरीब, अनाथ और जरूरतमंदों की मदद, इस बात को स्पष्ट करने का आधार है।

लाभार्थी परिवार के लिए कुछ निर्देश

सहायता केवल उन्हीं परिवारों को दी जाती है जिसका कोई सदस्य किसी भी तरह के नशे या मांस का सेवन न करता हो। यदि कोई व्यक्ति उक्त बुराइयों में से किसी में भी लिप्त पाया जाता है, तो संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम से लाभ लेने के लिए उसे ये सब त्यागना होगा। और यदि सहायता मिलने के पश्चात् भी इन वह आदतों को नहीं छोड़ता, तो उसकी सहायता तुरंत प्रभाव से रोक दी जाएगी। यह नियम लाभार्थियों के नैतिक और सामाजिक सुधार के लिए आवश्यक है।

पूर्ण संत की शब्द शक्ति है ऊर्जा का श्रोत 

संत रामपाल जी महाराज ने आज केवल बलंबा गाँव के दो अनाथ बच्चों को ही नहीं बल्कि विश्व में करोड़ों गरीबों बच्चों को खोज कर अद्भुत लाभ दिए है। आम जन के लिए यह विश्वास करना कठिन होता है क्योंकि वह संत रामपाल जी महाराज की वास्तविक आध्यात्मिक शक्ति से अपरिचित है। आज तक उन्होंने संतो को दान लेते हुए और अपनी झोली भरते हुए ही पाया है। केवल एक पूर्ण संत ही लोगो को निस्वार्थ लाभ देने में सक्षम होते है।

यह पहली बार है जब लोग स्वयं इस परिवर्तन के गवाह बन रहे है जब कलयुग में सतयुग शुरू हो रहा है। संत रामपाल जी महाराज की असीम दया और उनकी शब्द शक्ति इस परिवर्तन के पीछे काम करती है। इस समय के सभी इंसानों के लिए तो यह एक स्वर्ण अवसर है जब पूर्ण परमेश्वर कबीर साहेब, संत रामपाल जी महाराज के रूप में स्वयं वास्तविक लाभ देने के लिए जन-जन तक पहुंच रहे है।

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