दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित दौलतपुर गांव से मानवता की एक अत्यंत भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक परिवार पिछले आठ वर्षों से गंभीर बीमारियों और अत्यधिक दरिद्रता के जाल में फंसा हुआ था। परिवार के मुखिया राजवीर, जो पहले घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, गठिया, फैटी लीवर, किडनी की पथरी और हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याओं के कारण बिस्तर पर आ गए। घर की छत के नाम पर टूटी हुई टीन और दीवारों की जगह फटे हुए पर्दे इस परिवार की लाचारी की कहानी कह रहे थे। ऐसी विकट परिस्थिति में संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम ने इस परिवार को सहारा देकर विनाश की कगार से बाहर निकाला है।
प्रमुख बिंदु
- दिल्ली के दौलतपुर गांव में 8 साल से बीमार राजवीर के परिवार को मिली बड़ी राहत।
- संत रामपाल जी महाराज ने निशुल्क राशन, गैस सिलेंडर और दवाइयां मुहैया कराईं।
- एनसीसी कैंप जाने वाले छात्र को वर्दी और शिक्षा सामग्री के लिए वित्तीय सहायता।
- बिना किसी दान या चंदे के संचालित हो रही है यह अन्नपूर्णा मुहिम।
- मदद जारी रखने का आश्वासन जब तक परिवार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हो जाता।
बीमारियों के चक्रव्यूह में फंसा राजवीर का परिवार
राजवीर ने बताया कि उनकी स्थिति पिछले 8-9 वर्षों में लगातार बिगड़ती चली गई। शुरुआत में मामूली दर्द से शुरू हुआ गठिया अब उन्हें चलने-फिरने में भी असमर्थ बना चुका है। इसके साथ ही लीवर और किडनी की गंभीर बीमारियों ने उन्हें पूरी तरह खाट पर ला दिया है। घर में पत्नी ही एकमात्र सहारा हैं, जो दूसरों के घरों में काम करके किसी तरह बच्चों का पेट पाल रही थीं।
संत रामपाल जी महाराज का मानवीय दृष्टिकोण
महाराज जी का स्पष्ट निर्देश है कि समाज के उस अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुँचनी चाहिए जिसके पास सरकारी सहायता नहीं पहुँच पा रही है। दौलतपुर के स्थानीय अनुयायियों ने जब इस परिवार की दयनीय स्थिति का जायजा लिया और महाराज जी को सूचित किया, तो तुरंत राहत सामग्री भेजने का आदेश हुआ। यह सेवा पूरी तरह निस्वार्थ है और इसके लिए किसी प्रकार का दान या चंदा नहीं लिया जाता है।
दी गई राहत सामग्री का विस्तृत विवरण
संत रामपाल जी महाराज की ओर से न केवल भोजन बल्कि दैनिक उपयोग की हर छोटी-बड़ी वस्तु उपलब्ध कराई गई है। इसमें अनाज, दालें, मसाले, तेल और स्वच्छता का सामान शामिल है। साथ ही परिवार को एक गैस सिलेंडर भी दिया गया है ताकि उन्हें चूल्हा जलाने की कठिनाई से मुक्ति मिल सके।
शिक्षा और स्वास्थ्य हेतु महाराज जी का विशेष योगदान
परिवार का एक बेटा एनसीसी कैंप में जाना चाहता था लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उसके पास वर्दी के पैसे नहीं थे। संत रामपाल जी महाराज ने उस बच्चे की वर्दी और पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का निर्णय लिया। इसके साथ ही राजवीर की उन दवाइयों का प्रबंध भी महाराज जी द्वारा किया जा रहा है जो वे खरीद पाने में असमर्थ थे।
सहायता प्राप्त करने हेतु अनिवार्य नियम
संत रामपाल जी महाराज की इस मुहिम का लाभ केवल उन्हीं को मिलता है जो नशा मुक्त और शाकाहारी जीवन जीने का संकल्प लेते हैं। राजवीर के परिवार ने भी इन बुराइयों से दूर रहने का वचन दिया है। यदि कोई सहायता प्राप्त करने के बाद नशा या मांसाहार करता पाया जाता है, तो सहायता तुरंत रोक दी जाती है।

राहत सामग्री का डेटा
| वस्तु का नाम | मात्रा |
| आटा | 25 किलो |
| आलू / प्याज | 5-5 किलो |
| सूखा दूध (बच्चों हेतु) | 1 किलो |
| मूंग / चना / काली दाल | आधा-आधा किलो |
| हल्दी / जीरा / मिर्च | 100-150 ग्राम |
| चावल | 5 किलो |
| चीनी | 4 किलो |
| कुकिंग ऑयल | 2 लीटर |
| नमक / चाय पत्ती | 1-1 पैकेट |
| साबुन / सर्फ | पर्याप्त मात्रा |
| आचार | 1 किलो |
| गैस सिलेंडर | 1 |
असहायों के मसीहा: संत रामपाल जी महाराज
संत रामपाल जी महाराज आज के युग में मानवता की सच्ची प्रतिमूर्ति हैं। उनकी शिक्षाएं न केवल आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करती हैं, बल्कि धरातल पर भूखे को भोजन और बीमार को औषधि देकर समाज में सुख-शांति स्थापित कर रही हैं। दौलतपुर का यह परिवार आज महाराज जी की असीम कृपा के कारण चैन की सांस ले पा रहा है। महाराज जी का यह मिशन सिद्ध करता है कि यदि गुरु की दया हो, तो घोर अंधकार में भी प्रकाश संभव है। समस्त ग्रामीण और लाभान्वित परिवार संत रामपाल जी महाराज के इस उपकार के लिए सदैव ऋणी रहेंगे।

